दिल्ली हाईकोर्ट: AI नहीं ले सकता इंसानी दिमाग का स्थान, Chatgpt निर्णय का आधार नहीं

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Aug 27, 2023, 08:53 PM IST

Delhi High Court: दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से उत्पन्न डेटा की सटीकता और विश्वसनीयता अभी भी अस्पष्ट है और ऐसे उपकरण का उपयोग ज्यादा से ज्यादा, प्रारंभिक समझ या प्रारंभिक शोध के लिए किया जा सकता है। यह इंसानी दिमाग का स्थान नहीं ले सकता है।

Delhi High Court: दिल्ली उच्च न्यायालय ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने साफ किया है कि न्यायिक प्रक्रिया में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) न तो मानवीय बुद्धि का और न ही मानवीय तत्व का स्थान ले सकती है। अदालत ने कहा कि चैटजीपीटी किसी अदालत में कानूनी या तथ्यात्मक मुद्दों के निर्णय का आधार नहीं हो सकता।

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दिल्ली उच्च न्यायालय

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से उत्पन्न डेटा की सटीकता और विश्वसनीयता अभी भी अस्पष्ट है और ऐसे उपकरण का उपयोग ज्यादा से ज्यादा, प्रारंभिक समझ या प्रारंभिक शोध के लिए किया जा सकता है। अदालत ने यह टिप्पणी लक्ज़री ब्रांड क्रिश्चियन लोबोतिन द्वारा एक साझेदारी फर्म के खिलाफ दायर मुकदमे की सुनवाई के दौरान की, जो उसके ट्रेडमार्क का कथित तौर पर उल्लंघन करके जूतों के निर्माण और बिक्री से संबंधित है।

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