On SIR Opposition Letter to CJI: देश में मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन यानी 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) की प्रक्रिया को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ गया है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद सुधांशु त्रिवेदी (Sudhanshu Trivedi) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विपक्ष पर तीखा हमला बोला।
वोटर लिस्ट सुधार प्रक्रिया पर सियासत तेज
उन्होंने चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को लिखे गए विपक्षी दलों के पत्र को लोकतंत्र को कमजोर करने की एक नाकाम कोशिश करार दिया है।
बीजेपी ने विपक्ष की नीयत पर उठाए सवाल
सुधांशु त्रिवेदी ने विपक्षी पार्टियों पर तंज कसते हुए कहा कि जो दल अपने संगठनों को व्यक्तिगत और जातिगत जागीर की तरह चलाते हैं, वे लगातार मिल रही चुनावी हार और जनता के इनकार से बौखला गए हैं। उन्होंने साफ किया कि 'SIR' प्रक्रिया पूरी तरह से कानूनी और संवैधानिक है, जिसे देश की विभिन्न अदालतों ने भी सही ठहराया है।
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त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि विपक्ष का फर्जी और संदिग्ध मतदाताओं के दम पर राज्यों की सत्ता हथियाने का सपना अब चकनाचूर हो रहा है, इसीलिए वे न्यायपालिका का दरवाजा खटखटा रहे हैं।
कांग्रेस के दो दिग्गज नेताओं का किया जिक्र
बीजेपी प्रवक्ता ने कांग्रेस के भीतर के अंतर्विरोधों को उजागर करते हुए दो बड़े नेताओं का जिक्र किया। उन्होंने पूछा कि क्या यह सच नहीं है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने खुद माना था कि केरल में 'SIR' प्रक्रिया से कांग्रेस को फायदा हुआ क्योंकि कम्युनिस्ट पार्टियों द्वारा बनाए गए फर्जी वोटर हटा दिए गए? वहीं कर्नाटक में उनके नेता डीके शिवकुमार अपने कार्यकर्ताओं को इस प्रक्रिया में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने को कहते हैं। ऐसे में दिल्ली में बैठकर इसका विरोध करना कांग्रेस के पाखंड को दिखाता है।
क्या कहना है विपक्ष का?
दरअसल, यह पूरा विवाद तब सामने आया जब कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश और तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी दी। विपक्षी 'INDIA' गठबंधन (INDIA Bloc) की बैठक में लिए गए फैसले के बाद AAP और DMK समेत कुल 23 राजनीतिक दलों और एक निर्दलीय सांसद ने हस्ताक्षर करके मुख्य न्यायाधीश को एक संयुक्त पत्र भेजा है, जिसमें चुनाव आयोग की इस कार्यप्रणाली और अन्य चुनावी मुद्दों पर चिंता व्यक्त की गई है।
