कांग्रेस नेता राहुल गांधी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने उस समय के आदेश को रद्द करने से इंकार कर दिया है, जो राहुल गांधी के खिलाफ सावरकर मानहानि मामले में जारी हुए हैं। न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने राहुल गांधी की याचिका पर विचार करने से इंकार कर दिया और कहा कि गांधी के पास दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 397 (निचली अदालत के रिकॉर्ड की समीक्षा) के तहत सत्र न्यायाधीश के समक्ष याचिका दायर करने का विकल्प है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी (फाइल फोटो)
लखनऊ सत्र न्यायालय ने समन किया था जारी
पिछले साल दिसंबर में लखनऊ सत्र न्यायालय ने समन आदेश पारित किया था। ट्रायल कोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला पाया और उन्हें अपने समक्ष पेश होने का निर्देश दिया। इसके बाद, गांधी ने समन आदेश को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
क्या है आरोप
अधिवक्ता नृपेंद्र पांडे ने राहुल गांधी पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 153ए (शत्रुता को बढ़ावा देना) और 505 (सार्वजनिक शरारत) के तहत आरोप लगाए गए हैं। पांडे ने शुरुआत में सावरकर पर अपनी टिप्पणी के लिए गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए एक आवेदन के साथ एक अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) से संपर्क किया था। पांडे ने 17 नवंबर, 2022 को राहुल गांधी द्वारा की गई टिप्पणी पर शिकायत दर्ज कराई, जब उन्होंने सावरकर को अंग्रेजों का सहयोगी बताया और आगे कहा कि सावरकर को अंग्रेजों से पेंशन मिलती थी। पांडे ने जोर देकर कहा कि ये टिप्पणियां समाज में नफरत भड़काने के इरादे से की गई थीं।
