Bihar By Election:बिहार में राजद के साथ मिलकर सरकार बनाने के बाद नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव की जोड़ी का पहला टेस्ट 3 नवंबर को है। राज्य के मोकामा और गोपालगंज विधानसभा क्षेत्र में उप चुनाव है। और भाजपा से गठबंधन तोड़ने के बाद नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार जनता की बीच वोट मांगेगी। ऐसे में अगर इन 2 सीटों पर गठबंधन की जीत होती है, तो न केवल उसे यह कहने का मौका मिल जाएगा, कि उसे जनता का आशीर्वाद मिल गया है। बल्कि राजद में भी जारी कलह पर लगाम लग सकेगी। वहीं अगर गठबंधन के बावजूद भाजपा को जीत मिलती है तो फिर न केवल नीतीश कुमार के नेतृत्व पर सवाल उठेंगे, बल्कि भाजपा को भी बड़ा बूस्ट मिल जाएगा। हालांकि उप चुनाव में प्रचार से नीतीश की दूरी ने भाजपा को गठबंधन पर सवाल उठाने का मौका भी दे दिया है। दूसरी बाहुबलियों की पत्नियों और मामा-भांजा की टक्कर ने चुनाव को रोचक बना दिया है।
फाइल फोटो: उप चुनाव, बिहार में 2024 की दिशा तय करेंगे
नीतीश कुमार चुनाव प्रचार से दूर
असल में उप चुनाव में प्रचार से नीतीश कुमार ने दूरी बना रखी है। दूरी की वजह जहां नीतीश कुमार को चोट लगना बताया जा रहा है। वहीं भाजपा इसे गठबंधन में दरार बता रही है। भाजपा नेता और पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी का दावा है कि नीतीश कुमार, उम्मीदवारों का चयन मनमुताबिक नहीं होने के कारण प्रचार में नहीं गए। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार की चोट एक बहाना है। वहीं मोकामा में चुनावी सभा के दौरान तेजस्वी यादव ने कहा कि नीतीश जी को चोट लगी है इसलिए वह नहीं आ पाए।
श्री मोदी ने कहा कि जिस बाहुबली अनंत सिंह के घर से एके-47 रायफल मिलने के कारण उन्हें सजा हुई और उनकी विधानसभा की सद… t.co/gnefmkV8Ve
— ANI (@ANI) Nov 1, 2022
बाहुबलियों की पत्नी के बीच लड़ाई
वैसे तो बिहार में 2 सीटों पर उप चुनाव है। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा मोकामा सीट की है। जहां पर सीधे बाहुबलियों की पत्नियों के बीच टक्कर है। मोकामा में बाहुबली अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी राजद की उम्मीदवार हैं । और उनके खिलाफ मैदान में बाहुबली नेता ललन सिंह की पत्नी सोनम देवी उम्मीदवार हैं। ललन सिंह पहले जद (यू ) में थे, अब वह भाजपा में शामिल हो गए है। मोकामा सीट एक-47 केस में अनंत सिंह की विधायकी जाने के बाद खाली हुई है। वैसे इस सीट पर अनंत सिंह का ही दबदबा रहा है। साल 2005 से अनंत सिंह ही चुनाव जीतते आए हैं। चाहे उन्होंने निर्दलीय ही चुनाव क्यों नहीं लड़ा हो। मोकामा विधानसभा भूमिहार जाति के दबदबे वाली सीट है और दोनों उम्मीदवार इसी जाति से हैं।
"आदरणीय @NitishKumar जी ने साफ़ बोल दिया, उनका एक प्रयास है कि जैसे भाजपा को बिहार में पटखनी दी, वैसे ही देश में पट… t.co/13p5gscF55
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मोकामा की तरह गोपालगंज सीट पर भाजपा उम्मीदवार कुसुम देवी के सामने राजद उम्मीदवार मोहन लाल गुप्ता चुनाव मैदान में हैं। हालांकि इस सीट पर लालू यादव के साले साधु यादव ने अपनी पत्नी इंदिरा यादव को मैदान में उतार दिया है। इसके लिए 2020 के विधान सभा में खेल करने वाली AIMIM के उम्मीदवार के मैदान में आने लड़ाई रोचक हो गई है। AIMIM ने अब्दुल सलाम को उम्मीदवार बनाया है। इसकी वजह से मुस्लिम वोट बंटने का डर राजद को सता रहा है। 2020 में भाजपा के सुभाष सिंह ने चुनाव जीता था। लेकिन उनकी मृत्यु से यह सीट खाली हुई है। भाजपा ने उनकी जगह उनकी पत्नी कुसुम देवी को मैदान में उतारा है।
2024 की तय होगी दिशा
अगस्त में नीतीश के साथ गठबंधन करने के बाद जिस तरह दो महीने के अंदर के राजद के दो मंत्रियों के इस्तीफे हुए हैं। उसे देखते हुए इन चुनावों के नतीजों का असर गठबंधन पर दिख सकता है। क्योंकि अगर गठबंधन को हार मिलती है, तो भाजपा को बड़ा बूस्ट मिलेगा और जद(यू) में बड़ी सेंध भी लग सकती है। लेकिन अगर गठबंधन चुनाव जीतता है, तो तेजस्वी के लिए पार्टी में बड़ रही कलह को संभालना आसान हो जाएगा। अगस्त में सरकार बनाने के बाद राष्ट्रीय जनता दल के से पहले कानून मंत्री बनाए गए कार्तिकेय सिंह को इस्तीफा देना पड़ा था। और उसके बाद खुद को चोरों का सरकार कहकर सुर्खियों में आए सुधाकर सिंह को मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
