गृह मंत्रालय (MHA) ने नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA) के तहत आवेदन करने के लिए भारत में प्रवेश की कट-ऑफ तिथि 31 दिसंबर, 2024 तक बढ़ा दी है। इससे पहले, सीएए ने 31 दिसंबर, 2014 को या उससे पहले भारत में प्रवेश करने वाले गैर-मुस्लिम धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए नागरिकता का मार्ग प्रदान किया था।
केंद्र ने CAA के तहत प्रवेश की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2024 तक बढ़ाई (फाइल फोटो: Twitter )
कट-ऑफ को अब 10 साल के लिए बढ़ा दिया गया है। नागरिकता (संशोधन) अधिनियम दिसंबर 2019 में संसद द्वारा पारित किया गया था।गृह मंत्रालय ने पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से धार्मिक उत्पीड़न के कारण 31 दिसंबर 2024 तक भारत आने वाले अल्पसंख्यकों को पासपोर्ट और वीजा की अनिवार्यता से छूट प्रदान कर दी है।
आदेश में कहा गया है कि ऐसे लोग जो धार्मिक उत्पीड़न या उसके भय से भारत आए और 31 दिसंबर 2024 तक देश में दाखिल हुए, उन्हें पासपोर्ट और वीजा रखने के नियम से छूट दी जाएगी। इसके उन लोगों को राहत मिलेगी जो मान्य पासपोर्ट और वीजा के बिना भारत में आए या जिनके डॉक्यूमेंट्स की वैधता खत्म हो चुकी है।
असम में अब तक केवल 3 विदेशियों को CAA के तहत मिली भारतीय नागरिकता
असम में संशोधित नागरिकता अधिनियम (CAA) के तहत अब तक केवल तीन विदेशियों को भारतीय नागरिकता मिली है, जबकि कुल 12 आवेदन प्राप्त हुए हैं। मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने बुधवार को यह जानकारी दी।शर्मा ने यहां एक सरकारी कार्यक्रम से इतर पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि राज्य में लाखों विदेशियों को नागरिकता मिलने की आशंका के बीच जब केवल 12 आवेदन आए हैं, तो सीएए पर चर्चा करना व्यर्थ है।मुख्यमंत्री ने कहा, 'असम में सीएए के तहत अब तक केवल तीन लोगों को नागरिकता मिली है।'
हालांकि, उन्होंने इन तीनों नागरिकों की मूल राष्ट्रीयता के बारे में कोई जानकारी साझा नहीं की। उन्होंने बताया, 'हमें अब तक केवल 12 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से नौ आवेदन अभी विचाराधीन हैं।' संशोधित नागरिकता अधिनियम (सीएए) 2019 का विरोध किए जाने के संदर्भ में उन्होंने कहा, 'कहा गया था कि 20 से 25 लाख लोग असम में नागरिकता प्राप्त कर लेंगे। अब आप ही तय करें कि जब केवल 12 आवेदन आए हैं, तो क्या सीएए पर चर्चा करना प्रासंगिक है?' उल्लेखनीय है कि अगस्त 2024 में असम के 50 वर्षीय दुलोन दास सीएए के तहत नागरिकता प्राप्त करने वाले पहले व्यक्ति बने थे।
