हेल्थ

एंटीबायोटिक्स क्यों बेअसर, बड़ी-बड़ी स्टडीज क्या दे रही हैं चेतावनी, एक्सपर्ट्स की क्या है राय

Antibiotic Resistance Explained: एंटीबायोटिक्स लेने पर क्या आपको भी आराम नहीं मिल रहा? तो बता दें कि आप अकेले नहीं हैं जो इस तरह की समस्या का सामना कर रहे हैं। जब घर में मामूली बुखार, UTI या खांसी पर भरोसा की गई एंटीबायोटिक अचानक काम करना बंद कर दे, तो डर सिर्फ बीमारी का नहीं, बल्कि बेअसर दवाओं के बढ़ते खतरे का भी होता है। ICMR और लांसेट की रिपोर्ट्स ने भी इसको लेकर हैरानी वाले तथ्य बताए हैं। चलिए जानते हैं कि आम संक्रमण अब क्यों दिक्कत बन रहे हैं और एंटीबायोटिक्स क्यों काम नहीं कर रहीं।

एंटीबायोटिक्स क्यों हो रहीं बेअसर

सुपरबग्स क्या हैं और क्यों बढ़ रहे हैं?

Antibiotic Resistance Explained: आमतौर पर जब हमारे घर में किसी को मामूली बुखार, पेट दर्द या यूरिन इन्फेक्शन हो जाए तो आप क्या करते हैं? डॉक्टर के पास जाते हैं, दवा लेते हैं, और उम्मीद करते हैं कि 2-3 दिन में सब ठीक हो जाएगा। यही तो हम सालों से करते आ रहे हैं। लेकिन अब यह भरोसा धीरे-धीरे कमजोर पड़ रहा है। क्योंकि जो एंटीबायोटिक दवाएं कभी जादू की तरह काम करती थीं, वही आज कई बार हमारे सामने हार मान रही हैं।

आजकल ज्यादातर लोग शिकायत कर रहे हैं कि किसी भी तरह का संक्रमण होने पर उन्हें एंटीबायोटिक दवाओं से आराम नहीं मिल रहा है। कई लोगों को पहली दवा से आराम नहीं मिल रहा, तो बहुत से लोग ऐसे हैं जिनपर दूसरी दवा भी बेअसर हो रही है। अब ऐसे में आखिर में मरीज को सीधा जाकर अस्पताल में ही भर्ती करना पड़ा। लेकिन समझने वाली बात यह है कि आखिर ऐसा हो कैसे सकता है या क्यों हो रहा है? आपको जानकर हैरानी हो सकती है कि भारत में लाखों लोग इसी डर और असहाय स्थिति का सामना कर रहे हैं।

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) की ताजा रिपोर्ट और लांसेट (Lancet) जैसी ग्लोबल स्टडीज में लगातार यह बात सामने आ रही है कि एंटीबायोटिक्स की ताकत लगातार घट रही है। आम बैक्टीरिया भी अब इन दवाओं के खिलाफ शक्ति विकसित कर रहे हैं। डॉक्टर भी कह रहे हैं कि अगर अभी नहीं संभले, तो आने वाले सालों में साधारण संक्रमण भी जानलेवा हो सकते हैं। आज के इस लेख में हम जानेंगे कि आखिर क्यों एंटीबायोटिक्स बेअसर हो रही हैं, इसको लेकर स्टडीज क्या चेतावनी दे रही हैं, और इस पर डॉक्टर्स का क्या कहना है।

एंटीबायोटिक्स बेअसर क्यों हो रहीं?

ICMR की 2024-25 AMRSN रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली कई एंटीबायोटिक दवाएं अब आम बैक्टीरिया पर असर नहीं दिखा रही हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में पाई जाने वाली कई सामान्य दवाएं जैसे फ्लोरोकिनोलोन्स, सेफालोस्पोरिन, पिपरेसिलिन-टैजोबैक्टम, कार्बापेनेम आदि पर बैक्टीरिया रेजिस्टेंट हो चुके हैं।

अमृता अस्पताल, फरीदाबाद के सीनियर कसंल्टेंट और संक्रामक रोग एक्सपर्ट डॉ. रोहित कुमार गर्ग बताते हैं, कि ऐसा नहीं है कि दवाएं खराब हैं, बल्कि समस्या यह है कि बैक्टीरिया अब उनसे निपटने के हथकंडे सीख चुके हैं।

सुपरबग्स क्या हैं और क्यों बढ़ रहे हैं?

