अवैध धर्मांतरण के खिलाफ संत समाज का राष्ट्रव्यापी अभियान

दिल्ली में निर्मोही आणि अखाड़ा, अखाड़ा परिषद और अखिल भारतीय संत समिति ने अवैध धर्मांतरण के खिलाफ राष्ट्रव्यापी अभियान की घोषणा की।

संत समाज ने कहा कि धर्म स्वतंत्रता अधिनियम राज्यों का विषय है और सर्वोच्च न्यायालय सभी राज्यों के कानूनों की एक साथ सुनवाई न करे। उन्होंने न्यायपालिका से निष्पक्षता और सख्त कानून लागू करने की अपील की। निर्मोही आणि अखाड़ा, अखाड़ा परिषद और अखिल भारतीय संत समिति ने दिल्ली में “धार्मिक स्वतंत्रता एवं धर्मांतरण” विषय पर संयुक्त प्रेस वार्ता की। संत समाज ने धर्म स्वतंत्रता अधिनियम के समर्थन में एक स्वर में आवाज उठाई और अवैध धर्मांतरण के खिलाफ राष्ट्रव्यापी अभियान की घोषणा की।

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अवैध धर्मांतरण के खिलाफ संत समाज का राष्ट्रव्यापी अभियान

संविधान की मर्यादाओं में रहकर ही मिले धर्म पालन की आज़ादी

महंत राजेंद्र दास जी महाराज और स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती जी ने कहा कि भारत की विविधता की जड़ें धार्मिक स्वतंत्रता में हैं, लेकिन छल, बल और प्रलोभन के ज़रिए धर्मांतरण उस पर हमला है। अनुच्छेद 25 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता लोक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के अधीन है — इसे धर्मांतरण का औज़ार नहीं बनाया जा सकता।

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