अंबेडकर राष्ट्रपति के लिए समय सीमा तय किए जाने के थे खिलाफ, प्रेसिडेंशियल रेफरेंस पर SC में हुई दिलचस्प बहस

Supreme Court: संसद और विधानसभाओं से पारित विधेयकों पर राष्ट्रपति और राज्यपाल की स्वीकृति से जुड़ी संवैधानिक शक्तियों पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा भेजे गए प्रेसिडेंशियल रेफरेंस पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को अहम सुनवाई हुई। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि संविधान सभा की बहस से साफ है कि प्रारंभिक मसौदे में राष्ट्रपति को 6 हफ्ते में मनी बिल पर निर्णय लेने का प्रावधान था। लेकिन डॉ. भीमराव अंबेडकर ने संशोधन लाकर यह समयसीमा हटवा दी और उसकी जगह यथाशीघ्र या As Soon As Possible शब्द शामिल किया।

Presidential Reference: संसद और विधानसभाओं से पारित विधेयकों पर राष्ट्रपति और राज्यपाल की स्वीकृति से जुड़ी संवैधानिक शक्तियों पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा भेजे गए प्रेसिडेंशियल रेफरेंस पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को अहम सुनवाई हुई। इस दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि संविधान सभा ने जानबूझकर राष्ट्रपति और राज्यपाल के लिए विधेयकों पर फैसला लेने की कोई समयसीमा तय नहीं की थी।

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प्रेसिडेंशियल रेफरेंस पर सुप्रीम कोर्ट में हुई बहस

केंद्र सरकार की तरफ से पेश हुए SG तुषार मेहता की दलीलें

मेहता ने कहा कि संविधान सभा की बहस से साफ है कि प्रारंभिक मसौदे में राष्ट्रपति को 6 हफ्ते में मनी बिल पर निर्णय लेने का प्रावधान था। लेकिन डॉ. भीमराव अंबेडकर ने संशोधन लाकर यह समयसीमा हटवा दी और उसकी जगह यथाशीघ्र या As Soon As Possible शब्द शामिल किया। जबकि दूसरे सदस्य एच.वी. कामथ ने इसका विरोध किया था और इसे अस्पष्ट कहा था, फिर भी संविधान सभा में अंबेडकर का संशोधन ही स्वीकार किया गया।

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