Disha Salian Case: सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत के मामले में एक बार फिर बड़ा कानूनी और राजनीतिक भूचाल आ गया है। दिशा के पिता सतीश सालियान की ओर से उनके अधिवक्ता अभिषेक मिश्रा ने CBI के डिप्टी एसपी को एक नई और विस्तृत शिकायत सौंपी है। इस पत्र में आरोप लगाया गया है कि मामले से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक सबूतों और सीसीटीवी फुटेज के साथ जानबूझकर बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ की गई है।
दिशा सालियान के परिजनों ने CBI से उठाई कड़ी मांग
सतीश सालियान ने अपने वकील को मिल रही धमकियों पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि सच हमेशा जीतता है और जो गलत काम कर रहे हैं, उन्हें परिणाम भुगतने होंगे। अपने वकील को हाई कोर्ट में प्रैक्टिस न करने देने की धमकियों के विरोध और कथित मानहानि को लेकर वे कानूनी टीम के साथ उद्धव ठाकरे के आवास 'मातोश्री' नोटिस लेकर पहुंचे।
500 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग
शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे के आवास के बाहर पहुंचे एडवोकेट नीलेश ओझा ने कहा, "हमारा एक जूनियर वकील इस समय अंदर नोटिस दे रहा है। इस नोटिस में सार्वजनिक माफी और 500 करोड़ रुपये के मुआवजे के डिमांड ड्राफ्ट (DD) की मांग की गई है। संविधान के तहत हर इंसान बराबर है। उन्होंने जो धमकी दी थी कि वे हमें वकालत नहीं करने देंगे, उसी का जवाब देने हम यहां आए हैं कि 'देखिए, हम सीधे आपके दरवाजे पर नोटिस देने आए हैं।' आपको जितने गुंडे लाने हैं ले आइए, जो करना है कर लीजिए..."
वहीं आदित्य ठाकरे के घर के बाहर मीडिया से बातचीत में दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान ने कहा, "यह नोटिस मानहानि से जुड़ा है और इसमें 500 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की गई है। वह (आदित्य ठाकरे) हर दिन झूठ बोलते हैं..." शिकायतकर्ता का दावा है कि दिशा की इमारत में लगा डीवीआर (DVR) बिना किसी कानूनी पंचनामे के सचिन वाजे द्वारा कब्जे में लिया गया था।
आरोप है कि पेन ड्राइव में फुटेज कॉपी करने के बाद उस हिस्से को हटा दिया गया, जिसमें शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे और अन्य प्रभावशाली लोगों की मौजूदगी दर्ज थी। 11 दिसंबर 2025 की एक फोरेंसिक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि 4 जून से 9 जून 2020 के बीच की सीसीटीवी फुटेज गायब है। इसके साथ ही बैकअप वाली हार्ड डिस्क को भी नष्ट करने या छुपाने का आरोप लगाया गया है। तत्कालीन पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं, क्योंकि उनके बयानों और आधिकारिक तौर पर हार्ड डिस्क खोले जाने की तारीखों में विरोधाभास देखा गया है।
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सीबीआई को सौंपी गई शिकायत में एक कथित प्रत्यक्षदर्शी ‘X1’ का रिकॉर्डेड बयान भी पेन ड्राइव में संलग्न किया गया है, जिसमें दिशा के साथ गंभीर अपराध के दावे किए गए हैं। इसी आधार पर याचिकाकर्ता ने आदित्य ठाकरे, सचिन वाजे, परमबीर सिंह, समीर वानखेड़े और तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और गृहमंत्री अनिल देशमुख की भूमिका की जांच और कस्टोडियल पूछताछ की मांग की है। साथ ही, सबूतों को नष्ट करने के चलते सरकारी अधिकारियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 409 जोड़ने का भी अनुरोध किया गया है।
परमबीर सिंह की भूमिका की जांच की मांग
शिकायत में तत्कालीन मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह के एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के बयान का हवाला देते हुए सवाल उठाया गया है। शिकायत के मुताबिक, 3 अगस्त 2020 को परमबीर सिंह ने CCTV फुटेज की जांच का दावा किया था, जबकि शिकायत में कहा गया है कि बैकअप हार्ड डिस्क को आधिकारिक तौर पर 6 अगस्त 2020 को खोला और सत्यापित किया गया था। शिकायतकर्ता ने इस टाइमलाइन की जांच कर परमबीर सिंह की कथित भूमिका और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों तक उनकी पहुंच की जांच की मांग की है।
सचिन वाजे समेत कई लोगों की कस्टोडियल पूछताछ की मांग
अधिवक्ता ने CBI से आदित्य ठाकरे, सचिन वाजे, परमबीर सिंह और अन्य संबंधित लोगों की कस्टोडियल पूछताछ की मांग की है। शिकायत में बॉम्बे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के कुछ फैसलों का हवाला देते हुए गंभीर मामलों में कस्टोडियल इंटरोगेशन की जरूरत बताई गई है। शिकायत में NCB के तत्कालीन जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े को भी बुलाकर पूछताछ करने और उनके पास मौजूद मोबाइल लोकेशन, संचार रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल सबूत हासिल करने की मांग की गई है।
