Chief of Defence Staff Theaterisation: भारतीय सशस्त्र बलों (थलसेना, नौसेना और वायुसेना) को भविष्य के युद्धों के लिए अधिक मारक, आधुनिक और एकजुट बनाने की दिशा में रक्षा मंत्रालय एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। भारत के तीसरे चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) के रूप में कार्यभार संभालने वाले जनरल एन एस राजा सुब्रमणि इस महीने के अंत तक रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के समक्ष सैन्य 'थियेटराइजेशन' (Theatre Commands) की अंतिम रणनीति पर एक बेहद महत्वपूर्ण और निर्णायक प्रेजेंटेशन देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
भारतीय सेना में महा-सुधार की तैयारी; नए CDS इसी महीने रक्षा मंत्री के सामने पेश करेंगे 'थियेटराइजेशन' का फाइनल ब्लूप्रिंट
HT की रिपोर्ट में सूत्रों के अनुसार कहा गया, यह सैन्य सुधारों की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। रक्षा मंत्री से हरी झंडी मिलने के बाद, इस थियेटर कमांड योजना को अंतिम मंजूरी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) के पास भेजा जाएगा। यह महत्वाकांक्षी योजना वर्ष 2022 से लगातार प्रक्रिया में है।
त्रिशूल जैसा ढांचा: क्या है 3 थिएटर कमांड्स का प्लान?
नए थियेटराइजेशन मॉडल के तहत भारतीय सेना के वर्तमान 17 अलग-अलग कमांड्स को पुनर्गठित कर केवल तीन मुख्य एकीकृत थियेटर कमानों में बदला जाएगा। प्रत्येक कमांड का नेतृत्व एक फोर-स्टार (4-Star) सैन्य अधिकारी के हाथ में होगा:
उत्तरी थियेटर कमांड (Northern Theatre Command): इसका मुख्य फोकस चीन से सटी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सुरक्षा और रणनीतिक अभियानों को संभालना होगा।
पश्चिमी थियेटर कमांड (Western Theatre Command): यह कमान पाकिस्तान से लगी सीमाओं और नियंत्रण रेखा (LoC) पर सुरक्षा चुनौतियों से निपटेगी।
मैरीटाइम थियेटर कमांड (Maritime Theatre Command): यह भारत की विशाल समुद्री सीमाओं की रक्षा करेगी, जिसमें सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण अंडमान और निकोबार द्वीप कमान भी शामिल होगी।
नए शीर्ष पद का सृजन: इस योजना के तहत वर्तमान सेना प्रमुखों के समकक्ष रैंक वाले फोर-स्टार कमांडरों के चार नए पद सृजित किए जाएंगे। इसमें एक पद वाइस चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (VCDS) का भी होगा।
शक्तियों का हस्तांतरण
इस ऐतिहासिक सुधार को राजनीतिक नेतृत्व (सरकार) का पूरा समर्थन हासिल है, लेकिन सैन्य और नागरिक नौकरशाही के भीतर कुछ प्रशासनिक और व्यावहारिक चिंताओं को लेकर मंथन जारी है:
सर्विस चीफ की शक्तियों में बदलाव: नए ढांचे के लागू होने के बाद तीनों सेना प्रमुखों (आर्मी, नेवी, एयरफोर्स चीफ) की परिचालन (Operational) भूमिका समाप्त हो जाएगी। युद्ध या आपातकाल के समय थियेटर कमांडर सीधे रक्षा मंत्री से निर्देश लेंगे। सर्विस चीफ की भूमिका केवल सैनिकों की ट्रेनिंग, रसद और रखरखाव (Sustenance) तक सीमित रह जाएगी।
रैंक और पदानुक्रम (Hierarchy) का पेंच: नौकरशाही में इस बात को लेकर हिचक है कि एक साथ इतने फोर-स्टार अधिकारी (जो कैबिनेट सचिव के समकक्ष रैंक के होते हैं) बनाने से ढांचा 'टॉप-हैवी' हो सकता है। हालांकि, जानकारों का तर्क है कि सेना पदानुक्रम पर चलती है; अगर थियेटर कमांडर थ्री-स्टार (लेफ्टिनेंट जनरल रैंक) के रहे, तो सर्विस चीफ उन पर हावी रहेंगे और पूरा सुधार बेअसर हो जाएगा।
वायुसेना (IAF) की चिंताएं और पूर्ववर्ती CDS का दृष्टिकोण
हालांकि तत्कालीन सेना प्रमुखों ने पूर्व सीडीएस जनरल अनिल चौहान को इस योजना पर लिखित सहमति (Sign-off) दे दी थी, लेकिन भारतीय वायुसेना अभी भी कुछ बिंदुओं पर असमंजस में है।
वायुसेना का पक्ष: वायुसेना को डर है कि उसके पास मौजूद सीमित हवाई संपत्तियों (Fighter Jets & Assets) को यदि अलग-अलग थियेटर कमांड्स में विभाजित कर दिया गया, तो किसी बड़े हवाई संकट के समय संसाधनों की कमी हो सकती है। थलसेना और नौसेना इस सुधार के पूरी तरह पक्ष में हैं।
तीनों CDS की कार्यशैली का अंतर
जनरल बिपिन रावत (पहले CDS): इन्होंने तीनों सेनाओं को एक साथ लाने के लिए 'टॉप-डाउन' (ऊपर से नीचे आदेश देने वाला) कड़ा रुख अपनाया था।
जनरल अनिल चौहान (दूसरे CDS): इन्होंने 'बॉटम-अप' (नीचे से ऊपर) दृष्टिकोण अपनाया, जिसमें जॉइंट ऑपरेशंस, इंटेलिजेंस और कम्युनिकेशंस के जरिए जमीनी स्तर पर तालमेल बढ़ाया। (उन्होंने 31 मई को पद छोड़ने से पहले अपना अंतिम ड्राफ्ट प्रस्ताव सौंप दिया था)।
जनरल एन एस राजा सुब्रमणि (वर्तमान CDS): अब इस पूरे तालमेल को अंतिम रूप देकर धरातल पर उतारने और सभी स्टेकहोल्डर्स को एक मंच पर लाने की पूरी जिम्मेदारी जनरल सुब्रमणि के कंधों पर है।
