Delhi Flood Alert: दिल्ली में यमुना नदी उफान पर है। यहां बाढ़ का खतरा बढ़ता ही जा रहा है। सुबह यमुना का जलस्तर खतरे के निशान(205.33 ) मीटर से करीब दो मीटर ऊपर था। शाम छह बजे तक के अपडेट के मुताबिक, हथिनीकुंड बैराज से लगातार पानी छोड़े जाने के कारण यमुना का जलस्तर बढ़कर 207.81 मीटर तक पहुंच गया है, जिससे कई इलाके जलमग्न होने का खतरा भी बढ़ गया है।
यमुना नदी में बाढ़
खबर है कि उफान मारती यमुना का पानी मोनेस्ट्री और आईएसबीटी के बीच रिंग रोड पर आ गया है, जिससे यातायात भी प्रभावित हो रहा है। वहीं यमुना नदी के आसपास निचले इलाकों में भी बाढ़ का पानी लोगों के घरों में घुस आया है। दिल्ली सरकार ने यमुना के किनारे पर बसे लोगों को सुरक्षित इलाकों में जाने की सलाह दी है साथ ही लोगों से लगातार यमुना नदी के किनारे न जाने की अपील की जा रही है।
यमुना के उफान ने दिलाई 1978 की याद
यमुना नदी का जलस्तर उफान पर है। ऐसे में लोगों को एक बार फिर से 1978 की त्रासदी याद आ गई है। दरअसल, 6 सितंबर 1978 में अचानक से दिल्ली के पॉश इलाकों में यमुना नदी में बाढ़ आ गई थी। बाढ़ का पानी लोगों के घरों में घुसने लगा था और लोगों को अपने-अपने घरों को छोड़ दूसरी जगह शरण लेने लगी थी। तब यमुना का जलस्तर 207.49 मीटर पहुंचा था। इस बार जलस्तर इस लेवल को क्रॉस कर गया है।
18 की गई थी जान लाखों लोग हुए थे बेघर
यमुना नदी में तब आई बाढ़ के कारण राजधानी क्षेत्र की करीब 40 हजार वर्ग किलोमीटर कृषि भूमि पानी में डूब गई थी और लोगों की फसल बर्बाद हो गई थी। इतना ही नहीं, आंकड़ों के मुताबिक, तब 18 लोगों की जान गई थी और लाखों लोग बेघर हो गए थे। करीब 10 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। जानकारी के मुताबिक, इस बाढ़ के कारण उत्तरी दिल्ली के 30 गांव बाढ़ में डूब गए थे और नजफगढ़ नाले में उफान के कारण जनकपुरी और उत्तम नगर समेत कई इलाकों के 72 गांव जलमग्न हो गए थे।