अस्पतला के एक अन्य इंटरनल मेडिसिन एक्सपर्ट और सीनियर कंसल्टेंट डॉ. मोहित शर्मा बताते हैं कि सुपरबग्स वो बैक्टीरिया हैं जो कई एंटीबायोटिक्स को झेल लेते हैं। ICMR रिपोर्ट के डेटा में देखा गया कि भारत में 2024-25 के दौरान ग्रान-निगेटिव (Gram-negative) बैक्टीरिया सबसे ज्यादा तेजी से बढ़े। सबसे खतरनाक बैक्टीरिया में शामिल हैं,

  • ई. कोलाई (E. coli), जो UTI और पेट संक्रमण का कारण बनता है।
  • क्लेबसिएला निमोनिया (Klebsiella pneumoniae), जो निमोनिया और सीप्सिस के लिए जिम्मेदार होता है।
  • एसिनेटोबैक्टर बाउमानी (Acinetobacter baumannii), जो ICU संक्रमण को ट्रिगर करते हैं।
  • ये बैक्टीरिया अब पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक होते जा रहे हैं, क्योंकि ये दवाओं से आसानी से नहीं मरते।

कौन-सी दवाएं अब असर नहीं कर रहीं
कौन-सी दवाएं अब असर नहीं कर रहीं

कौन-सी दवाएं अब असर नहीं कर रहीं?

फोर्टिस अस्पताल, शालीमार बाग के चिकित्सक एवं नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. भानु मिश्रा का कहना है कि अब यह समझना जरूरी है कि दिक्कत सिर्फ संक्रमण बढ़ने की नहीं है, बल्कि हमारी सबसे भारी-भरकम दवाएं ही हार मान रही हैं। इससे डॉक्टरों के सामने इलाज के विकल्प बेहद सीमित हो जाते हैं। ICMR की मॉनिटरिंग रिपोर्ट बताती है कि -

  • लगभग 75% मामलों में पिपरेसिलिन-टैजोबैक्टम बेअसर पाया गया
  • कार्बापेनेम जैसी 'सबसे शक्तिशाली' दवाओं का असर भी कई बैक्टीरिया पर तेजी से घटा
  • ICU में इस्तेमाल होने वाला मेरोपेनेम (Meropenem) तक 90% मामलों में फेल पाया गया

यह स्थिति भारत के लिए बेहद गंभीर अलार्म है।

यूटीआई, निमोनिया, डायरिया का इलाज क्यों मुश्किल हो रहा?

हेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि भारत में UTI अब पहले जितना आसान नहीं रहा क्योंकि E. coli लगभग 50% से ज्यादा एंटीबायोटिक्स पर रेजिस्टेंट है। क्लेबसिएला निमोनिया तो कई वार्डों में बड़े संक्रमण फैला चुका है, जिससे निमोनिया और सीप्सिस का इलाज और लंबा व महंगा हो रहा है।

डॉ. मोहित कहते हैं कि बैक्टीरिया अब बहुत चतुर हो चुके हैं। वही संक्रमण, जो पहले 3 दिन में ठीक हो जाता था, अब कई बार 15–20 दिन भी ले लेता है।

भारत सुपरबग हॉटस्पॉट क्यों बन रहा है
कौन-सी दवाएं अब असर नहीं कर रहीं

भारत सुपरबग हॉटस्पॉट क्यों बन रहा है?

डॉक्टर्स का मानना है कि संख्या कभी झूठ नहीं बोलती। रिपोर्ट्स में सामने आए आंकड़े साफ दिखाते हैं कि भारत में संक्रमण कितनी तेजी से खतरनाक रूप ले रहे हैं। दुनिया के मुकाबले यह अंतर इतना बड़ा है कि हालात को हल्के में लेना नामुमकिन है। अगर आप तुलनात्मक रूप से देखें तो संक्रमण की स्थिति कुछ ऐसी है,

  • भारत में - 83%
  • इटली - 31.5%
  • अमेरिका - 20%
  • नीदरलैंड - 10%

एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस से कितनी मौतें जुड़ी हैं?

लांसेट स्टडी और अन्य रिपोर्ट्स के विश्लेषण बताते हैं कि भारत में हर साल 3 लाख से अधिक मौतें एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस से जुड़ी हो सकती हैं। यानी सिर्फ दवाएं काम नहीं कर रहीं इस वजह से इलाज देर से शुरू होता है, बीमारी बढ़ती है और कई बार मरीज की जान तक चली जाती है।

एंटीबायोटिक्स का गलत इस्तेमाल कितना नुकसान कर रहा?

