Bilkis Bano case: बिलकिस बानो केस में बलात्कारियों की रिहाई पर सुप्रीम कोर्ट(Supreme court of India) ने कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि आज बिलकिस बानो तो आने वाले समय में कोई और होगा। इन सबके बीच गुजरात सरकार(Gujarat Government) ने संकेत दिए हैं कि वो 11 दोषियों की रिहाई से संबंधित दस्तावेजों को अदालत के सामने नहीं रखना चाहती है। बताया जा रहा है कि केंद्र और गुजरात सरकार दोनों अदालत के फैसले को चुनौती देंगे। सरकार ने विशेषाधिकार का हवाला दिया है।
बिलकिस बानो केस सुप्रीम कोर्ट में
2022 में बिलकिस ने की थी अपील
दोषियों(convicts in bilkis bano case) की रिहाई के खिलाफ बिलकिस बानो ने नवंबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। उनकी दलील है कि दोषियों की रिहाई कानून के खिलाफ है। इसने समाज की आत्मा को झकझोर कर रख दिया। 2002 गुजरात दंगे(2022 gujarat riots) में बिलकिस बानो के परिवार के सात लोगों की हत्या हुई थी जिसमें उनकी तीन साल की मासूम बेटी भी शामिल थी।
मामले की गंभीरता समझे राज्य सरकार
जस्टिस के एम जोसेफ (Justice K M Josheph)और बी वी नागरत्ना (Justice B V Nagratna)की बेंच ने 11 दोषियों की रिहाई पर सवाल उठाए और कहा कि मामले की गंभीरता को राज्य सरकार को समझना चाहिए था। एक गर्भवती औरत के साथ बलात्कार के साथ कुछ लोगों को मार दिया जाता है। आप पीड़ित के मामले को सिर्फ आईपीसी की धारा 302 के साथ जोड़कर नहीं देख सकते। जैसे आप संतरा और सेब की तुलना नहीं कर सकते ठीक वैसे ही आप नरसंहार और एकलौते मर्डर में तुलना नहीं कर सकते। सामान्य तौर पर अपराध समाज और समुदाय के खिलाफ होते हैं। जो असमान हो उसकी तुलना बराबरी से नहीं कर सकते।
