रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में 26 दिसंबर को होने वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की अगली बैठक में कई अहम और बड़े रक्षा खरीद प्रस्तावों पर चर्चा होने की संभावना है। इनमें भारतीय वायुसेना (IAF) के एम्ब्रेयर विमान, ड्रोन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम की खरीद भी शामिल है।
भारतीय सशस्त्र बलों को ताकत बढ़ाने की योजना (AI फोटो)
एम्ब्रेयर विमान खरीद सौदा
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, ब्राजील से छह एम्ब्रेयर विमानों की खरीद का सौदा पहले की पक्का हो चुका है और इसके लिए 'खरीद के अनुरोध' (RFP) प्रक्रिया जारी है, लेकिन कुछ कागजी बदलावों के चलते रक्षा और विकास संगठन (DAC) की मंजूरी जरूरी है।
विमान में लगाया जाएगा 'नेत्रा' सिस्टम
ब्राजील से पुराने एम्ब्रेयर विमान खरीदे जा रहे हैं जिनमें रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित किया गया 'नेत्रा' सिस्टम इंस्टॉल किया जाएगा। भारत के पास पहले से ही ऐसे तीन विमान हैं, लेकिन लंबी सीमाओं को देखते हुए वायुसेना को ऐसे छह और विमानों की जरूरत है। इन्हीं जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सौदा पक्का किया गया। भारत को पहला एम्ब्रेयर विमान तीन से चार साल में मिलने की उम्मीद है।
ड्रोन खरीद की भी योजना!
रूस-यूक्रेन सहित दुनिया के कई देशों के बीच जारी संघर्ष ने ड्रोन की जरूरतों को उजागर किया है। इसी को ध्यान में रखते हुए करीब 100 किलोमीटर की मारक क्षमता वाले लगभग 150 ड्रोन सिस्टम खरीदने की योजना तैयार की जा रही है। सबसे दिलचस्प बात तो यह है कि कई भारतीय कंपनियां ड्रोन बना रही हैं। इस ड्रोन खरीद सिस्टम की अनुमानित लागत 1800 करोड़ रुपये आंकी जा रही है।
ड्रोन के साथ ही काउंटर ड्रोन सिस्टम यानी ड्रोन रोधी प्रणालियों पर भी फोकस रहेगा। इस क्षेत्र में भारतीय निर्माताओं ने अच्छी प्रगति की है और इसके प्रस्ताव भी चर्चा के एजेंडे में शामिल हैं।
कमांड पोस्ट का बढ़ा महत्व
इस साल की शुरुआत में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में चलाए गए आतंकवाद विरोधी अभियान ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना का एयर डिफेंस विंग और अधिक कमांड पोस्ट स्थापित करने की मांग कर रहा है। इन कमांड पोस्ट के जरिए बुनियादी डेटा, वीडियो फीड और अन्य अहम सूचनाओं का महत्व सामने आता है। ये कमांड पोस्ट बटालियन और ब्रिगेड जैसे अलग-अलग स्तरों पर हो सकते हैं जिनके माध्यम से युद्ध संचालन किया जा सकता है।
टाइम्स नाउ ने एक रिपोर्ट में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा से पहले ही क्रेमलिन से एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम के लिए करीब 280 मिसाइलें खरीदने की बात कही थी। यह करीब 10,000 करोड़ रुपये का सौदा है जिसका उद्देश्य ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस्तेमाल की गई मिसाइलों की भरपाई और कुछ अतिरिक्त मिसाइल भंडारण करना है।
भारत के पास तीन एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम हैं और रूस ने अगले साल भारतीय वायुसेना को दो और एयर डिफेंस सिस्टम देने का वादा किया है। इसके अलावा, भारत पांच और S-400 सिस्टम खरीदने का इच्छुक है।
DAC में कौन-कौन हैं शामिल
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा समिति (DAC) में राज्य मंत्री संजय सेठ, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान, तीनों सेनाओं के प्रमुख, रक्षा सचिव और डीआरडीओ प्रमुख सहित शीर्ष स्तर के अधिकारी शामिल हैं। डीएसी अगर किसी भी खरीद की आवश्यकता को मंजूरी दे देती है तो उसके बाद उस पर औपचारिक बातचीत और आगे की प्रक्रिया शुरू होती है।
