'वॉचडॉग है भी या नहीं', SIR पर ECI में 10 महीने में 14 आपत्तियां, ओवैसी ने उठाए सवाल

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद की रिपोर्ट सामने आने के बाद सियासत गरमा गई है। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीनों में 14 बार आपत्तियां जताई थीं। इस पर AIMIM प्रमुख ओवैसी ने चुनाव आयोग को घेरा, वहीं आयोग ने स्पष्ट किया कि सभी अंतिम फैसले आपसी सहमति और कानून के तहत ही लिए जाते हैं।

भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के भीतर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयुक्तों में मतभेद की खबरों ने देश की राजनीति में एक नया भूचाल ला दिया है। एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के दो आयुक्तों-सुखबीर संधू और विवेक जोशी ने आयोग के फैसलों पर 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कराईं। उन्होंने नाम जोड़ने-हटाने की प्रक्रिया से लेकर आयोग के कुछ कदमों को 'अनधिकृत' और 'अवैध' तक करार दिया था।

SIR Asaduddin Owaisi reaction

क्या अब कोई वॉचडॉग बचा है-ओवैसी (फाइल फोटो)

इस खबर के सामने आते ही AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सहित पूरे विपक्ष ने केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग पर तीखा हमला बोल दिया। असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया पर अपनी भड़ास निकालते हुए कहा कि एक समय था जब देश की जनता को चुनाव आयोग पर सबसे ज्यादा भरोसा था, लेकिन अब इसमें लगातार गिरावट आई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब आयोग के बहुमत सदस्यों को ही अपने नाम पर लिए गए फैसलों की खबर नहीं है, तो ऐसे निर्णयों की कानूनी मान्यता क्या रह जाती है? ओवैसी ने आरोप लगाया कि SIR जैसी प्रक्रियाओं ने गरीब जनता को कागजों में उलझाकर उनकी नागरिकता की गरिमा को ठेस पहुंचाई है।

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