Ram Setu का साक्षात प्रमाण और विज्ञान भी हैरान! भारत से श्रीलंका तक हुई पड़ताल में देखिए राम सेतु का हर सच

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटलEdited by: किशोर जोशी
  • Updated Dec 25, 2022, 08:32 AM IST

Ramsetu News: भारत के रामेश्वरम और श्रीलंका के मन्नार के बीच चट्टानों की उथली हुई चेन है जिसे हम भारत में राम सेतु कहते हैं। जहां भी देखेंगे तो छोटे पत्थरों की ऐसी श्रृंखला नजर आएगी जो किसी समय पानी पर तैरती थी। नासा की जो तस्वीरें आई थीं उसमें ये श्रृंखला साफ नजर आई थी जिसे हम राम सेतु कहते हैं।

KEY HIGHLIGHTS
  • राम सेतु कल्पना नहीं, सबूत देखिए..नोट कर लीजिए
  • भारत से श्रीलंका तक राम सेतु पर सबसे बड़ी पड़ताल
  • 'राम सेतु' विरोधियों को रिपोर्ट बहुत चुभेगी, आस्था के तैरते सबूत..अब नहीं चलेगा कोई झूठ!

Ram Setu: आस्था का वो सेतु जिस पर श्रीराम (Lord Ram) चले, आस्था का वो पुल जिससे होकर भगवान राम ने लंका (Sri Lanka) पर चढ़ाई की और रावण का वध किया। जिस सेतु का जिक्र रामायण (Ramayan) में है, जिसे टीवी सीरियल में देखा गया और जिसका जिक्र राम कथाओं में है। अथाह समंदर के बीच मौजूद जिस राम सेतु से जुड़ा हर रहस्य, हर सच लोग जानना चाहते हैं जिसको लेकर अब भी रिसर्च जारी है। आज इसी रामसेतु के धर्म, इतिहास और विज्ञान से जुड़ी पूरी कहानी आपको दिखा रहे हैं। राम सेतु से जुड़ी आस्था को वैज्ञानिक सबूतों की कसौटी पर परखेंगे और रामसेतु की प्रमाणिकता को दिखाने के लिए टाइम्स नाउ नवभारत की टीम ने श्रीलंका के मन्नार से अपनी पड़ताल शुरू की।

आज भी मौजूद हैं सबूत

राम सेतु तमिलनाडु के पंबन आइलैंड को श्रीलंका के मन्नार आइलैंड से जोड़ता है। इस पुल की लंबाई करीब 30 मील यानी 48 किमी है। सनातन धर्म में आस्था रखने वाले इसी पुल को 'राम सेतु' कहते हैं।त्रेता युग में प्रभु श्री राम ने अपनी पत्नी सीता को रावण के साम्राज्य लंका से वापस लाने के लिए वानर सेना की मदद से इस पुल को बनाया था।भारत और श्रीलंका के बीच राम सेतु अलग-अलग 8 टापू के रूप में राम सेतु के सबूत के रूप में आज भी मौजूद हैं। पानी पर तैरते पत्थर आज भी राम कथा की गवाही देते हैं। रामसेतु को आज कई नामों से जाना जाता है, जैसे नल-नील सेतु, सेतु बांध और एडम ब्रिज...एडम्स ब्रिज का नाम भी कुछ प्राचीन इस्लामी ग्रंथों से आया है।

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