महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और NCP के प्रमुख अजित पवार का बुधवार सुबह एक भीषण विमान हादसे में निधन हो गया। बारामती के रनवे पर लैंडिंग से ठीक पहले हुए इस हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया है। लेकिन इस दुखद घटना में एक ऐसी बात सामने आई है जिसने सबको भावुक कर दिया, जिस 'घड़ी' को अजित पवार ने अपनी राजनीतिक पहचान बनाया, वही घड़ी उनके पार्थिव शरीर की आखिरी पहचान भी बनी।
चश्मदीदों ने बताया घड़ी से हुई शव की शिनाख्त (फाइल फोटो: ANI)
'घड़ी' ही बनी आखिरी पहचान
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) का चुनाव चिह्न 'घड़ी' है। अजित पवार ने हाल के वर्षों में इसी चुनाव चिह्न के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी और इसे अपनी नई पहचान के रूप में स्थापित किया। नियति का खेल देखिए कि बारामती में जब विमान हादसे के बाद आग की लपटें ठंडी हुईं, तो क्षत-विक्षत शवों के बीच अजित पवार की पहचान उनकी कलाई पर बंधी उसी 'घड़ी' से की गई। जब शरीर पहचानना मुश्किल था, तब प्रशासन के एक अधिकारी ने उनकी कलाई की घड़ी देखकर भारी मन से पुष्टि की, "ये दादा (अजित पवार) ही हैं।"
चश्मदीदों ने सुनाई दास्तान
हादसे के वक्त वहां मौजूद एक स्थानीय निवासी ने बताया कि सुबह करीब 8:45 बजे उन्होंने एक चार्टर विमान को हवा में लड़खड़ाते देखा। चश्मदीद के मुताबिक, "हम यहीं पास में रहते हैं, पीछे ही एयरस्ट्रिप है। हमने देखा कि प्लेन लैंड करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन वह रनवे पर उतरने के बजाय आगे निकल गया। कुछ देर बाद वह मुड़ा और दोबारा लैंडिंग की कोशिश की, लेकिन रनवे से कुछ ही मीटर पहले वह क्रैश हो गया।" जैसे ही विमान गिरा, उसमें भीषण आग लग गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और प्रशासन को सूचना दी। ग्रामीणों ने खुद आग बुझाने की कोशिश की और करीब 15-20 मिनट की मशक्कत के बाद जब आग काबू में आई, तो अंदर का दृश्य भयावह था।
मदद के लिए आगे आए ग्रामीण
हादसे के बाद पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। प्रत्यक्षदर्शी ने बताया, "पुलिस ने हमसे पानी मांगा और शवों को ढंकने के लिए कपड़े की मदद मांगी। हमने अपने घर से एक नया कंबल लाकर दिया ताकि पार्थिव शरीर को सम्मानपूर्वक ढंका जा सके। उस वक्त हमें नहीं पता था कि यह हमारे 'दादा' हैं। बाद में जब उनकी कलाई पर बंधी घड़ी देखी गई, तब पता चला कि हमने महाराष्ट्र के एक बड़े नेता को खो दिया है।"
