Delhi Crime Report: राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की 'भारत में अपराध' रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में चोरी के मामलों की संख्या ज्यादा रही, जहां हर दिन लगभग 497 मामले दर्ज हुए। रिपोर्ट के मुताबिक देश में दर्ज चोरी के कुल मामलों में करीब तीन-चौथाई मामले दिल्ली में दर्ज हुए। रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली में 2024 में 1,80,973 चोरी के मामले सामने आए, यानी हर हफ्ते करीब 3,480 और हर दिन लगभग 497 मामले।
दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ अपराध सबसे ज्यादा, चोरों की भी राजधानी बनी! NCRB की रिपोर्ट में हैरान कर देने वाले दावे
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह देश में दर्ज मामलों का 73.3 प्रतिशत है, जो अन्य महानगरों की तुलना में काफी ज्यादा है। रिपोर्ट के मुताबिक इसके बाद मुंबई में 10,854 मामले (4.4 प्रतिशत), बेंगलुरु में 9,229 मामले (3.7 प्रतिशत) और जयपुर में 9,051 मामले (3.7 प्रतिशत) दर्ज किए गए।
हालांकि, 2024 में ’संपत्ति के खिलाफ अपराध’ के मामलों में 2023 की तुलना में 14.4 प्रतिशत की कमी आई है। 2023 में 3,28,100 मामले दर्ज हुए थे। आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत कुल 5,93,096 मामलों में चोरी के मामले सबसे अधिक रहे।
दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ अपराध सबसे अधिक
दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ अपराध देश के 19 बड़े शहरों में सबसे ज्यादा रहे और सिर्फ 2024 में 13,396 मामले दर्ज किए गए। रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ अपराध की दर जयपुर, इंदौर और लखनऊ के बाद चौथे स्थान पर रही। अपराध दर प्रति एक लाख महिलाओं पर महिलाओं के खिलाफ अपराधों की संख्या को दर्शाती है।
रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ कुल अपराधों की संख्या में 2023 से 2024 तक 0.22 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। 2023 में 13,366 मामले दर्ज हुए थे, जबकि 2022 में यह संख्या 14,158 थी। रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में बलात्कार और दहेज जैसे अपराध बड़ी चिंता का विषय बने रहे और बलात्कार के 1,058 मामले दर्ज किए गए। दहेज से होने वाली मौतों की कुल संख्या 109 पर स्थिर रही।
वर्ष 2024 में दिल्ली में तेजाब से हमले का एक मामला दर्ज किया गया, जबकि 2023 में ऐसे छह मामले दर्ज किए गए थे। महिलाओं का अपहरण भी एक बड़ी चिंता का विषय बना रहा। रिपोर्ट के अनुसार 2024 में दिल्ली में ऐसे 3,974 मामले दर्ज किए गए जो 19 महानगरों में सबसे अधिक हैं।
संज्ञेय अपराधों में दिल्ली 19 महानगरों में सबसे ऊपर
दिल्ली संज्ञेय अपराधों के मामलों की संख्या में 19 महानगरों में सबसे ऊपर है। राष्ट्रीय राजधानी में 2.70 लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए और आरोपपत्र दाखिल करने की दर सबसे कम है। आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में मुंबई की तुलना में लगभग पांच गुना और बेंगलुरु की तुलना में सात गुना से अधिक मामले दर्ज किए गए। शहर में प्रति लाख जनसंख्या पर संज्ञेय अपराधों की दर 1688 है, जो देश के सभी महानगरों में सबसे अधिक है।
आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी में 2024 में 2,75,402 संज्ञेय अपराध दर्ज किए गए। मामलों की बड़ी संख्या के बावजूद आरोपपत्र दाखिल करने की दर मात्र 31.9 प्रतिशत रही, जो रिपोर्ट में शामिल सभी महानगरों में सबसे कम है। हालांकि, आंकड़ों से पता चलता है कि दिल्ली में संज्ञेय अपराधों की संख्या पिछले दो वर्षों की तुलना में कम हुई है।
वर्ष 2022 में दर्ज संज्ञेय अपराधों की संख्या 2,98,988 थी, जबकि 2023 में यह बढ़कर 3,23,549 हो गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, गंभीर अपराधों में 14.8 प्रतिशत की गिरावट आई है। इस तरह के गंभीर अपराधों में पुलिस बिना वारंट के आरोपी को गिरफ्तार कर सकती है और मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना जांच शुरू कर सकती है।