डॉ. रोहित गर्ग की मानें तो हम अक्सर सोचते हैं कि एंटीबायोटिक ले लेने से जल्दी आराम मिलेगा। लेकिन यही जल्दबाजी हमें और ज्यादा कमजोर बना देती है। गलत तरीके से ली गई दवा बैक्टीरिया को और ताकतवर बना देती है। इसमें भारतीयों की कुछ सामान्य गलतियां शामिल हैं,

  • बिना डॉक्टर के पर्चे के दवा ले लेना
  • बुखार आते ही एंटीबायोटिक शुरू कर देना
  • दवा का कोर्स पूरा न करना, आधा-अधूरा छोड़ देना
  • गलत दवा और गलत डोज
  • बच्चों को भी एंटीबायोटिक्स जल्दी दे देना

कौन-सी दवाएं अब असर नहीं कर रहीं
कौन-सी दवाएं अब असर नहीं कर रहीं

अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण क्यों फेल हो रहा है?

डॉ. भानु मिश्रा का कहना है कि अस्पतालों में हालात और चुनौतीपूर्ण हैं, क्योंकि मरीज ज्यादा, स्टाफ पर दबाव ज्यादा और दवाओं का दोहराव भी आम है। ऐसे माहौल में सुपरबग्स का फैलना और तेज हो जाता है। ICMR का डेटा बताता है,

  • ICU में एसिनेटोबैक्टर (Acinetobacter) के 90-91% मामले किसी भी कार्बापेनेम दवा से ठीक नहीं हुए
  • खराब स्वच्छता, स्टेरिलाइजेशन में कमी, भीड़ यह सब सुपरबग्स को बढ़ाते हैं

क्या साधारण संक्रमण भी जानलेवा बन सकता है?

डॉक्टर्स और स्टडीज कह रहे हैं कि अगर स्थिति ऐसी ही रही तो यह साधारण संक्रमण जानलेवा बन सकता है। UTI, निमोनिया, पेट का संक्रमण, डायरिया - ये वो बीमारियां हैं जिनका इलाज अब पहले जैसा आसान नहीं रहा। सुपरबग्स के कारण केस लंबा चलता है, दवाएं बार-बार बदलनी पड़ती हैं और मरीज की हालत बिगड़ने का खतरा बढ़ जाता है।

कौन सबसे ज्यादा खतरे में है?

हेल्थ एक्सपर्ट की मानें तो हर किसी पर इसका असर पड़ सकता है, लेकिन कुछ समूहों के लिए यह खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इन लोगों में प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है या बीमारी पहले से गंभीर होती है। लेकिन सबसे ज्यादा जोखिम ये लोग हैं,

  • बुजुर्ग
  • बच्चे
  • गर्भवती महिलाएं
  • कमजोर इम्युनिटी वाले लोग
  • ICU या लंबी बीमारी वाले मरीज

कौन सबसे ज्यादा खतरे में है
कौन सबसे ज्यादा खतरे में है

इस संकट को रोकने का हल क्या है?

डॉक्टर्स कहते हैं कि एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस को रोकना मुश्किल जरूर है, लेकिन यह असंभव काम नहीं है। बस एक संगठित प्रयास की जरूर है जिसमें व्यक्ति, डॉक्टर, अस्पताल और सरकार सबको साथ आना होगा। इसके लिए वैज्ञानिक और डॉक्टर तीन बड़े कदम सुझाव देते हैं,

1. जिम्मेदारी से एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल

  • डॉक्टर के बिना कभी दवा न लें
  • पूरा कोर्स पूरा करें
  • वायरल बुखार में एंटीबायोटिक नहीं चाहिए

2. अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण

  • ICMR हर अस्पताल को स्ट्रिक्ट प्रोटोकॉल अपनाने की सलाह देता है।

3. सरकार और सोसाइटी दोनों को कदम उठाने होंगे

  • ओवर-द-काउंटर एंटीबायोटिक बिक्री पर रोक
  • किसानों और पशुपालन में दवाओं का सीमित उपयोग
  • जागरूकता अभियान

नए इलाज और भविष्य की क्या उम्मीदें हैं?

कई डॉक्टर मानते हैं कि भारत में अब नई एंटीबायोटिक्स, वैक्सीन और वैकल्पिक इलाज की जरूरत है। ICMR और कई संस्थाओं में शोध चल रहा है, पर यह तभी असर करेगा जब आम लोग भी दवाओं का सही इस्तेमाल करेंगे।

एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस कोई मेडिकल शब्द नहीं, यह हमारे हर घर में उभरता हुआ खतरा है। अगर हम आज सावधान नहीं हुए, तो आने वाले समय में साधारण संक्रमण भी जानलेवा हो सकते हैं। लेकिन यदि हम दवाओं का समझदारी से उपयोग करें, सही जानकारी रखें और डॉक्टर की सलाह मानें तो यह संकट रोका जा सकता है।

लेटेस्ट न्यूज

Vineet
Vineet Author

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विष... और देखें

End of Article