नागरिकों और युवाओं के विरोध प्रदर्शनों के बीच नेताओं की बयानबाजी अक्सर सुर्खियों में आ जाती है। ताजा मामला महाराष्ट्र के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल के एक बयान से जुड़ा है। कोल्हापुर में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए पाटिल ने दावा किया कि दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर हुए हालिया प्रदर्शन के दौरान इस्तेमाल किए गए छोटे से छोटे पत्थरों से भी फिंगरप्रिंट एकत्र किए हैं।
दिल्ली प्रदर्शन पर मंत्री पाटिल का बड़ा दावा (Photo:X/@ChDadaPatil)
उनके अनुसार, इन उंगलियों के निशानों को लोगों के आधार नंबर से लिंक करके उपद्रवियों और उनके आपराधिक रिकॉर्ड की पहचान की जाएगी।
दरअसल, दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा परीक्षा पेपर लीक के विरोध में एक महीने लंबा आंदोलन चलाया गया था। 'संसद चलो' मार्च के दौरान यह प्रदर्शन हिंसक हो गया था, जिसमें पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें व पथराव हुआ था।
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संजय राउत ने कसा तंज
इसी संदर्भ में पाटिल ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने उन्नत तकनीक की मदद से एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है, जो जल्द ही सबके सामने आएगी। इसमें आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों और विदेशी तत्वों की संलिप्तता का पूरा ब्योरा है। मंत्री पाटिल के इस दावे पर राजनीतिक हलकों में बहस छिड़ गई है। शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने इस बयान पर कड़ा तंज कसा। पाटिल का मजाक उड़ाते हुए राउत ने कहा कि चूंकि वे उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री हैं, इसलिए उन्होंने यह 'अद्भुत वैज्ञानिक नवाचार' किया है।
पाटिल को नोबेल पुरस्कार मिलने की करेंगे सिफारिश
राउत ने चुटकी लेते हुए कहा कि वे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से सिफारिश करेंगे कि वे पाटिल का नाम नोबेल पुरस्कार समिति को भेजें।महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में इस बयान को लेकर काफी चर्चा है। एक तरफ जहां मंत्री पाटिल इसे पुलिस की आधुनिक जांच प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बता रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे व्यावहारिक रूप से असंभव और हास्यास्पद बयान बताकर सरकार पर निशाना साध रहा है।