विदेशियों से अपराध की सूची में दिल्ली शीर्ष पर
दिल्ली में 2024 में विदेशियों से अपराध के 64 मामले दर्ज किए गए, जो सभी केंद्र शासित प्रदेशों में सबसे अधिक हैं और 2023 में दर्ज किए गए 63 मामलों से मामूली तौर पर अधिक हैं। राष्ट्रीय राजधानी में 2022 में ऐसे 40 मामले दर्ज किए गए, जो पिछले तीन वर्षों में लगातार वृद्धि को दर्शाते हैं।
बुधवार को जारी एनसीआरबी के आंकड़ों से पता चला कि 2024 में केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज विदेशियों से अपराधों में से ज्यादातर मामले दिल्ली में दर्ज हुए। वर्ष 2024 में केंद्र शासित प्रदेशों में इस तरह के 67 मामले दर्ज किए गए, जिनमें अकेले दिल्ली में 64 मामले शामिल हैं।
वहीं जम्मू-कश्मीर में दो और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में एक मामला दर्ज किया गया। चंडीगढ़ में 2023 में चार मामले दर्ज किए गए थे जबकि 2024 में एक भी मामला दर्ज नहीं किया गया।
दिल्ली में प्रेम प्रसंगों और अवैध संबंधों से जुड़ी हत्याएं सबसे ज्यादा
महानगरों की तुलना में दिल्ली में सबसे ज्यादा हत्याएं अवैध संबंधों और प्रेम प्रसंगों के कारण हुई हैं। शहर में ’प्रेम प्रसंगों’ के कारण 11 हत्याएं और ’अवैध संबंधों’ के कारण 30 हत्याएं दर्ज की गईं।
एनसीआरबी की 2024 की रिपोर्ट से पता चला है कि 20 लाख से अधिक आबादी वाले 19 महानगरों में बेंगलुरु दिल्ली के बाद दूसरे स्थान पर है, जहां प्रेम प्रसंगों से जुड़ी 11 हत्याएं और अवैध संबंधों से संबंधित 19 हत्याएं दर्ज की गईं। मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में इन दोनों श्रेणियों के अंतर्गत अपेक्षाकृत कम हत्याएं दर्ज की गईं।
सबसे ज्यादा कीमत का सामान दिल्ली में चोरी हुआ
सभी केंद्र शासित प्रदेशों में 2024 में सबसे ज्यादा कीमत का सामान दिल्ली में चोरी हुआ। हालांकि राष्ट्रीय राजधानी में पिछले वर्ष की तुलना में इसकी बरामदगी दर में मामूली सुधार देखा गया है। एनसीआरबी की ’भारत में अपराध 2024’ रिपोर्ट से पता चलता है कि दिल्ली में 2024 में 671.4 करोड़ रुपये का सामान चोरी होने की सूचना मिली थी, जबकि 105 करोड़ रुपये का सामान बरामद किया गया यानी बरामदगी दर 15.6 प्रतिशत रही।
वर्ष 2023 में, राष्ट्रीय राजधानी में 688.6 करोड़ रुपये का सामान चोरी होने की सूचना मिली थी, जिसमें से 99.7 करोड़ रुपये का माल बरामद किया गया और बरामदगी दर 14.5 प्रतिशत रही थी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्र शासित प्रदेशों में, 2024 में चोरी हुए सामान के कुल मूल्य के साथ-साथ बरामदगी में भी दिल्ली की हिस्सेदारी सबसे बड़ी रही। एनसीआरबी के आंकड़ों से पता चलता है कि सभी केंद्र शासित प्रदेशों में 2024 में 750.9 करोड़ रुपये का सामान चोरी होने की सूचना मिली थी, जिसमें से 130.1 करोड़ रुपये के माल की बरामदी की गई और बरामदगी दर 17.3 प्रतिशत रही।
दिल्ली में रेलवे से संबंधित अपराध दर देश में सबसे अधिक
दिल्ली में 2024 में सरकारी रेलवे पुलिस (जीआरपी) के अंतर्गत अपराध दर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सबसे अधिक रही, जहां प्रति लाख जनसंख्या पर 24.3 मामले दर्ज किए गए। आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी में 2024 में जीआरपी ने 5,315 मामले दर्ज किए, जो 2023 के 5,176 मामलों और 2022 के 3,243 प्रकरणों से अधिक हैं।
प्रमुख राज्यों में, महाराष्ट्र में 2024 में जीआरपी ने सबसे अधिक 20,519 मामले दर्ज किए। उसके बाद मध्यप्रदेश में 12,931 और गुजरात में 8,220 मामले दर्ज किए गए। हालांकि, अपराध दर के मामले में दिल्ली शीर्ष पर रही। केरल में जीआरपी अपराध दर 19.5 रही और यह दूसरे स्थान पर रहा। इसके बाद महाराष्ट्र (16.1) और मध्यप्रदेश (14.7) का स्थान रहा।
