नीट-यूजी पेपर लीक को लेकर हुए छात्र आंदोलनों के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने प्रदर्शनकारियों की कानूनी सहायता के लिए एक ऑनलाइन फंड शुरू करने की घोषणा की। राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और सीजेपी के प्रवक्ता सौरभ दास ने इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पार्टी जल्द ही एक वेबसाइट लॉन्च करेगी, जहां आम लोग अपनी इच्छा से आर्थिक योगदान दे सकेंगे। राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि इस फंड में ₹1 का योगदान भी स्वीकार किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि वे खुद भी अपनी तरफ से 1 करोड़ रूपए देंगे।
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका, सौरभ दास।
कपिल सिब्बल ने यह भी कहा कि कई छात्र और प्रदर्शनकारी अपने अधिकारों की मांग को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन में शामिल हुए थे, लेकिन उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की आशंका है। ऐसे लोगों को अकेले कानूनी लड़ाई नहीं लड़नी पड़े, इसके लिए यह पहल की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे कानूनी सहायता देंगे, जबकि फंड के संचालन और राशि के वितरण की जिम्मेदारी CJP की होगी।
'छात्रों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए'
वहीं कपिल सिब्बल ने कहा कि बिहार, पश्चिम बंगाल समेत जहां-जहां छात्रों को निशाना बनाए जाने की शिकायतें मिलेंगी, वहां कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। सिब्बल ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन में शामिल छात्रों की पहचान के लिए दिल्ली पुलिस फेसियल रिकग्निशन तकनीक का इस्तेमाल कर उन्हें निशाना बना सकती है। उन्होंने दावा किया कि उनके पास ऐसी जानकारी है। साथ ही उन्होंने कहा कि आंदोलन को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिशों को छात्र मिलकर सफल नहीं होने देंगे और वे प्रदर्शनकारियों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराते रहेंगे।CJP बोली- आंदोलन खत्म होने से पहले ही शुरू कर दी थी कानूनी तैयारी
इस मौके पर सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि 25 जुलाई को देशव्यापी आंदोलन वापस लेने से पहले और बाद में पार्टी लगातार कपिल सिब्बल से कानूनी सलाह ले रही थी। उनका कहना था कि आंदोलन समाप्त होने के बाद सरकार प्रदर्शनकारियों को व्यक्तिगत रूप से निशाना बना सकती है, इसलिए पहले से कानूनी तैयारी जरूरी थी।
दास ने कहा कि 20 जुलाई को पार्टी ने प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का भी संकल्प लिया था। उन्होंने इसे छात्रों पर हुई कार्रवाई के खिलाफ जवाबदेही तय करने की दिशा में पहला कदम बताया।
बिहार में कार्रवाई का आरोप
वहीं, CJP की कार्यकर्ता रत्ना सिंह ने दावा किया कि बिहार में प्रदर्शनकारियों पर सबसे ज्यादा कार्रवाई हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां पुलिस की सख्ती और कथित बल प्रयोग की घटनाएं सामने आई हैं। पार्टी ने कहा कि वह विभिन्न राज्यों के वकीलों के साथ समन्वय कर प्रभावित प्रदर्शनकारियों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की तैयारी कर रही है।
सनद रहे कि सीजेपी ने हाल ही में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अपना देशव्यापी आंदोलन वापस ले लिया था। हालांकि पार्टी का कहना है कि प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए और यदि ऐसा होता है तो उन्हें कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
