Anti Paper Leak Bill: राज्यसभा में डॉ. जितेंद्र सिंह ने एंटी पेपर लीक बिल पेश किया। इस बिल पर चर्चा के लिए 7 घंटे का समय दिया गया है। वहीं, इस बिल पर चर्चा करते हुए राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अपनी बातें रखी।
Anti Paper Leak Bill: राज्यसभा में खरगे ने पेपर लीक कानून पर सरकार को घेरा।
उन्होंने परीक्षा प्रणाली और पेपर लीक के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार ने परीक्षा व्यवस्था को सुधारने और मजबूत कानून बनाने में दो साल की देरी की और अब यह कदम छात्रों की समस्याओं के समाधान के लिए नहीं, बल्कि राजनीतिक दबाव और अपनी कुर्सी बचाने के लिए उठाया गया है।
देश के लाखों छात्रों और उनके परिवार हुए परेशान: खरगे
राज्यसभा में चर्चा के दौरान खरगे ने कहा कि पेपर लीक की घटनाओं ने देश के लाखों छात्रों और उनके परिवारों को परेशान किया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष लगातार इस मुद्दे को सड़क से लेकर संसद तक उठाता रहा, लेकिन सरकार ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
पेपर लीक को लेकर सरकार ने कोई गंभीर पहल नहीं की: खरगे
खरगे ने कहा कि विपक्ष लगातार सरकार से परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने की मांग करता रहा, लेकिन सरकार ने 2024 में लोकसभा चुनाव के दौरान इस पर कार्रवाई नहीं की क्योंकि उसे राजनीतिक नुकसान का डर था। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार युवाओं और पेपर लीक का मुद्दा उठाते रहे, लेकिन सरकार ने तब कोई गंभीर पहल नहीं की। उन्होंने कहा कि सरकार जिस कानून में अब संशोधन कर रही है, वह पहले जल्दबाजी में बनाया गया था और आज भी अधूरा है। खरगे के मुताबिक, मौजूदा व्यवस्था में पेपर लीक रोकने के पर्याप्त प्रावधान नहीं हैं। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पिछले दो महीनों की घटनाओं ने पूरे देश को झकझोर दिया।
ये काम दो साल पहले क्यों नहीं किया: खरगे
खरगे ने सवाल उठाए कि आपने ये काम दो साल पहले क्यों नहीं किया। क्यों की तब आपको राजनीती करनी थी लोक सभा चुनाव सामने थे। उस समय राहुल जी लगातार ये मुद्दा उठा रहे थे और आपको तब क्रेडिट नहीं मिलता।
उन्होंने आगे कहा,"उस समय परीक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए जल्दबाजी में ये कानून लाए, जिसको अब सुधार रहे हैं। पेपर लीक होने से रोकने की व्यवस्था इसमें नहीं है। पिछले 2 महीने की घटनाओं ने देश को झकझोर दिया है। विपक्ष ने उनकी आवाज सड़क से संसद तक उठाई। सरकार को घुटने ठेकने पड़े।
'पीएम मोदी ने अपनी कुर्सी के लिए ये सब किया'
खरगे ने कहा, "देश के युवा को मुबारकबाद देता हूं उनका संघर्ष रंग लाया शिक्षा मंत्री को हटाना पड़ा। सरकार को ये पता चलगया की आगे कुछ और होगा तो कुर्सी चली जायेगा, जो डिमांड था उसको माना गया। ये खुद को बचने के लिए कानून लाया गया। खरगे ने कहा, "छात्रों का संघर्ष रंग लाया। सरकार को झुकना पड़ा। युवाओं की ताकत देखना पड़ा। सरकार को मालूम हुआ। अगर कुछ खींचतान करेंगे तो कुर्सी चली जाएगी। कुर्सी बचाने के लिए ये काम किया। ना कि छात्रों की समस्याओं को समझाने के लिए।"
खरगे के बयान पर मचा हंगामा
मल्लिकार्जुन खरेगे ने कहा कि हजारों छात्रों ने संसद की ओर शांतिपूर्ण मार्च किया। वे संवाद चाह रहे थे। उनको मिला लाठीचार्ज, आंसू गैस, पैलेट गन, रेलवे स्टेशन बंद, इंटरनेट बंद। इससे छात्र उचक गए. आप शांति से उनको संभाल नहीं सके। कई छात्र घायल हो गए। कई बच्चों को आंखों में छर्रे लगे। ये देखकर हमको शर्म आई, उनको आया कि नहीं मुझे मालूम नहीं। मेरे विद्यार्थी जो गांव-गांव से आए, उनको पैलेट गन का इस्तेमाल करके मार रहे हैं। उनके हाथ-पैर टूटे। इसका जिम्मेदार कौन है। होम मिनिस्टर है। बंद कमरे में आप मेरी बात सुन रहे होंगे, लेकिन छिपकर आप बहुत दिन रह नहीं सकते।
एक दिन हम बाहर खींचकर लाएंगे और जनता के सामने दिखाएंगे कि क्या है।
इस पर ट्रेजरी बेंच के सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया. नेता सदन जेपी नड्डा ने खड़गे की स्पीच में असंसदीय शब्द के इस्तेमाल का दावा करते हुए चेयरमैन से इसे एक्सपंज करने की मांग की। खरगे ने कहा कि हमने किसी असंसदीय शब्द का इस्तेमाल नहीं किया है। हम मतलब जनता. सरकार को 20 जुलाई की घटना के बाद देश की जनता के सामने सफाई रखनी चाहिए थी।
