भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (CJI Surya Kant) का एक बयान चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसमें उन्होंने कुछ युवाओं को कॉकरोच कह दिया है। हालांकि अब प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने अपने बयान पर सफाई पेश की है। उन्होंने कहा कि यह कहना पूरी तरह निराधार है कि मैंने अपने देश के युवाओं की आलोचना की है।उन्होंने कहा कि मीडिया के एक वर्ग ने उनकी मौखिक टिप्पणियों को गलत तरीके से पेश किया, जिससे ऐसा प्रतीत हुआ मानो उन्होंने देश के युवाओं की आलोचना की हो।
सीजेआई सूर्यकांत।
आज सफाई में क्या कहा?
सीजेआई ने एक बयान जारी कर कहा कि मैं यह देखकर आहत हूं कि कल एक तुच्छ मामले की सुनवाई के दौरान की गई मेरी मौखिक टिप्पणियों को मीडिया के एक वर्ग ने गलत तरीके से पेश किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी विशेष रूप से उन लोगों के लिए थी,जो 'फर्जी और जाली डिग्रियों'के सहारे वकालत जैसे पेशों में प्रवेश कर रहे हैं। सीजेआई ने कहा कि इसी तरह के लोग मीडिया, सोशल मीडिया और अन्य सम्मानित पेशों में भी घुसपैठ कर चुके हैं और ऐसे लोग 'परजीवी'की तरह हैं।
शनिवार को जारी स्पष्टीकरण में उन्होंने साफ कहा कि उनकी टिप्पणी का संबंध देश के युवाओं से बिल्कुल नहीं था। उन्होंने कहा, “यह पूरी तरह निराधार है कि मैंने देश के युवाओं की आलोचना की। मुझे वर्तमान और भविष्य की भारतीय युवा शक्ति पर गर्व है। सीजेआई ने आगे कहा कि भारत का युवा वर्ग विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि भारतीय युवाओं का मेरे प्रति गहरा सम्मान है और मैं भी उन्हें विकसित भारत के स्तंभ के रूप में देखता हूं।
बीते दिन क्या बोले थे सीजेआई?
दरअसल, शुक्रवार को एक वकील की वरिष्ठ अधिवक्ता (Senior Designation) की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान सीजेआई ने “परजीवी” और “कॉकरोच” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया।
एक वकील को फटकार लगाते हुए की थी टिप्पणी
पीटीआई के अनुसार सीजेआई सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा हासिल करने के लिए ’’प्रयासरत’’ रहने पर एक वकील को फटकार लगाते हुए यह टिप्पणी की। पीठ ने कहा कि समाज में पहले से ही ऐसे ’’परजीवी’’ मौजूद हैं जो व्यवस्था पर हमला करते हैं और पूछा कि क्या याचिकाकर्ता भी उनके साथ जुड़ना चाहता है। पीठ ने याचिकाकर्ता वकील से कहा, ’’पूरी दुनिया वरिष्ठ अधिवक्ता बनने की पात्र हो सकती है, लेकिन कम से कम आप इसके पात्र नहीं हैं।’’
सीजेआई ने नाराजगी जताते हुए फटकारा
सीजेआई ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि दिल्ली उच्चन्यायालय याचिकाकर्ता को वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा प्रदान भी कर दे, तो शीर्ष अदालत उसके पेशेवर आचरण को देखते हुए उसे रद्द कर देगी। सीजेआई ने फेसबुक पर याचिकाकर्ता द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, ’’समाज में पहले से ही ऐसे परजीवी हैं जो व्यवस्था पर हमला करते हैं और आप उनके साथ जुड़ना चाहते हैं?’’ न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, ’’कुछ युवा कॉकरोच की तरह होते हैं, जिन्हें न कोई रोजगार मिलता है और न ही किसी पेशे में उनका कोई स्थान होता है। उनमें से कुछ मीडिया के क्षेत्र में जाते हैं, कुछ सोशल मीडिया कार्यकर्ता बनते हैं, कुछ सूचना का अधिकार (आरटीआई) कार्यकर्ता और अन्य कार्यकर्ता बनते हैं और फिर वे हर किसी पर हमला करना शुरू कर देते हैं।’’
