'मियां-तियां', 'पाकिस्तानी' कहना अपराध नहीं; सुप्रीम कोर्ट ने कहा- धार्मिक भावनाएं नहीं होती आहत

Pakistani Remark: सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दुर्भावना से कहे जाने के बावजूद किसी के लिये 'मियां-तियां' और 'पाकिस्तानी' जैसे शब्दों का इस्तेमाल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का अपराध नहीं है। न्यायालय के 11 फरवरी के आदेश में कहा गया कि अपीलकर्ता पर सूचनादाता को 'मियां-तियां' और 'पाकिस्तानी' कहकर उसकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप है।

Pakistani Remark: सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दुर्भावना से कहे जाने के बावजूद किसी के लिये 'मियां-तियां' और 'पाकिस्तानी' जैसे शब्दों का इस्तेमाल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का अपराध नहीं है। न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने झारखंड के चास स्थित अनुमंडल कार्यालय में सूचना के अधिकार (RTI) के तहत एक उर्दू अनुवादक एवं कार्यवाहक लिपिक द्वारा दायर आपराधिक मामले में एक व्यक्ति को आरोपमुक्त कर दिया।

Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट

क्या है पूरा मामला?

न्यायालय के 11 फरवरी के आदेश में कहा गया, ''अपीलकर्ता पर सूचनादाता को 'मियां-तियां' और 'पाकिस्तानी' कहकर उसकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप है। निस्संदेह, ये बातें दुर्भावना से कही गई हैं। हालांकि, यह सूचनादाता की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के समान नहीं है। इसलिए, हमारा मानना है कि अपीलकर्ता को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 298 के तहत भी बरी किया जाना चाहिए।''

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