Why Diabetes is on rise in India: भारत में डायबिटीज को लेकर जो सबसे बड़ा भ्रम है वो ये है कि यह बीमारी मिठाइयां खाने से होती है। जबकि आम तौर पर घरों में रोजाना खाए जाने वाले भोजन जैसे रोटी, चावल, थेपला, उपमा, खाखरा जैसी चीजें भी डायबिटीज के खतरे को बढ़ा सकती हैं। हेल्थ कोच फूडफार्मर ने हाल ही में अपने इंस्टाग्राम एकाउंट से एक पोस्ट में जानकारी दी है कि डायबिटीज के खतरे को बढ़ाने में मीठे का हाथ नहीं है बल्कि भारतीयों के कम प्रोटीन और ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाले खानों की इसमें बड़ी भूमिका है। फूडफार्मर ने ये बातें एक रिसर्च के हवाले से कही हैं।
प्रति व्यक्ति सबसे कम प्रोटीन खाने वाले देशों में शामिल है भारत
2016 में छपी प्रोफेसर जेनेट रंगनाथन की एक रिसर्च कहती है कि दुनिया में हर व्यक्ति दिन में कितना प्रोटीन खाता है इसके आंकड़े में भारत सबसे पीछे है। इस रिपोर्ट की मानें तो देश में प्रतिदिन एक व्यक्ति मात्र 52 ग्राम प्रोटीन का सेवन करता है। इस क्रम में भारत अफ्रीका से भी पीछे है। अमेरिका से तुलना करें तो ये आंकड़ा 90 तक जाता है। यूरोप में 86, चीन में 80 और अफ्रीका में हर दिन 58 ग्राम प्रोटीन की प्रति व्यक्ति खपत है। अब नजर डालते हैं कार्बोहाइड्रेट्स के आंकड़ों पर।
सबसे ज्यादा कार्बोहाइड्रेट्स खाने वाले देशों में आता है भारत
आवर वर्ल्ड इन डेटा के आंकड़े कहते हैं भारत के डाइट में कार्बोहाइड्रेट्स का प्रतिशत 68 फीसदी तक जाता है। आश्चर्य की बात है कि अमेरिका जैसे देश में जहां मोटापा एक बड़ी समस्या है, वहां ये आंकड़ा 46 फीसदी का है।
क्या है हाई कार्बोहाइड्रेट और लो प्रोटीन डाइट का डायबिटीज पर असर
देश के कार्बोहाइड्रेट्स और प्रोटीन के आहार का अनुपात देखा जाए तो काफी चौंकाने वाले आंकड़े सामने आते हैं। आवर वर्ल्ड इन डेटा की मानें तो हम प्रोटीन की तुलना में 6 गुना ज्यादा कार्बोहाइड्रेट खाते हैं। नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन की एक रिपोर्ट कहती है कि भारतीयों में डायबिटीज का एक बड़ा कारण हाई कार्बोहाइड्रेट और लो प्रोटीन डाइट है और डाइट में सुधार करके डायबिटीज के रिस्क में कमी लाई जा सकती है। साथ में रिपोर्ट ये भी कहती है कि डायबिटीज से ग्रस्त लोगों के आहार में प्रोटीन को बढ़ाने से बहुत सकारात्मक प्रभाव दिख सकते हैं। अगर डायबिटीज के खतरे को कम करना है तो, इसके लिए अपने रोजाना के आहार में प्रोटीन की मात्रा को 5 से 10 प्रतिशत तक बढ़ाना चाहिए और कार्बोहाइड्रेट्स की मात्रा को इतना ही यानी 5 से 10 प्रतिशत कम करना चाहिए।
डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।
