2047 तक भारतीय नौसेना पूरी तरह से 'आत्मनिर्भर' बन जाएगी, नई दिल्ली में नेवल कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में इसके लिए रोड मैप जारी किया गया है। इतना ही नहीं आत्मनिर्भरता के साथ ही अब भारतीय नौसेना अपनी आक्रामकता को भी बढ़ा रही है ताकि भारतीय महासागर क्षेत्र में चीन के बढ़ते दबदबे को करारा जवाब दिया जा सके। पहले स्वदेशी एयर क्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत के कमिश्न के बाद भारतीय नौसेना में स्वदेशीकरण का अभियान तेजी पकड़ चुका है। 2022 के नौसेना कमांडरों के सम्मेलन के दूसरे संस्करण में नौसेना प्रमुख समेत सभी कमांडर भारतीय नौसेना को और ज्यादा ताकतवर बनाने के प्लान को अंतिम रूप दे रहे हैं।
सागर में चीन को शिकस्त देने की तैयारी(सौजन्य-Indian Navy)
रोड मैप तैयार
इस सम्मेलन में भारतीय नौसेना के सभी ऑपरेशनल और एरिया कमांडर प्रमुख ऑपरेशनल, मैटेरियल, लॉजिस्टिक्स, मानव संसाधन विकास, प्रशिक्षण और प्रशासनिक समीक्षा के लिए भाग ले रहे हैं। भारतीय नौसेना की गतिविधियां और भविष्य का रोडमैप तैयार करने के साथ ही नौसेना के कमांडर्स इंडियन ओशन रीजन समेत भारत की समुद्री सीमा पर चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर, भारत की तैयारी पर भी प्लान बना रहे हैं। जिसमें भारत में निर्मित युद्धपोत, सबमरींस और हेलीकॉप्टर्स के इंडक्शन पर तो जोर दिया ही जा रहा है वहीं अंतर्राष्ट्रीय युद्ध अभ्यास में भी अपना दबदबा बनाकर चीन को संकेत देने की बात की जा रही है। इसी कड़ी में भारतीय नौसेना क्वाड देशों की नेवल एक्सरसाइज मालाबार में हिस्सा लेने वाली है।
2047 तक आत्मनिर्भर होने का लक्ष्य
इस कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में नौसेना की युद्ध क्षमता को और बढ़ाने और अन्य दो सेवाओं के साथ संचालन को अधिक प्रभावी और बेहतर बनाने के तरीकों पर भी चर्चा की जा रही है। 2047 तक 'आत्मनिर्भरता' प्राप्त करने के उद्देश्य से 'मेक इन इंडिया' के माध्यम से स्वदेशीकरण को बढ़ाने के लिए एक विस्तृत रोडमैप कमांडरों द्वारा जारी किया जाएगा।सम्मेलन के दौरान, रक्षा मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मामलों पर नौसेना कमांडरों को संबोधित करेंगे और उनके साथ बातचीत करेंगे। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, भारतीय सेना और भारतीय वायु सेना के प्रमुख भी नौसेना कमांडरों के साथ बातचीत करेंगे ताकि तीन सेवाओं के बीच तालमेल को बेहतर किया जा सके।
