Sonam Wangchuk : पर्यावरण एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने अपने NGO के एफसीआरए लाइसेंस रद्द किए जाने पर प्रतिक्रिया दी है। समाचार एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में सरकारी की इस कार्रवाई को 'बदले की कार्रवाई' बताया है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन की दौरान हुई हिंसा का दोष उन पर मढ़ दिया गया है। इस बीच खबर यह भी है कि लद्दाख का एक शिष्टमंडल दिल्ली आएगा और गृह मंत्रालय के साथ बातचीत करेगा।
पर्यावरण एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक। तस्वीर-PTI
'सारा दोष सोनम वांगचुक पर मढ़ दिया गया'
अपनी संस्था पर कथित एफसीआरए उल्लंघन को लेकर सीबीआई जांच के मुद्दे पर एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने कहा, 'दूसरे को कसूरवार ठहराने की श्रृंखला में, कल की घटनाएं अंतिम थीं और सारा दोष सोनम वांगचुक पर मढ़ दिया गया।' उन्होंने कहा, 'लेह विरोध प्रदर्शनों के एक दिन बाद, भारत के गृह मंत्रालय ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की जिसमें मेरा नाम लेकर मुझे दोषी ठहराया गया। मुझे सीबीआई जांच का नोटिस मिला जिसमें कहा गया कि आपके संगठन ने विदेशी फंडिंग ली, जबकि हमारे पास एफसीआरए नहीं है। हमने एफसीआरए इसलिए नहीं लिया क्योंकि हम विदेश से धन नहीं चाहते।'
हमें विदेशी संस्थाओं से टैक्स सहित फीस मिली
एक्टिविस्ट ने आगे कहा कि संयुक्त राष्ट्र की टीम हमारी पैसिव सोलर हीटेड बिल्डिंग को अफगानिस्तान ले जाना चाहती थी और इसके लिए उन्होंने हमें फीस दी। हमें स्विट्ज़रलैंड और इटली की संस्थाओं से भी टैक्स सहित फीस मिली, ताकि हम उन्हें अपनी आर्टिफिशियल ग्लेशियर तकनीक का ज्ञान दे सकें... हमें इनकम टैक्स के समन मिल रहे हैं। विच-हंटिंग की श्रृंखला में, कल की घटनाएं अंतिम थीं और सारा दोष सोनम वांगचुक पर मढ़ा गया।'
मुझे जेल में डालने की हो रही तैयारी-सोनम
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ को फोन पर बताया, ‘ये कहना कि यह (हिंसा) मेरे या कांग्रेस द्वारा भड़काई गई थी, समस्या के मूल से निपटने के बजाय बलि का बकरा ढूंढ़ने जैसा है, और इससे कोई हल नहीं निकलेगा।’ वांगचुक ने कहा, ‘वे किसी को बलि का बकरा बनाने की चालाकी कर सकते हैं, लेकिन वे बुद्धिमान नहीं हैं। इस समय, हम सभी को ‘चतुराई’ की बजाय बुद्धिमत्ता की आवश्यकता है, क्योंकि युवा पहले से ही निराश हैं।’ जलवायु कार्यकर्ता ने कहा, ‘मैं देख रहा हूं कि वे कुछ ऐसा मामला बना रहे हैं, ताकि मुझे जन सुरक्षा अधिनियम के तहत गिरफ्तार करके दो साल के लिए जेल में डाल सकें। मैं इसके लिए तैयार हूं, लेकिन सोनम वांगचुक को आजाद रखने के बजाय जेल में डालने से समस्याएं और बढ़ सकती हैं।’’
‘बलि का बकरा’ बनाने की रणनीति
उन्होंने सरकार पर नौकरी में आरक्षण पर सफलता का दावा करके जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया तथा कहा कि राज्य का दर्जा एवं लद्दाख के आदिवासी दर्जे और पर्यावरण की रक्षा के लिए छठी अनुसूची के विस्तार की मुख्य मांगों पर पांच साल की शांतिपूर्ण अपीलों के बाद भी गौर नहीं किया गया हैं। वांगचुक ने कहा कि ‘बलि का बकरा’ बनाने की रणनीति अपनाकर सरकार ‘वास्तव में शांति के उपाय नहीं कर रही है,’ बल्कि ऐसे कदम उठा रही है, जो लोगों की मूल मांगों से ध्यान भटकाकर स्थिति को ‘और बिगाड़’देंगे।
‘भड़काऊ बयानों’ की वजह से भीड़ हिंसक हो गई-MHA
अधिकारियों के मुताबिक, वांगचुक के नेतृत्व में लद्दाख राज्य का आंदोलन बुधवार को लेह में हिंसा, आगजनी और हिंसा में बदल गया, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई और 40 पुलिसकर्मियों सहित कम से कम 80 लोग घायल हो गए। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार रात एक बयान में आरोप लगाया था कि कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और ‘राजनीति से प्रेरित’ कुछ ऐसे लोग, जो सरकार और लद्दाखी समूहों के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत में हुई प्रगति से खुश नहीं हैं, उनके ‘भड़काऊ बयानों’ की वजह से भीड़ हिंसक हो गई।
