नाटो चीफ के यूक्रेन-रूस जंग को लेकर रूसी राष्ट्रपति पुतिन और प्रधानमंत्री मोदी के बीच हुए एक बातचीत के दावे को भारत ने सिरे से खारिज कर दिया है। नाटो प्रमुख के इस दावे पर कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से यूक्रेन योजना मांगी थी, विदेश मंत्रालय ने कहा कि उनका बयान तथ्यात्मक रूप से गलत और पूरी तरह से निराधार है।
रूसी राष्ट्रपति पुतिन और भारत के पीएम नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो- AP)
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नाटों चीफ को भारत की दो टूक
विदेश मंत्रालय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कभी भी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से नाटो प्रमुख मार्क रूट के सुझाए तरीके से बात नहीं की है। नाटो चीफ के इस बयान पर विदेश मंत्रालय ने सख्त रूख अपनाते हुए कहा कि हम नाटो जैसे महत्वपूर्ण संगठन के नेतृत्व से सार्वजनिक बयानों में अधिक जिम्मेदारी और सटीकता बरतने की उम्मीद करते हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि ऐसी ‘‘अटकलें या लापरवाही भरी’’ टिप्पणियां, जो प्रधानमंत्री मोदी को किसी भी तरह से गलत तरीके से पेश करती हैं या ऐसी बातचीत होने का दावा करती हैं, जो कभी हुई ही नहीं, ‘‘अस्वीकार्य’’ हैं। भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल की निरंतर खरीद को उचित ठहराते हुए जायसवाल ने कहा कि इस मामले में कोई ‘‘दोहरा मापदंड’’ नहीं हो सकता। उन्होंने यह बात अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया टिप्पणियों की पृष्ठभूमि में कही।
नाटो चीफ ने क्या दावा किया था
नाटो के महासचिव मार्क रूट ने गुरुवार को दावा किया कि अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ के कारण भारत ने रूस से यूक्रेन युद्ध की रणनीति पर स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मामले पर सीधे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात की है। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान सीएनएन से बात करते हुए रूट ने कहा- "भारत पर ट्रंप के टैरिफ का रूस पर बड़ा असर पड़ रहा है। भारत पुतिन से फोन पर बात कर रहा है और नरेंद्र मोदी उनसे यूक्रेन पर अपनी रणनीति समझाने के लिए कह रहे हैं क्योंकि भारत पर टैरिफ का असर पड़ रहा है।"
यूरोपीय संघ को भी दिखाया आइना
जायसवाल ने रूस के साथ भारत के ऊर्जा संबंधों की यूरोपीय संघ द्वारा हालिया आलोचना को भी खारिज कर दिया। यूरोपीय संघ की विदेश और सुरक्षा नीति प्रमुख काजा कल्लास ने पिछले सप्ताह कहा था कि भारत के सैन्य अभ्यास और रूसी कच्चे तेल की खरीद दोनों पक्षों के बीच ‘‘घनिष्ठ संबंधों के रास्ते में बाधा’’ है। रक्षा और व्यापार जैसे कई प्रमुख क्षेत्रों में नयी दिल्ली के साथ यूरोपीय संघ की भागीदारी बढ़ाने के लिए एक नया रणनीतिक एजेंडा जारी करने के बाद कल्लास ने कहा था, ‘‘क्योंकि अंततः हमारी साझेदारी केवल व्यापार तक ही सीमित नहीं है, बल्कि नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की रक्षा के लिए भी है।’’ जायसवाल ने कहा, ‘‘रूसी तेल पर यूरोपीय संघ की टिप्पणियों के संबंध में, मैं आपका ध्यान राष्ट्रपति ट्रंप सहित कई नेताओं द्वारा की गई इन टिप्पणियों की ओर आकर्षित करना चाहूंगा कि यूरोपीय संघ, नाटो और जी-7 देशों को रूस से तेल आयात रोकने पर विचार करना चाहिए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इस मामले में कोई दोहरा मापदंड नहीं अपनाया जा सकता।’’
