पश्चिम एशिया में संकट के बीच क्या है भारत में हो रहे BRICS समिट के मायने, कैसे खत्म कर सकता है ईरान युद्ध?

दिल्ली में ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक शुरू हो गई है। जानें कैसे ईरान युद्ध के बीच भारत कूटनीतिक संतुलन साध रहा है और क्या ब्रिक्स देश मिलकर पश्चिमी एशिया में शांति बहाल कर सकते हैं।

एक तरफ चीन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का राजकीय दौरा चल रहा है, तो दूसरी तरफ भारत की राजधानी नई दिल्ली वैश्विक कूटनीति का सबसे बड़ा केंद्र बनी हुई है। गुरुवार से दिल्ली में दो दिवसीय ब्रिक्स (BRICS) विदेश मंत्रियों की बैठक शुरू हो गई है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब खाड़ी क्षेत्र में 'ईरान युद्ध' के बादल गहरे मंडरा रहे हैं। दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या उभरती अर्थव्यवस्थाओं का यह समूह युद्ध की आग को ठंडा करने में कोई बड़ी भूमिका निभा पाएगा?

BRICS Foreign Ministers Meeting Delhi Iran War mediation India

दिल्ली में जुटे दुनिया के दिग्गज

डिप्लोमैटिक 'टाइटरोप' पर भारत

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के लिए यह बैठक किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। उद्घाटन भाषण में जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में "सुरक्षित और निर्बाध समुद्री प्रवाह" का आह्वान किया। यह बयान सीधे तौर पर 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) की ओर इशारा था, जहां से दुनिया का पांचवां हिस्सा तेल और गैस गुजरता है और जो वर्तमान में संघर्ष के कारण ब्लॉक है। भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती संतुलन साधना है। उसे एक तरफ पुराने मित्र ईरान को साथ लेकर चलना है, तो दूसरी तरफ इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे रणनीतिक साझेदारों के हितों का भी ध्यान रखना है।

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