भारत ने अफगानिस्तान को लेकर साफ कर दिया है, अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए नहीं होना चाहिए। भारत और पांच मध्य एशियाई देशों की दिल्ली में एक बैठक हुई, जिसमें एक संयुक्त बयान में कहा गया है कि तालिबान को अफगानियों के अधिकारों का सम्मान करना होगा।
अफगान क्षेत्र का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों के लिए नहीं किया चाहिए: भारत (प्रतीकात्मक फोटो- Pixabay)
कौन-कौन से देश से शामिल
दिल्ली में अफगानिस्तान पर भारत-मध्य एशिया संयुक्त कार्यकारी समूह की पहली बैठक में युद्ध से तबाह देश के हालात पर गहन चर्चा हुई। मेजबान भारत के अलावा बैठक में कजाकिस्तान, किर्गिज गणराज्य, तजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान के विशेष राजनयिकों और वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। संयुक्त राष्ट्र मादक पदार्थ और अपराध कार्यालय (यूएनओडीसी) और संयुक्त रार्ष्ट विश्व खाद्यान्न कार्यक्रम (यूएनडब्ल्यूएफपी) के सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने भी बैठक में हिस्सा लिया।
बयान में क्या कहा गया
एक संयुक्त बयान में कहा गया कि बैठक में ‘सही मायने में समावेशी और प्रतिनिधिक राजनीतिक ढांचे’ के गठन के महत्व पर जोर दिया गया, जो सभी अफगानियों के अधिकारों का सम्मान करे और शिक्षा तक पहुंच सहित महिलाओं, लड़कियों और अल्पसंख्यक समूहों के सदस्यों के समान अधिकार को सुनिश्चित करे। बयान में यह भी कहा गया कि विचार-विमर्श के दौरान अधिकारियों ने आतंकवाद, उग्रवाद, कट्टरता और मादक पदार्थों की तस्करी के क्षेत्रीय खतरों पर चर्चा की। इन खतरों का मुकाबला करने के लिए समन्वित प्रयास की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया।
आतंकवाद पर चर्चा
बयान में कहा गया- "इस बात पर जोर दिया गया कि अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल किसी भी आतंकवादी गतिविधि के लिए आश्रय देने, प्रशिक्षण देने, योजना बनाने या वित्तपोषण करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। इसमें कहा गया कि इस बात की फिर से पुष्टि की गई कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) प्रस्ताव 1267 द्वारा नामित आतंकवादी संगठनों सहित किसी भी आतंकवादी संगठन को शरण प्रदान नहीं किया जाना चाहिए या अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।"
भारत का ऐलान
बयान में कहा गया कि भारत ने चाबहार बंदरगाह के जरिये यूएनडब्ल्यूएफपी के साथ सहयोग से भारत ने अफगानिस्तान को 20 हजार टन गेहूं की आपूर्ति करने का ऐलान किया था।
