बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) स्थित जियो वर्ल्ड प्लाजा में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), भारत सरकार के फर्जी पहचानपत्र का इस्तेमाल कर हथियारों के साथ प्रवेश करने के मामले में मुंबई पुलिस की रिमांड कॉपी में कई अहम तथ्य सामने आए हैं। पुलिस के मुताबिक, तीन लोगों ने खुद को उच्च पदस्थ सरकारी अधिकारी बताकर निजी सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित किया और हथियार के साथ मॉल में प्रवेश हासिल किया। इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि तीसरे की तलाश जारी है।
पीएम मोदी।
रिमांड कॉपी के मुताबिक, घटना 7 सितंबर 2026 को शाम करीब 4.50 बजे की है। पुलिस को शाम करीब 6 बजे सूचना मिली कि जियो वर्ल्ड प्लाजा में तीन व्यक्ति प्रधानमंत्री कार्यालय, भारत सरकार का फर्जी पहचानपत्र दिखाकर हथियारों के साथ दाखिल हुए हैं। इसके बाद पुलिस ने मॉल के सीसीटीवी फुटेज की जांच की। फुटेज में तीनों संदिग्धों को प्रवेश करते हुए देखा गया।
पुलिस ने सुरक्षा गार्ड से भी पूछताछ की। उसके मुताबिक तीनों को शुरुआत में हथियारों के साथ देखकर रोका गया था। हालांकि, उनमें से एक ने मोबाइल में मौजूद प्रधानमंत्री कार्यालय का पहचानपत्र दिखाया और खुद को सरकारी अधिकारी बताया। इसके बाद सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव बनाकर तीनों को अंदर प्रवेश दिया गया। पुलिस के अनुसार, तीनों में से एक व्यक्ति ने नीले रंग की सफारी पहन रखी थी और उसके पास हथियार था।
कार के नंबर से आरोपियों तक पहुंची पुलिस
जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज से उस वाहन का नंबर हासिल किया गया, जिससे आरोपी पहुंचे थे। वाहन से जुड़े मोबाइल नंबरों की जानकारी के आधार पर पुलिस रोहन प्रेमल पारिख (24) तक पहुंची। पुलिस जब उसके खार स्थित घर पहुंची तो वह वहां मिला। पूछताछ में उसने अपने साथ मौजूद दो अन्य लोगों के नाम दिलीप राजाराम कुंदे (49) और प्रथमेश गणेश बागुल (26) बताए।पुलिस का कहना है कि रोहन के पास प्रधानमंत्री कार्यालय, भारत सरकार का पहचानपत्र मिला। पहचानपत्र के संबंध में पूछताछ करने पर वह संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। पुलिस के अनुसार, PMO में काम करने वाले अधिकारियों के बारे में पूछे जाने पर भी उसने स्पष्ट जानकारी नहीं दी।
रिवॉल्वर और छह जिंदा कारतूस बरामद
रिमांड आवेदन में सबसे महत्वपूर्ण बरामदगी दिलीप राजाराम कुंदे से बताई गई है। पुलिस के मुताबिक उसके पास से एक रिवॉल्वर और छह जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं। हथियार पर दर्ज नंबरों और उसकी वैधता की भी जांच की जा रही है। पुलिस ने महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम के तहत हथियार रखने और ले जाने से जुड़े प्रावधानों के उल्लंघन की भी जांच शुरू की है।
पुलिस को आरोपी के मोबाइल फोन से भी अहम जानकारी मिलने की उम्मीद है। रिमांड कॉपी में कहा गया है कि जब्त मोबाइल फोन का एक्सट्रैक्शन किया जाएगा, ताकि उसमें मौजूद आपत्तिजनक अथवा मामले से संबंधित जानकारी हासिल की जा सके।
फर्जी PMO पहचानपत्र की भी जांच
जांच में सामने आया है कि आरोपी द्वारा इस्तेमाल किए गए पहचानपत्र में कई विसंगतियां थीं। पुलिस के अनुसार, पहचानपत्र में उसे जारी करने वाले अधिकारी का पद दर्ज नहीं था। उसमें जारी किए जाने की तारीख तो थी, लेकिन उसकी वैधता समाप्त होने की तारीख का उल्लेख नहीं था।
पुलिस का आरोप है कि आरोपियों ने पहले से साजिश और तैयारी कर फर्जी पहचानपत्र का इस्तेमाल किया और खुद को उच्च पदस्थ सरकारी अधिकारी बताकर निजी सुरक्षा कर्मचारियों पर प्रभाव डाला। इसी आधार पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है और फर्जी पहचानपत्र तैयार करने से जुड़े प्रावधान भी जोड़े जा रहे हैं।
पुलिस ने मांगी हिरासत
मुंबई पुलिस ने अदालत से आरोपियों की पुलिस हिरासत इसलिए मांगी है क्योंकि मामले में सीसीटीवी फुटेज, घटनास्थल के रिकॉर्ड, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों की विस्तृत जांच बाकी है। पुलिस यह भी पता लगाना चाहती है कि फर्जी PMO पहचानपत्र कहां और किसने तैयार किया, आरोपियों के बीच क्या संबंध है तथा हथियार और पहचानपत्र के इस्तेमाल के पीछे पूरी योजना क्या थी।
मामले में रोहन प्रेमल पारिख और दिलीप राजाराम कुंदे को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि प्रथमेश गणेश बागुल को पुलिस ने ‘वांछित आरोपी’ बताया है। रिमांड कॉपी में पुलिस ने कहा है कि मामले की तह तक पहुंचने के लिए गिरफ्तार आरोपियों से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।
मुंबई पुलिस का बयान
तीन लोगों ने कथित तौर पर एक संदिग्ध सरकारी पहचान पत्र (Govt ID Card) का इस्तेमाल कर हथियार के साथ मॉल की सुरक्षा व्यवस्था को पार किया और जबरन जियो वर्ल्ड प्लाजा, बीकेसी में प्रवेश किया। इस मामले में बीकेसी पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। इनमें सरकारी कर्मचारी के रूप में प्रतिरूपण (Impersonation of a Public Servant) और हथियार के साथ अवैध प्रवेश से संबंधित धाराएं शामिल हैं।मामले की आगे की जांच अपराध शाखा द्वारा की जा रही है। जांच में सामने आया है कि बरामद हथियार लाइसेंसी है। इस संबंध में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। कृपया ध्यान दें कि यह घटना कल हुई थी और इसका आज मुंबई में प्रधानमंत्री के दौरे से कोई संबंध नहीं है।
सतीश मानेशिंदे, वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि लगाए गए आरोप एक संवेदनशील विषय से जुड़े हैं। इसलिए हमारी ओर से उचित सत्यापन और पर्याप्त जांच किए जाने के बाद ही हम इस संबंध में बयान जारी करेंगे। इस बीच, मैं उम्मीद करता हूं कि सभी लोग इस बात का ध्यान रखेंगे कि राहुल का जियो मॉल का दौरा पूरी तरह निजी था और जैसा कि पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है, इसका आज प्रधानमंत्री के मुंबई दौरे से कोई संबंध नहीं है।
