प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री एवं तृणमूल कांग्रेस नेता सुजीत बोस के खिलाफ दाखिल की गई चार्जशीट में कई गंभीर आरोप लगाए हैं। इसमें ईडी ने दावा किया है कि उन्होंने कथित नगरपालिका भर्ती घोटाले से प्राप्त अवैध धन अपने चीनी रेस्तरां और अन्य हॉस्पिटैलिटी बिजनेस में लगाया। सुजीत बोस को ईडी ने मई में गिरफ्तार किया था। वह अभी कोलकाता की जेल में बंद हैं।
सुजीत बोस।
ईडी की ताजा चार्जशीट में किसके किसके नाम?
ताजा चार्जशीट को लेकर ईडी ने एक बयान भी जारी किया। इसमें एजेंसी ने बताया कि उसने 9 जुलाई को कोलकाता की एक विशेष पीएमएलए (धन शोधन रोकथाम अधिनियम) अदालत में सुजीत बोस,उनके बेटे समुद्र बोस, आईएएस अधिकारी और स्थानीय निकायों के पूर्व निदेशक ज्योतिष्मान चट्टोपाध्याय और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है।
340 उम्मीदवारों के लिए सुजीत बोस ने की थी सिफारिश, फिर नौकरी भी मिल गई
बयान में ईडी ने दावा किया कि दक्षिण दमदम नगरपालिका के पूर्व उपाध्यक्ष बोस ने नगर निकाय में अलग-अलग पदों के लिए 340 उम्मीदवारों की गैर-कानूनी तौर पर सिफारिश की थी। इन 340 लोगों में से 284 को 2014-22 के दौरान नौकरी मिल भी गई। ईडी का दावा है कि ऐसे में अयोग्य उम्मीदवारों से जो पैसे मिले,उन्हें शुरू में सुजीत बोस के मालिकाना हक वाली कंपनी 'चाइनीज क्विजीन रेस्टोरेंट'में लगाया गया। रेस्तरां का कारोबार बहुत कम होने के बावजूद, इन पैसों को वैध नकद बिक्री के तौर पर दिखाया गया। यहां तक कि कोविड लॉकडाउन के दौरान भी बैंक खातों में भारी मात्रा में नकदी जमा की गई।
ईडी ने अक्टूबर 2025 में पूर्व खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री रथिन घोष के अलावा उनके यहां भी छापेमारी की थी।हालांकि, बोस ने इन भर्तियों में किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है।
ईडी ने क्या लगाए आरोप?
ईडी आरोप लगाया कि चीनी रेस्तरां से निकाली गई धनराशि का इस्तेमाल आतिथ्य क्षेत्र की अन्य इकाइयों का वित्तपोषण करने और उनका विस्तार करने में किया गया,जिसमें 'श्री वेंकटेश बैंक्वेट्स एंड स्पेशलिटी ढाबा एलएलपी’(जो बंगाल ढाबा और द बार एंड लाउंज का संचालन करती है)भी शामिल है।ईडी ने दावा किया कि यह धनराशि पूंजी निवेश और बिना जमानत वाले ऋण के रूप में इन संस्थाओं में लगाई गई।
ईडी ने कहा कि संपत्तियों की खरीद के लिए अतिरिक्त धनराशि विभिन्न फर्जी कंपनियों और व्यक्तियों से उधार लेकर जुटाई गई थी। बाद में इन कर्जों का भुगतान आतिथ्य क्षेत्र की इकाइयों की बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई गई और फर्जी नकद बिक्री के माध्यम से अपराध से अर्जित धन का हेरफेर कर किया गया। जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि सुजीत बोस को कुछ व्यक्तियों को नौकरी दिलाने के बदले कई फ्लैट भी मिले।
मामले में ईडी का दूसरा आरोपपत्र
बिधाननगर से तीन बार के विधायक बोस हाल में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार शरदवत मुखर्जी से 37,000 से अधिक मतों के अंतर से हार गए थे। बता दें कि इस मामले में ईडी द्वारा दाखिल की गई यह दूसरी चार्जशीट है। इससे पहला आरोपपत्र फरवरी 2025 में अयान सिल के खिलाफ दाखिल की गई थी।
अयान सिल एबीएस इन्फोजोन नाम की कंपनी के निदेशक थे। यह कंपनी राज्य के अलग-अलग नगर निकायों के लिए प्रश्न-पत्र और ओएमआर शीट छापने,उम्मीदवारों के अंकों का मूल्यांकन करने और मेधा सूची तैयार करने का काम करती थी।
