Rahul Gandhi News: गोकुल डेयरी में राज्य सरकार द्वारा मनोनीत सदस्य चुने जाने वाले महाराष्ट्र सरकार के फैसले पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने फड़णवीस सरकार पर हमला बोला है। राहुल ने गुरुवार को कहा कि महाराष्ट्र सरकार का यह निर्णय दूध उत्पादन करने वाले लोगों की 'वोट चोरी' और जनादेश में 'मिलावट' है। राहुल का दावा है कि चुनावों में दुघ उत्पादनकर्ताओं ने भाजपा को हराया है, इसलिए वह नियमों में बदलाव करते हुए इसके निदेशकों की संख्या 12 से 16 कर रही है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी।
यह दूध उत्पादकों के वोटों की चोरी है-राहुल
राहुल ने कहा कि गोकुल डेयरी चुनाव में दूध उत्पादकों ने बीजेपी को हरा दिया, लेकिन चुनाव के बाद नियमों में बदलाव कर चार निदेशकों को शामिल कर लिया गया, ताकि संख्या 12 से बढ़ाकर 16 की जा सके और बहुमत हासिल किया जा सके। राहुल गांधी ने हिंदी में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा, 'यह दूध उत्पादकों के वोटों की चोरी है- जनादेश में मिलावट है।' उन्होंने कहा, 'बीजेपी सत्ता बचाने के लिए इतनी बेचैन हो गई है कि हर जगह किसी भी हद तक जाने को तैयार है। दूध उत्पादकों के वोट चुराने वालों को याद रखना चाहिए कि किसान भूलते नहीं हैं।'
पवन खेड़ा ने भी बोला हमला
राहुल गांधी ने कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा की पोस्ट को भी टैग किया। पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र सरकार विधायी बदलावों के जरिए कोल्हापुर की गोकुल मिल्क फेडरेशन के निर्वाचित बोर्ड की संरचना में हेरफेर कर दूध उत्पादकों के लोकतांत्रिक जनादेश को खुलेआम प्रभावित करने की कोशिश कर रही है। खेड़ा के मुताबिक, 19 अक्टूबर को हुए चुनाव में कांग्रेस समर्थित पैनल ने 25 में से 13 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया था, जबकि महायुति को 12 सीटें मिली थीं। महायुति समर्थित निदेशकों की गैरमौजूदगी के कारण अध्यक्ष का चुनाव नहीं हो सका। इसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने 10 नवंबर को नए सिरे से चुनाव कराने का निर्देश दिया।
चुनाव के बाद बोर्ड का समीकरण बदल सकता है
उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचित बोर्ड को काम करने देने के बजाय राज्य मंत्रिमंडल ने मतदान के अधिकार वाले चार सरकारी निदेशकों को मनोनीत करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इससे चुनाव के बाद बोर्ड का समीकरण बदल सकता है और दूध उत्पादकों के जनादेश को पलटा जा सकता है। पवन खेड़ा ने कहा, 'बड़ा सवाल यह है कि क्या कोई सरकार चुनाव के बाद सिर्फ इसलिए नियम बदल सकती है, क्योंकि उसे चुनाव का नतीजा पसंद नहीं आया? हम लोकतांत्रिक जनादेश और सहकारी संस्थाओं की स्वायत्तता की रक्षा के लिए इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रहे हैं।'
सत्तारूढ़ शिवसेना ने भी फैसले की आलोचना की
महाराष्ट्र में विपक्षी कांग्रेस और एनसीपी (एसपी) के साथ-साथ सत्तारूढ़ शिवसेना के एक नेता ने भी बुधवार को कोल्हापुर की गोकुल डेयरी में सरकार की ओर से मनोनीत सदस्यों की नियुक्ति के फैसले की आलोचना की और इसे 'लोकतंत्र की हत्या' करार दिया। दरअसल, महाराष्ट्र कैबिनेट ने बुधवार को उन सहकारी संस्थाओं की प्रबंध समितियों में सरकार की ओर से पांच सदस्यों को मनोनीत करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी, जिनका सालाना टर्नओवर 500 करोड़ रुपये से अधिक है। हालांकि, जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों को इस फैसले से बाहर रखा गया है। इनमें से चार मनोनीत सदस्यों को निदेशक मंडल में मतदान का अधिकार भी मिलेगा।
आघाड़ी ने 25 में से 13 सीटें जीती थीं
कांग्रेस विधान परिषद सदस्य सतेज पाटिल समर्थित राजर्षि शाहू शेतकरी समविचारी आघाड़ी ने कोल्हापुर जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ के चुनाव में 25 में से 13 सीटें जीती थीं। इस संघ को गोकुल डेयरी के नाम से जाना जाता है। वहीं, महायुति को 12 सीटें मिली थीं। हालांकि, चुनाव परिणाम घोषित होने के कई दिन बाद भी अध्यक्ष पद खाली है। दरअसल, अध्यक्ष के चुनाव के लिए होने वाली बैठकों में जरूरी 14 निदेशकों का कोरम पूरा नहीं हो पा रहा है। इस बीच, एनसीपी (एसपी) नेता रोहित पवार ने भी सोशल मीडिया पोस्ट में आरोप लगाया कि गोकुल डेयरी चुनाव में हार के बावजूद बीजेपी ने हार स्वीकार नहीं की है। अब चार सरकारी मनोनीत निदेशकों को मतदान का अधिकार देकर सहकारी संस्था पर नियंत्रण हासिल करने की कोशिश की जा रही है।
