Justice Varma Cash Row: कैश कांड में फंसे इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने महाभियोग से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। जस्टिस वर्मा ने तीन न्यायाधीशों की आंतरिक जांच समिति की रिपोर्ट और पूर्व मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना द्वारा उनके खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही शुरू करने की सिफारिश को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।
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जांच रिपोर्ट पर जस्टिस वर्मा ने उठाए सवाल
न्यायमूर्ति वर्मा ने कहा है कि आंतरिक जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट देने से पहले उन्हें जवाब देने का उचित अवसर नहीं दिया। अपनी याचिका में, न्यायमूर्ति वर्मा ने कहा कि जांच ने ‘साक्ष्य प्रस्तुत करने की उस जिम्मेदारी को उलट दिया’, जिससे उन्हें अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच करनी है और उन्हें गलत साबित करना है। न्यायमूर्ति वर्मा ने आरोप लगाया कि समिति के निष्कर्ष एक पूर्वकल्पित कहानी पर आधारित थे। याचिका में तर्क दिया गया है कि जांच समिति ने उन्हें पूर्ण और निष्पक्ष सुनवाई का अवसर दिए बिना ही प्रतिकूल निष्कर्ष निकाले। यह याचिका संसद के मानसून सत्र से पहले आई है, जो 21 जुलाई से शुरू हो रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार मॉनसून सत्र में जस्टिस वर्मा के खिलाफ सरकार महाभियोग प्रस्ताव ला सकती है।
समिति की रिपोर्ट में क्या
घटना की जांच कर रही समिति की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि न्यायमूर्ति वर्मा और उनके परिवार के सदस्यों का उस स्टोर रूम पर गुप्त या सक्रिय नियंत्रण था जहां बड़ी मात्रा में अधजली नकदी मिली थी और इससे उनके कदाचार का प्रमाण मिलता है जो इतना गंभीर है कि उन्हें हटाया जाना चाहिए। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश शील नागू की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की समिति ने 10 दिन तक जांच की, 55 गवाहों से पूछताछ की और 14 मार्च को रात लगभग 11.35 बजे न्यायमूर्ति वर्मा के आधिकारिक आवास पर अचानक आग लगने के स्थान का दौरा किया। इस रिपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए, भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश खन्ना ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग चलाने की सिफारिश की।
घर में मिला था कैश
14 मार्च को जस्टिस वर्मा जब दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे, तब उनके दिल्ली स्थित आवास में आग लगने पर दमकल के कर्मचारियों को भारी मात्रा में अधजले नोट मिले थे। तब जस्टिस वर्मा अपने घर पर मौजूद नहीं थे। इस घटना की जांच रिपोर्ट में जस्टिस वर्मा को दोषी ठहराया गया है।
