Rahul Gandhi on Gautam Adani: अमेरिका की एक संघीय अदालत द्वारा अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी के खिलाफ दर्ज आपराधिक आरोपों को स्थायी रूप से खारिज करने के फैसले के बाद भारत में राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि एक "समझौतावादी प्रधानमंत्री" को देश के हितों का सौदा करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
राहुल गांधी का पीएम मोदी पर निशाना
राहुल गांधी का पीएम मोदी पर बड़ा हमला
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर मीडिया रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए राहुल गांधी ने लिखा: "इस पूरे मामले में जितना दिखता है, उससे कहीं अधिक गहराई है। एक मजबूर/समझौतावादी प्रधानमंत्री को भारत के हितों का सौदा करने के लिए बाध्य होना पड़ा और इसकी भारी कीमत पूरे देश को चुकानी पड़ रही है।"
राहुल गांधी लंबे समय से आरोप लगाते रहे हैं कि केंद्र सरकार और उद्योगपति गौतम अडानी के बीच सांठगांठ है और इसी के तहत अमरीकी कोर्ट में चल रहे मामले को वापस लेने के लिए राजनयिक दबाव का इस्तेमाल किया गया है।
अमेरिकी अदालत का क्या था फैसला?
न्यू यॉर्क के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जज निकोलस गराफिस ने अमरीकी न्याय विभाग (US Justice Department) की याचिका को स्वीकार करते हुए गौतम अडानी, सागर अडानी और अडानी ग्रीन एनर्जी के पूर्व सीईओ विनीत जैन के खिलाफ दायर तीन मुख्य आरोपों (सिक्योरिटीज फ्रॉड, वायर फ्रॉड और षड्यंत्र) को खारिज कर दिया। जज ने इन आरोपों को विद प्रीज्यूडिश खारिज किया है, जिसका अर्थ है कि अमेरिकी सरकार भविष्य में इन्हीं आरोपों पर दोबारा मामला दर्ज नहीं कर सकती।
कोर्ट ने विदेशी भ्रष्ट आचरण अधिनियम (FCPA) के उल्लंघन से जुड़े काउंट-1 और न्याय में बाधा डालने से जुड़े काउंट-5 पर फैसला सुरक्षित रखा है, जिनमें भारत स्थित 5 अन्य गैर-हाजिर सह-आरोपियों के नाम हैं। इसके लिए न्याय विभाग को 31 अगस्त तक का समय दिया गया है। जज गराफिस ने अपने 47 पन्नों के आदेश में स्पष्ट किया कि यह फैसला केवल 'अभियोजन पक्ष के अधिकार क्षेत्र' का इस्तेमाल है, इसे अदालत द्वारा आरोपों पर कोई निर्दोषता या मेरिट पर फैसला न माना जाए।
अमेरिकी न्याय विभाग ने क्यों वापस लिए मामले?
अमरीकी न्याय विभाग ने मई 2026 में ही कोर्ट से मामला वापस लेने की गुहार लगाई थी। इसके पीछे ये कारण बताए गए:
- मामला मुख्य रूप से भारत से जुड़ा हुआ था और भारतीय जांच एजेंसियां भी इसकी जांच कर रही थीं।
- जांच में किसी अमेरिकी निवेशक को प्रत्यक्ष वित्तीय नुकसान की पुष्टि नहीं हुई थी।
- जो बिडेन प्रशासन के अंतिम हफ्तों में दाखिल किए गए इस मामले को न्याय विभाग ने राजनीतिक रूप से प्रेरित "नाम खराब करने का प्रयास" करार दिया, जिसके ट्रायल तक पहुंचने की संभावना कम थी।
गौतम अडानी और समूह का रुख
मामला खारिज होने पर खुशी जताते हुए गौतम अडानी ने कहा कि वे अमरीकी न्याय प्रणाली के इस फैसले का विनम्रता और गहरे सम्मान के साथ स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा कि सत्य की जीत हुई है और उनका समूह भारत के निर्माण और राष्ट्र सेवा के अपने संकल्प पर केंद्रित रहेगा। अडानी समूह शुरू से ही इन सभी आरोपों को मनगढ़ंत और बेबुनियाद बताता रहा है।
