स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नाम नहीं आने से परेशान पुराने मतदाताओं के लिए चुनाव आयोग ने बड़ा स्पष्टीकरण जारी किया है। आयोग ने साफ कर दिया है कि जिन मतदाताओं के नाम पहले वोटर लिस्ट में दर्ज थे, लेकिन SIR की ड्राफ्ट मतदाता सूची में नहीं हैं, वे भी अपना नाम दोबारा शामिल कराने के लिए Form-6 भर सकते हैं। सिर्फ इस आधार पर कि कोई मतदाता पहले भी वोटर लिस्ट में शामिल था और अब Form-6 जमा कर रहा है, उसके खिलाफ जनप्रतिनिधित्व कानून, 1950 की धारा 31 के तहत कार्रवाई नहीं की जाएगी।
सांकेतिक तस्वीर | PTI
चुनाव आयोग आज सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को पत्र जारी कर यह स्पष्टीकरण दिया है। आयोग ने कहा है कि उसके संज्ञान में आया है कि कई ऐसे पुराने मतदाता Form-6 जमा करने से हिचक रहे हैं, जिनके नाम SIR की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं हैं। इन मतदाताओं को डर है कि Form-6 में पहली बार मतदाता सूची में नाम शामिल कराने संबंधी घोषणा करनी होती है। ऐसे में पहले से वोटर होने के बावजूद यह फॉर्म भरना झूठी घोषणा माना जा सकता है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है। आयोग ने अब इस आशंका को दूर करते हुए स्पष्ट किया है कि ऐसी स्थिति में Form-6 जमा करना अपने आप में गलत या झूठी घोषणा नहीं है।
पहले से वोटर हैं, फिर भी क्यों भरना होगा Form-6?
चुनाव आयोग ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि Form-6 में निर्धारित घोषणा 1 अगस्त 2022 से लागू है। आयोग के मुताबिक, यदि किसी पुराने मतदाता का नाम SIR के दौरान प्रकाशित ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं आता है तो उसे अंतिम मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए नए सिरे से आवेदन करना होगा।यह प्रक्रिया उन मतदाताओं पर भी लागू होगी, जिनका नाम पहले किसी मतदाता सूची में दर्ज था। यानी पहले वोटर होना Form-6 भरने में बाधा नहीं बनेगा।
आयोग ने साफ कहा है कि SIR के दौरान या उसके बाद ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नाम नहीं होने की स्थिति में Form-6 के जरिए नाम शामिल कराने की मांग की जा सकती है। सिर्फ पहले से मतदाता होने के कारण इस आवेदन को झूठी घोषणा नहीं माना जाएगा।
धारा 31 के तहत नहीं होगी कार्रवाई, आयोग ने दूर किया डर
इस पूरे मामले में सबसे अहम बात जनप्रतिनिधित्व कानून, 1950 की धारा 31 को लेकर है। दरअसल, पुराने मतदाताओं के मन में आशंका थी कि Form-6 में पहली बार वोटर बनने संबंधी घोषणा करने के कारण उन पर गलत जानकारी देने का आरोप लग सकता है। इससे उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।चुनाव आयोग ने इस पर स्पष्ट किया है कि किसी मतदाता का नाम पहले की वोटर लिस्ट में शामिल रहा हो और वह SIR के दौरान या उसके बाद Form-6 जमा करता है तो सिर्फ इसी आधार पर उसके खिलाफ धारा 31 के तहत कार्रवाई शुरू नहीं की जाएगी।
हालांकि, आयोग ने इसके साथ एक महत्वपूर्ण शर्त भी रखी है। यह राहत तभी लागू होगी, जब संबंधित मतदाता का नाम पहले से किसी दूसरी लोकसभा या विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज न हो और Form-6 में की गई घोषणा अन्यथा कानून के अनुरूप हो।
दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले का भी दिया हवाला
चुनाव आयोग ने अपने स्पष्टीकरण में दिल्ली हाईकोर्ट के एक फैसले का भी उल्लेख किया है। यह मामला नीलोत्पल दत्ता एवं अन्य बनाम भारत निर्वाचन आयोग एवं अन्य से जुड़ा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने 14 अक्टूबर को इससे जुड़ा फैसला दिया था। इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने आशंका जताई थी कि पहले से मतदाता होने के बावजूद Form-6 जमा करने पर उन्हें पहली बार वोटर बनने की गलत घोषणा करने वाला माना जा सकता है।हाईकोर्ट ने इस आशंका को गलत बताया था। अदालत ने कहा था कि याचिकाकर्ता चाहें तो Form-6 जमा कर सकते हैं और उनके आवेदन पर कानून के मुताबिक विचार किया जाएगा। चुनाव आयोग ने अब अपने ताजा स्पष्टीकरण में इसी न्यायिक फैसले का हवाला देते हुए पुराने मतदाताओं की आशंका दूर की है।
