जम्मू कश्मीर : उधमपुर जिले के एक वन्य क्षेत्र में सुरक्षाबलों ने जैश-ए-मोहम्मद के चार आतंकवादियों को घेर लिया है, जिससे से एक को सेना ने मार गिराया है। इन आतंकवादियों की पिछले एक साल से तलाश की जा रही है। सेना और पुलिस के एक संयुक्त खोज दल ने गुरुवार सुबह जिले में बसंतगढ़ के सुदूर बिहाली इलाके में एक सटीक सूचना के आधार पर तलाश अभियान शुरू किया, जिसके दौरान मुठभेड़ शुरू हुई। इलाके में अतिरिक्त बलों को भेजा गया है और खराब मौसम के बावजूद व्यापक तलाश अभियान चलाया जा रहा है। जम्मू रेंज के पुलिस महानिरीक्षक भीम सेन टूटी ने यहां एक कार्यक्रम के इतर संवाददाताओं को बताया कि आतंकवादियों का सुबह करीब साढ़े आठ बजे पता चला...माना जा रहा है कि उनकी संख्या चार है और हम इस समूह को पिछले एक साल से ढूंढ रहे थे।।कोहरा होने के बावजूद तलाश अभियान जारी है और मौसम में सुधार होने के बाद ही असल स्थिति का पता चलेगा। अधिकारियों ने बताया कि जिन आतंकवादियों को घेरा गया है, वे पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद के सदस्य हैं और सेना के पैरा कमांडो की अगुवाई में संयुक्त तलाश दल ने करूर नाला के पास उन्हें छिपे हुए पाया।
उधमपुर में आतंकवादियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ जारी (फाइल फोटो)
सैनिकों पर गोलीबारी
अधिकारियों ने बताया कि जिले के बसंतगढ़ इलाके में संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिली थी। सेना ने सुबह इलाके की घेराबंदी करते हुए तलाशी अभियान चलाया। इसी बीच सैनिकों पर गोलीबारी हुई, जिसका जवाब दिया गया और इससे मुठभेड़ शुरू हुई। मौके पर अतिरिक्त बल भेजा गया है।
उधमपुर जिले के बिहाली इलाके में मुठभेड़ अप्रैल में पहलगाम में पर्यटकों पर हुए भयानक आतंकी हमले के करीब दो महीने बाद हुई है, जिसमें 26 लोग मारे गए थे। यहीं नहीं, ये मुठभेड़ अमरनाथ यात्रा की शुरुआत से ठीक एक हफ्ते पहले हुई है। अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू होने वाली है। यात्रा अवधि के दौरान आने वाले दिनों में बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों के अमरनाथ गुफा मंदिर में आने की उम्मीद है, जो 9 अगस्त को समाप्त होगी।
अमरनाथ यात्रा के मद्देनजर केंद्र शासित प्रदेश में सुरक्षाबलों को पहले से अलर्ट पर रखा गया है। यात्रा के रूट पर जगह-जगह सैनिकों की तैनाती रहेगी। अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा के लिए जम्मू-कश्मीर में बीएसएफ, सीआरपीएफ और एसएसबी की अतिरिक्त कंपनियां लगाई गई हैं। आतंकवादियों को पिछड़े इलाकों में जाने से रोकने और हमलों को टालने के लिए सभी पहाड़ों पर सुरक्षाबल तैनात हैं।
