Monsoon Session: संसद का मानसून सत्र खत्म होने में महज एक ही दिन बचा हुआ है और विपक्ष लगातार गृह मंत्री अमित शाह की दोनों सदनों में गैर-मौजूदगी का मुद्दा उठाती रही है। कांग्रेस ने बुधवार को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि 1952 के बाद पहली बार ऐसा हुआ है जब पूरे सत्र के दौरान न तो प्रधानमंत्री और न ही गृह मंत्री लोकसभा या राज्यसभा में मौजूद रहे।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश (फाइल फोटो)
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में किया, ''1952 के बाद पहली बार ऐसा हुआ है जब पूरे सत्र के दौरान न तो प्रधानमंत्री और न ही गृह मंत्री लोकसभा या राज्यसभा में मौजूद रहे।''
'शाह ने दो दिन की चर्चा से क्यों बनाई दूरी'
लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने सवाल किया कि गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में शिक्षा और छात्रों के विरोध-प्रदर्शन पर दो दिन की चर्चा से दूरी क्यों बनाई। गोगोई ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''अब गृह मंत्री लोकसभा में आने से पहले एक और चर्चा चाहते हैं।''
कांग्रेस नेता ने कहा, ''जैसा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि लेक्चर देने का समय बीत चुका है। गृह मंत्री को दिल्ली में युवाओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई और बिहार में एके-47 के इस्तेमाल को लेकर सदन में बयान देना चाहिए।'' उन्होंने कहा, ''गृह मंत्री अमित शाह को संसद के दोनों सदनों में उपस्थित रहना चाहिए।''
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'हर सवाल का जवाब देने को तैयार'
इससे पहले, गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि अगर विपक्षी दल छात्रों से जुड़े विषय पर चर्चा के लिए तैयार हो जाएं तो वह हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हैं ताकि देश की जनता के सामने सब 'दूध का दूध, पानी का पानी' हो जाए, क्योंकि सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है।
हालांकि, विपक्ष ने साफ किया कि उन्हें गृह मंत्री का 'भाषण' और 'लेक्चर' सुनने में कोई दिलचस्पी नहीं है, बल्कि उन्हें सिर्फ यह बताना चाहिए कि दिल्ली में छात्रों पर कथित बर्बरता का आदेश किसने दिया था। बीते 20 जुलाई को आरंभ हुए संसद के मानसून सत्र के दौरान दोनों सदनों में जारी गतिरोध के बीच अमित शाह ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखा और आरोप लगाया कि विपक्ष चर्चा होने ही नहीं देना चाहता।
