Delhi ITMS: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक हुई, जहां पर कई फैसलों को मंजूरी दी गई। इन फैसलों में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के लिए 'इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम' (ITMS) भी शामिल है।
दिल्ली में यातायात जाम (फाइल फोटो)
तीन चरणों में लागू होगा सिस्टम
आईटीएमएस सिस्टम के जरिए दिल्ली में ट्रैफिक का रियल-टाइम मैनेजमेंट, एआई आधारित ट्रैफिक सिग्नल और तकनीक आधारित नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा। इस परियोजना को दिल्ली पुलिस लागू करेगी। इसे तीन चरणों में 24 महीने के भीतर लागू किया जाएगा। इसके बाद पांच साल तक सिस्टम के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी होगी।
पहला चरण 12 महीने में लागू होगा। इसके लिए 5 कॉरिडोर को चयन होगा, जहां 250 स्मार्ट सिग्नल स्थापित किए जाएंगे और इसका एक कमांड सेंटर भी होगा। दूसरा चरण और तीसरा चरण क्रमश: छह-छह माह में स्थापित किए जाने की योजना है। आईटीएमएस सिस्टम को लागू करने में 1790 करोड़ रुपये लागत आएगी।
क्या है आईटीएमएस?
आईटीएमएस एक ऐसा सिस्टम है, जो ट्रैफिक की मौजूदा स्थिति के आधार पर सिग्नल की टाइमिंग को खुद-ब-खुद एडजस्ट करेगा। साथ ही, चिह्नित कॉरिडोर पर अलग-अलग ट्रैफिक सिग्नलों के बीच समन्वय भी किया जाएगा। इस सिस्टम की बदौलत ट्रैफिक सिग्नल पर अनावश्यक हो रही देरी को कम करने में मदद मिलेगी।
ITMS का क्या है मकसद
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंत्रिमंडल के फैसलों की जानकारी देते हुए आईटीएमएस के बारे में विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि आईटीएमएस का मकसद दिल्ली की ट्रैफिक व्यवस्थाओं को एकीकृत करना है, ताकि ट्रैफिक नेटवर्क एक एकीकृत, समन्वित और इंटेलिजेंट सिस्टम की तरह काम कर सके।
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उन्होंने बताया कि फिलहाल दिल्ली में 1,529 ट्रैफिक सिग्नल फिक्स टाइमिंग के आधार पर काम करते हैं। उन्होंने इसे समझाने आसान भाषा में समझाने का भी प्रयास किया। उन्होंने समझाया कि अगर किसी सिग्नल पर 30 या 35 सेकंड की रेड लाइट निर्धारित है, तो ट्रैफिक की स्थिति चाहे जैसी हो, वह पूरी अवधि तक रेड रहती है। इस दौरान एक डायरेक्शन में वाहनों की संख्या अधिक हो सकती है, जबकि दूसरे डायरेक्शन में ट्रैफिक कम हो सकता है।
जबकि आदर्श व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जो एडैप्टिव और इंटेलिजेंट हो। यानी सिस्टम रियल-टाइम ट्रैफिक की स्थिति को समझकर सिग्नल की टाइमिंग में बदलाव कर सके। जहां ट्रैफिक अधिक हो रहा है, वहां रेड लाइट की अवधि कम की जा सके और जहां सड़क अपेक्षाकृत खाली हो, वहां सिग्नल की टाइमिंग उसी के अनुसार तय की जा सके।
