'INDI' Alliance Meeting: मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ एवं राजस्थान के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली पराजय ने 'इंडी' गठबंधन को कमजोरियों एवं अंतर्विरोध को एक बार फिर सामने ला दिया है। गठबंधन में शामिल दल एक-एक कर अब कांग्रेस को आईना दिखाना लगे हैं। छह दिसंबर यानी बुधवार को गठबंधन की होने वाली बैठक से ममता बनर्जी ने दूरी बना ली है। अब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के इस बैठक में शामिल होने को लेकर संशय है। सपा के राष्ट्रीय सचिव राजेंद्र चौधरी ने कहा है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष का बुधवार को दिल्ली जाने का अभी कोई कार्यक्रम निर्धारित नहीं है। बैठक से अखिलेश की दूरी कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका मानी जाएगी।
'इंडी' अलायंस की बुधवार को दिल्ली में होनी है बैठक।
हार के बाद कांग्रेस का दांव उल्टा पड़ा
हिमाचल प्रदेश और फिर कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी को हराने के बाद कांग्रेस का जोश एवं उत्साह चरम पर था। वह मानकर चल रही थी राजस्थान में उसकी सरकार जा सकती है लेकिन मध्य प्रदेश अपनी सरकार बनाएगी एवं छत्तीसगढ़ में दोबारा वापसी करेगी लेकिन इन तीनों राज्यों में उसे भारी हार का सामना करना पड़ा है। एमपी और छत्तीसगढ़ जीतने में यदि वह सफल हो जाती तो निश्चित रूप से इंडी गठबंधन में उसका दबदबा चलता और गठबंधन के सहयोगी दलों को उसकी बात मानने के लिए बाध्य होना पड़ता। कांग्रेस यह जताने की कोशिश करती कि वही भाजपा एवं नरेंद्र मोदी को रोक सकती है। लेकिन तीन राज्यों में हार से उसका दांव उल्टा पड़ गया है। सहयोगी दल उससे दूरी बनाने लगे हैं।
कांग्रेस पर अब दबाव बनाएंगे क्षेत्रीय छत्रप
लोकसभा चुनाव 2024 से पहले पांच राज्यों खासकर राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के चुनाव नतीजों को सेमीफाइनल माना जा रहा था और इस सेमीफाइल में कांग्रेस अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद कर रही थी। चुनाव में अपनी सफलता का दबाव वह सीट बंटवारे के लिए बनाती लेकिन अब ऐसा नहीं हो पाएगा। सपा, टीएमसी को लगता है कि कांग्रेस को ज्यादा सीटें देकर वह अपना नुकसान कर सकते हैं। अब कांग्रेस को यदि इन क्षत्रपों को अपने साथ बनाकर रखना है तो उसे उनकी बात एवं उनकी शर्तें माननी होंगी।
अखिलेश को मिला कांग्रेस पर हमलावर होने का मौका
अखिलेश यादव को कांग्रेस पर हमला बोलने का एक मौका मिल गया है। मध्य प्रदेश में सीट बंटवारे पर उपजे विवाद एवं कांग्रेस नेताओं की बयानबाजी से वे नाराज हुए थे। वह अब अपनी खीझ मिटा सकते हैं। उमर अब्दुल्ला भी कह चुके हैं कि कांग्रेस को एमपी में सपा को कुछ सीटें दे देनी चाहिए थी। बहरहाल, इंडी गठबंधन अब किस दिशा में और किस रफ्तार से आगे बढ़ेगा, यह बुधवार को दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर होने वाली बैठक से बहुत कुछ तय होगा।
