Parliament: नेहरू-इंदिरा पर हमले से लेकर SIR की जरूरत और RSS की तारीफ तक; डेढ़ घंटे के भाषण में क्या-क्या बोले शाह?

लोकसभा में चुनाव सुधार पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने SIR विवाद पर विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए पलटवार किया। इस दौरान उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्रियों नेहरू और इंदिरा गांधी की नीतियों पर भी तीखे सवाल उठाए। साथ ही राहुल गांधी द्वारा RSS पर की गई टिप्पणी पर शाह ने पलटवार करते हुए पूछा कि क्या कोई कानून संघ विचारधारा वाले व्यक्ति को किसी पद पर बैठने से रोकता है? पढें उनके संबोधन की बड़ी बातें

लोकसभा के शीतकालीन सत्र में बुधवार को चुनाव सुधारों पर हुई चर्चा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष की नारेबाजी और तर्कहीन आरोपों पर कड़ा हमला बोला। गृहमंत्री शाह ने साफ-साफ कहा कि एसआईआर पर बहस इसलिए नहीं हो सकती क्योंकि चुनाव आयोग सरकार के अधीन नहीं, बल्कि एक स्वायत्त संस्था है। उन्होंने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर जानबूझकर झूठ फैला रही है। उनके आरोपों का मैं सख्त और तर्कसंगत जवाब दूंगा। शाह ने अपने संबोधन के दौरान यह भी कहा कि कांग्रेस जब जीतती है तब चुनाव आयोग बहुत महान हो जाता है और उनके हारते ही वोट चोरी और अन्य आरोप आयोग पर लगाए जाते हैं। यह दोहरी राजनीति नहीं चलेगी। मतदाता सूची कोई भी हो कांग्रेस का हारना तय है। गृहमंत्री के संबोधन के दौरान विपक्ष ने जमकर हंगामा भी काटा।

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अमित शाह ने संसद में बोला विपक्ष पर हमला (Image Source: PTI)

हम चर्चा से कभी नहीं भागे, SIR पर इस सदन में चर्चा नहीं हो सकती

शाह ने आरोप लगाया कि विपक्ष ने दो दिनों तक संसद की कार्यवाही रोकने की कोशिश करके यह संदेश देने की साजिश रची कि सरकार चर्चा से भाग रही है, जबकि सच उल्टा है। हम (भाजपा-एनडीए) लोग चर्चा से कभी नहीं भागे। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा और जो चर्चा होनी थी, वह हुई भी। लेकिन जब चर्चा चुनाव सुधारों पर होनी थी, विपक्ष ने बार-बार एसआईआर का मुद्दा उठा कर बहस को भटका दिया। मैं बहुत साफ हूं कि इस सदन में SIR पर चर्चा नहीं हो सकती। SIR चुनाव आयोग की ज़िम्मेदारी है। भारत का EC और CEC सरकार के तहत काम नहीं करते हैं। अगर चर्चा होती है और सवाल उठते हैं, तो इसका जवाब कौन देगा? जब उन्होंने कहा कि वे चुनाव सुधारों पर चर्चा के लिए तैयार हैं, तो हम तुरंत मान गए।

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