CJP Election Boycott Call: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने शुक्रवार को विपक्षी दलों से आगामी चुनावों का बहिष्कार करने की अपील की। सीजेपी का तर्क है कि जिन चुनावों में धांधली के आरोप लगाए जा रहे हैं, उनमें लगातार हिस्सा लेना कथित तौर पर उस प्रक्रिया को वैधता देने जैसा है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (फाइल फोटो)
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने यह अपील ऐसे समय में की जब चुनाव आयोग की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है। दीपके का कहना है कि विपक्षी दल चुनाव में हिस्सा लेते हुए यह दावा नहीं कर सकते हैं कि चुनाव प्रक्रिया में धांधली हुई है। साथ ही, उन्होंने विपक्ष से धांधली वाले चुनावों में भाग लेना बंद करने की अपील की।
टाइम्स ग्रुप के टाइम्स नाउ डिजिटल के साथ बातचीत में विपक्षी दलों के नेताओं ने चुनाव बहिष्कार को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। कई नेताओं का कहना है कि चुनावों से दूर रहने का फैसला विपक्ष के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है और इससे भाजपा को राजनीतिक लाभ मिल सकता है।
NCP(SP) ने EC की भूमिका पर उठाए सवाल
एनसीपी-एसपी नेता अनीश गावंडे ने कहा कि सीजेपी की ओर से उठाई गई चिंताएं विपक्षी दलों और मतदाताओं के बीच चुनावी प्रक्रिया में बढ़ती अनियमितताओं को लेकर व्यापक असंतोष को दर्शाती हैं। टाइम्स नाउ डिजिटल के साथ बातचीत में गावंडे ने कहा, ''विपक्ष की जिम्मेदारी है कि वह इन मुद्दों को लगातार उठाता रहे और भाजपा को एकतरफा जीत हासिल करने का अवसर न दे, क्योंकि भाजपा ठीक ऐसा ही चाहती है।''
गावंडे ने आगे कहा कि विपक्ष चुनाव में कथित धांधली के बावजूद अपनी लड़ाई जारी रखेगा और मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश करता रहेगा। उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए।
'बहिष्कार से विपक्ष को हो सकता है नुकसान'
डीएमके नेता ए. सरवनन ने सीजेपी के चुनाव बहिष्कार के आह्वान को विपक्ष के लिए नुकसानदायक बताया। उन्होंने कहा कि यदि विपक्षी दल चुनाव नहीं लड़ते हैं, तो इसे इस रूप में पेश किया जा सकता है कि वे भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ने से डर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष के बहिष्कार के बावजूद चुनाव जारी रहेंगे।
सरवनन ने कहा, ''वे चुनाव कराएंगे और चुनाव जीत जाएंगे और भारत एक छोटा-मोटा तानाशाही देश बन जाएगा। हमें ऐसा नहीं होने देना चाहिए।''
'EC के खिलाफ अभियान तेज करने की जरूरत'
भाकपा के राज्यसभा सांसद पी. संदोश कुमार ने भी चुनाव बहिष्कार के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष को चुनावों का बहिष्कार करने के बजाय चुनाव आयोग के खिलाफ अपने अभियान को और तेज करना चाहिए। उन्होंने कहा, ''एसआईआर पर हमारा रुख एकदम स्पष्ट है। यह मतदाताओं के नाम व्यवस्थित और गहन तरीके से हटाने का एक तरीका है और इसी वजह से 12 करोड़ से ज्यादा मतदाता प्रभावित हुए हैं।''
उन्होंने कहा कि चुनाव में हिस्सा लेना चुनावी प्रक्रिया को वैध ठहराना नहीं है और विपक्ष पहले ही चुनाव आयोग के समक्ष अपनी आपत्तियां दर्ज करा चुका है।
भाकपा सांसद ने कहा, ''चुनावों का बहिष्कार करने का कोई फायदा नहीं है। चुनाव में शामिल होने का मतलब है कि हम इस प्रक्रिया से समझौता नहीं कर रहे हैं। हमने चुनाव आयोग की पोल पहले ही खोल दी है।''
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कुमार ने चुनाव बहिष्कार को 'अव्यावहारिक विचार' बताते हुए कहा कि विपक्ष को अधिक से अधिक भागीदारी के साथ अपना अभियान मजबूत करना चाहिए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को भी विपक्ष के अभियान का प्रमुख मुद्दा बनाए रखने की बात कही।
क्या है शिवसेना UBT की राय
इस मुद्दे पर शिवसेना (यूबीटी) नेता अधिवक्त जयेश वाणी ने कहा कि सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके की चुनाव बहिष्कार की अपील पर पार्टी का आधिकारिक रुख उद्धव ठाकरे तय करेंगे। उन्होंने कहा, ''एक व्यक्ति के तौर पर मैं इस बात से सहमत हो सकता हूं कि अगर चुनाव में इस तरह से धांधली की गई तो चुनाव प्रक्रिया का कोई उद्देश्य नहीं रह जाएगा और लोकतंत्र खतरे में पड़ जाएगा।'' हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अगर राजनीतिक दल चुनाव लड़ना बंद कर देते हैं तो उस स्थिति में लोकतंत्र का खात्मा हो जाएगा और तानाशाही स्वत: ही प्रायोगिक चरण में दाखिल हो जाएगा।
CJP ने CEC को दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम
सीजेपी की चुनाव बहिष्कार की अपील से एक दिन पहले पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। साथ ही चेतावनी दी थी कि अगर ज्ञानेश कुमार ने इस्तीफा नहीं दिया तो देशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा
सीजेपी ने मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा चुनावी मतदाता सूचियों के प्रबंधन से जुड़े मुद्दों के बाद मांगा। दरअसल, चुनाव आयुक्त एस.एस. संधू और विवेक जोशी की ओर से आपत्तियां उठाए जाने की एक रिपोर्ट इंडियन एक्सप्रेस ने प्रकाशित की थी। हालांकि, इस पर चुनाव आयोग की सफाई भी सामने आई। चुनाव आयोग का कहना है कि अलग-अलग राय और लिखित टिप्पणियां उसकी सामान्य विचार-विमर्श प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग के अनुसार, एसआईआर समेत अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
