IndiGo Crisis: भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (Competition Commission of India) ने परिचालन अड़चनों के कारण दिसंबर में हजारों उड़ानें रद्द किए जाने के मामले में बुधवार को देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो (IndiGo) के खिलाफ विस्तृत जांच का आदेश दिया।
देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो
CCI ने क्या कुछ कहा?
घटना के करीब दो महीने बाद जारी इस आदेश में सीसीआई ने कहा कि बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द कर इंडिगो ने अपनी निर्धारित क्षमता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बाजार से हटा लिया, जिससे कृत्रिम अभाव की स्थिति पैदा हुई और व्यस्त मांग के दौरान यात्रियों की हवाई यात्रा तक पहुंच सीमित हुई। आयोग ने कहा, "किसी प्रभुत्वशाली कंपनी की तरफ से ऐसे आचरण को प्रतिस्पर्धा अधिनियम की धारा चार (2)(बी)(आई) के तहत सेवाओं की आपूर्ति सीमित करने के रूप में देखा जा सकता है।"
प्रतिस्पर्धा अधिनियम की धारा चार बाजार में दबदबे की स्थिति के दुरुपयोग से संबंधित है। सीसीआई ने कहा कि प्रथम दृष्टया इंडिगो का यह आचरण भारत में प्रतिस्पर्धा पर प्रतिकूल प्रभाव डालता प्रतीत होता है। इसके मद्देनजर आयोग ने मामले की विस्तृत जांच के लिए अपने महानिदेशक को निर्देश दिए हैं।
IndiGo की 2,507 उड़ानें हुईं रद्द
आयोग ने अपने आदेश में यह भी कहा कि दिसंबर की शुरुआत में इंडिगो को बड़े स्तर पर परिचालन बाधाओं का सामना करना पड़ा था। इसके बाद नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने एयरलाइन के 10 फरवरी तक लागू शीतकालीन उड़ान कार्यक्रम में 10 प्रतिशत की कटौती कर दी थी। सीसीआई के मुताबिक, तीन से पांच दिसंबर के बीच इंडिगो की 2,507 उड़ानें रद्द की गईं, जबकि 1,852 उड़ानें विलंब से रवाना हुईं। इस दौरान देशभर के हवाई अड्डों पर तीन लाख से अधिक यात्री प्रभावित हुए।
कितने यात्री हुए थे प्रभावित
डीजीसीए के आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर में उड़ानें रद्द होने की वजह से 10.46 लाख से ज्यादा यात्री प्रभावित हुए, जिसमें कुल यात्रियों में से 93 फीसदी से ज्यादा इंडिगो की फ्लाइट रद्द होने से प्रभावित हुए थे। डीजीसीए के मुताबिक, इंडिगो ने 10.46 लाख से ज्यादा प्रभावित यात्रियों के मुआवजे और सुविधाओं पर 24.27 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किया है।
