'बोलने की आजादी है, लेकिन इसका मतलब...', CJP के दो नेताओं को दिल्ली HC की फटकार, BJP नेता के खिलाफ पोस्ट हटाने का आदेश

दिल्ली उच्च न्यायालय ने भाजपा प्रवक्ता और वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया की मानहानि याचिका पर सुनवाई करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के सह-संयोजकों सौरव दास और आशुतोष रांका को सोशल मीडिया से आपत्तिजनक पोस्ट हटाने का निर्देश दिया है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने हाल ही में सोशल मीडिया पर बढ़ती बयानबाजी और बिना जांच-परख के की जाने वाली पोस्ट्स को लेकर एक अहम सुनवाई की। अदालत ने कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के युवा नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को निर्देश दिया है कि वे भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया के खिलाफ की गईं आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट्स को तुरंत हटाएं।

Gaurav Bhatia Defamation Case

गौरव भाटिया मानहानि केस में दिल्ली HC का बड़ा फैसला (फाइल फोटो)

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला ने अभिव्यक्ति की आजादी और उसकी सीमाओं पर बहुत ही व्यावहारिक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं को अपनी बात और विरोध दर्ज कराने का पूरा हक है, लेकिन यह अभिव्यक्ति सच पर टिकी होनी चाहिए। जज ने नेताओं को समझाते हुए कहा कि विरोध जताने के कई गरिमापूर्ण तरीके होते हैं। बिना किसी तथ्य की पुष्टि किए किसी के खिलाफ सोशल मीडिया पर लिखना गलत मिसाल पेश करता है। अपनी बात को साफ और जिम्मेदार तरीके से रखना ही सही दिशा दिखाता है।

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