रूसी कच्चे तेल से लदा टैंकर Aqua Titan रविवार सुबह न्यू मैंगलोर पोर्ट (NMPT) पहुंच गया। खास बात यह है कि यह जहाज पहले चीन की ओर जा रहा था,लेकिन दक्षिण चीन सागर में अचानक अपना रूट बदलकर भारत की ओर मुड़ गया।
रूसी जहाज से कच्चा तेल उतारने की प्रक्रिया जारी।
कच्चे तेल की अनलोडिंग जारी
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच भारत में रूस से भी कच्चे तेल की खरीद जारी है। न्यू मैंगलोर पोर्ट (NMPT)ने रूसी कच्चे तेल को लेकर एक्सक्लूसिव जानकारी दी है। इसके मुताबिक, रूसी पोत Aqua Titan से कच्चे तेल की अनलोडिंग का काम जारी है। हालांकि इसकी रफ्तार सामान्य से कम बनी हुई है। अब तक करीब 30,000 टन क्रूड ऑयल MRPL पाइपलाइन के जरिए उतारा जा चुका है।
सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में अनलोडिंग की गति लगभग 2,500 टन प्रति घंटे है,जबकि सामान्य परिस्थितियों में यह दर 4,000 से 5,000 टन प्रति घंटे के बीच रहती है। पोर्ट और तकनीकी टीमें इस गति को बढ़ाकर सामान्य स्तर तक लाने की कोशिश कर रही हैं।
96,000 टन कच्चा तेल उतारा जाना है
जानकारी के मुताबिक, इस जहाज से कुल करीब 96,000 टन कच्चा तेल उतारा जाना है। मौजूदा धीमी रफ्तार को देखते हुए पूरा ऑपरेशन खत्म होने में लगभग 24 से 26 घंटे लग सकते हैं। हालांकि, अगर अनलोडिंग स्पीड को सामान्य स्तर तक बढ़ा लिया जाता है, तो यह काम 13 से 16 घंटे के भीतर पूरा हो सकता है।
शिप ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म Marine Traffic के मुताबिक, कैमरून फ्लैग वाला यह पोत करीब सुबह 11:30 बजे पोर्ट पर पहुंचा। रिपोर्ट्स के अनुसार, मार्च के मध्य में यह टैंकर दक्षिण-पूर्व एशिया के जलक्षेत्र में दिशा बदलकर भारत की ओर रवाना हुआ था।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पहले इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार किया था और कहा था कि जानकारी जुटाने के बाद ही अपडेट दिया जाएगा। इसके बाद 19 मार्च को शिपिंग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने संकेत दिया था कि यह टैंकर 21 मार्च तक भारत पहुंच सकता है।
अमेरिकी छूट के बाद बढ़ी रूस से तेल खरीद
इसी बीच, अमेरिका ने भारत को रूस से ऊर्जा खरीदने के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ईरान-अमेरिका तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के संकट के चलते वैश्विक तेल सप्लाई पर दबाव बना हुआ है।
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यह छूट वैश्विक ऊर्जा बाजार में दबाव कम करने के लिए दी गई है, क्योंकि ईरान की गतिविधियों से सप्लाई प्रभावित हो रही है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, इस छूट के बाद भारतीय रिफाइनरियों ने करीब 30 मिलियन बैरल रूसी तेल की खरीद की है, ताकि बढ़ते ऊर्जा संकट से निपटा जा सके।
लगातार भारत पहुंच रहे हैं तेल टैंकर
हाल के दिनों में भारत में तेल और गैस से जुड़े कई जहाज पहुंचे हैं। पिछले सप्ताह भारतीय झंडे वाला टैंकर Jag Laadki गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर यूएई से कच्चा तेल लेकर पहुंचा था। वहीं, इससे पहले Shenlong Suezmax नामक जहाज सऊदी अरब से तेल लेकर होर्मुज जलडमरूमध्य पार करते हुए मुंबई पहुंचा था। इसके अलावा, एलपीजी लेकर आने वाले दो भारतीय जहाज-Shivalik और MT Nanda Devi-भी हाल ही में सुरक्षित भारत पहुंचे हैं।
बढ़ते तनाव के बीच भारत की ऊर्जा रणनीति
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री मार्गों पर जोखिम के बीच भारत लगातार अपने ऊर्जा स्रोतों को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहा है। Aqua Titan का भारत पहुंचना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिससे देश अपनी तेल आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।कच्चे तेल का हाल
Trading Economics के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है। वर्तमान में कच्चा तेल लगभग 98 डॉलर प्रति बैरल के पास है, जबकि ब्रेंट क्रूड 112 डॉलर के पार पहुंच चुका है। बाजार में आई यह तेजी केवल बढ़ती मांग का नतीजा नहीं है, बल्कि युद्ध के हालात और सप्लाई चेन में पैदा हुई अनिश्चितता इसका बड़ा कारण है। इन हालातों ने निवेशकों के बीच चिंता बढ़ा दी है, जिससे ग्लोबल मार्केट में भारी अस्थिरता देखी जा रही है।
ईरानी तेल से सैंक्शन हटा
Wall Street Journal की एक रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब का मानना है कि यदि युद्ध की स्थिति अप्रैल के अंत तक बनी रहती है, तो कच्चे तेल की कीमतें 180 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को भी छू सकती हैं। हालांकि, इस रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने से पहले कीमतों को 150 डॉलर का मनोवैज्ञानिक स्तर पार करना होगा।
