पश्चिम बंगाल में भाजपा नेता और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी चंद्रनाथ रथ की हत्या मामले में जांच एजेंसियों को बड़ा सुराग मिला है। जांचकर्ताओं ने हावड़ा के बाली टोल प्लाजा पर किए गए एक UPI ट्रांजैक्शन के जरिए संदिग्धों तक पहुंचने का दावा किया है।
चंद्रनाथ रथ मर्डर मामले में क्या-क्या खुलासे?
हत्या से पहले बाली टोल प्लाजा से गुजरी थी कार
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, हत्या में इस्तेमाल की गई सिल्वर कार वारदात से कुछ समय पहले बाली टोल प्लाजा से गुजरी थी। वहां टोल का भुगतान UPI के जरिए किया गया था। इसी डिजिटल ट्रांजैक्शन से जांच एजेंसियों को एक मोबाइल नंबर मिला है, जिसे एक संदिग्ध से जोड़ा जा रहा है। टोल प्लाजा के CCTV फुटेज में कार और उसमें सवार लोगों की तस्वीरें भी कैद हुई हैं।
छह मई की रात को कर दी गई थी हत्या
चंद्रनाथ रथ की छह मई की रात को कोलकाता एयरपोर्ट से करीब सात किलोमीटर दूर मध्यमग्राम के दोहरिया लेन इलाके में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस के अनुसार, रथ की SUV को एक सिल्वर कार ने रोका, जिसके बाद बाइक सवार हथियारबंद हमलावरों ने बेहद करीब से फायरिंग की। वारदात के बाद आरोपी सिल्वर कार छोड़कर लाल कार और मोटरसाइकिल से फरार हो गए।
एसआईटी कर रही जांच
जांच में सामने आया है कि इस्तेमाल किए गए सभी वाहनों की नंबर प्लेट फर्जी थीं और इंजन तथा चेसिस नंबरों से भी छेड़छाड़ की गई थी। मामले की जांच के लिए सीआईडी और एसटीएफ ने संयुक्त रूप से विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है।
ऑस्ट्रिया निर्मित Glock 47X पिस्टल का किया इस्तेमाल
इस केस में इस्तेमाल हथियार को ऑस्ट्रिया निर्मित Glock 47X पिस्टल बताया जा रहा है। जांच एजेंसियों का कहना है कि यह अत्याधुनिक हथियार भारत में आसानी से उपलब्ध नहीं होता, इसलिए अंतरराष्ट्रीय या सीमा पार कनेक्शन की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों को आशंका है कि हमलावरों के तार बांग्लादेश या संगठित आपराधिक गिरोहों से जुड़े हो सकते हैं।
अधिकारियों का मानना है कि हत्या बेहद पेशेवर तरीके से अंजाम दी गई। वारदात के लिए ऐसा स्थान चुना गया जहां CCTV कवरेज नहीं था। पुलिस को शक है कि हमलावर उत्तर प्रदेश या बांग्लादेश सीमा से जुड़े पेशेवर शूटर हो सकते हैं।
कहीं कोयला और पशु तस्करी नेटवर्क के चलते तो नहीं हुई हत्या?
सूत्रों के मुताबिक, चंद्रनाथ रथ के पास कथित कोयला और पशु तस्करी नेटवर्क से जुड़े कुछ संवेदनशील दस्तावेज भी थे। जांच एजेंसियां इस पहलू की भी पड़ताल कर रही हैं कि हत्या का मकसद उन दस्तावेजों तक पहुंच बनाना या सबूत मिटाना तो नहीं था। फिलहाल मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन जांच कई स्तरों पर जारी है।
