Caste Census: कांग्रेस ने जनगणना के लिए जारी अधिसूचना में जातिगत गणना का जिक्र नहीं होने और बजट आवंटन को लेकर मंगलवार को सवाल खड़े किए और आरोप लगाया कि जाति जनगणना पर सरकार की नीयत साफ नहीं है। कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट ने कहा कि सरकार को भ्रम की स्थिति पैदा करने के बजाय कांग्रेस शासित तेलंगाना में हुए हालिया जातिगत सर्वेक्षण का मॉडल अपनाते हुए जनगणना करानी चाहिए। केंद्र सरकार ने भारत की 16वीं जनगणना 2027 में कराने के लिए सोमवार को अधिसूचना जारी की। यह जनगणना 2011 में हुई पिछली जनगणना के 16 साल बाद होगी।
सचिन पायलट
मंत्रालय ने कहा, 2027 की जनगणना में जातिगत गणना भी शामिल
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा कि 2027 की जनगणना में जातिगत गणना भी शामिल की जाएगी और कहा कि कुछ भ्रामक सूचनाएं फैलाई जा रही हैं कि गजट अधिसूचना में जाति गणना का कोई उल्लेख नहीं है। पायलट ने संवाददाताओं से कहा, कांग्रेस पार्टी और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जी ने लंबे समय से मांग रखी थी कि देश में जब भी जनगणना हो, उसमें जातिगत जनगणना कराई जाए। जातिगत जनगणना का उद्देश्य सिर्फ जाति के बारे में जानना नहीं, बल्कि यह भी पता करना है कि अलग-अलग वर्ग के लोग किन स्थितियों में रह रहे हैं, सरकार की योजनाओं का लाभ ले पा रहे हैं या नहीं? देश और संस्थाओं में कितनी भागीदारी है और लोगों की शैक्षणिक, आर्थिक और सामाजिक स्थिति क्या है?
सचिन पायलट ने पीएम मोदी के पुराने बयान का दिया हवाला
उन्होंने दावा किया कि भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अतीत में कई बार कहा कि जातिगत जनगणना की मांग उठाने वाले लोग अर्बन नक्सल हैं और मोदी सरकार ने संसद में जवाब दिया कि वह जातिगत जनगणना कराने के पक्ष में नहीं है। पायलट ने कहा कि भारी विरोध के बाद सरकार ने अचानक उनकी पार्टी की मांग को मानते हुए जातिगत जनगणना कराने का फैसला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अब एक बार फिर से जातिगत जनगणना कराने की बात से पीछे हटने को लेकर हमें सरकार की नीयत पर शक है।
सरकार की नीयत पर उठाए सवाल
पायलट ने कहा, जनगणना बहुत पहले से होती आ रही है। पहले की सरकारों ने अनुभव और समझदारी से जनगणना करवाई है, लेकिन आप भाजपा सरकार की नीयत देखिए, जहां जनगणना कराने में 8-10 हजार करोड़ रुपये खर्च होते हैं, वहां सरकार ने 570 करोड़ रुपये बजट में आवंटित किए हैं। पायलट ने कहा कि सरकार लोगों के सामने कह रही है कि वह जातिगत जनगणना कराएगी, लेकिन औपचारिक अधिसूचना से यह बात गायब है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार सिर्फ ध्यान भटकाने के लिए जातिगत जनगणना में देरी कर रही है। उन्होंने कहा कि ये वैसा ही कदम है, जैसे महिला आरक्षण के साथ किया गया।
पायलट ने कहा, हमारा कहना है कि सरकार को इसपर राजनीति बंद कर प्रभावी ढंग से काम करना चाहिए और राष्ट्रीय स्तर पर जातिगत जनगणना के लिए 'तेलंगाना मॉडल' को अपनाना चाहिए। इसके अलावा, सरकार को बजट आवंटन पर भी ध्यान देना चाहिए, क्योंकि जनगणना के लिए 570 करोड़ रुपये का बजट बहुत ही कम है।
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