World Preeclampsia Day 2026: मां बनना हर महिला के जीवन का बेहद खास दौर होता है। लेकिन प्रेग्नेंसी के दौरान कुछ ऐसी स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं, जो मां और बच्चे दोनों के लिए खतरा बन जाती हैं। ऐसी ही एक गंभीर स्थिति है प्रीक्लेम्पसिया। यह बीमारी अक्सर गर्भावस्था के बीच के महीनों में शुरू होती है और धीरे-धीरे शरीर पर असर डालने लगती है। कई महिलाएं इसके शुरुआती लक्षणों को सामान्य कमजोरी या प्रेग्नेंसी की आम परेशानी समझकर नजरअंदाज कर देती हैं, जबकि यही लापरवाही आगे चलकर बड़ी समस्या बन सकती है। इसी बारे में जागरूकता फैलाने के लिए हर साल 22 मई को विश्व प्रीक्लेम्पसिया दिवस (World Preeclampsia Day) मनाया जाता है। इस दिन लोगों को बताया जाता है कि समय पर जांच, सही जानकारी और सतर्कता से मां और बच्चे दोनों को सुरक्षित रखा जा सकता है।
क्या होता है प्रीक्लेम्पसिया, विश्व प्रीक्लेम्पसिया दिवस क्यों मनाया जाता है
क्या होता है प्रीक्लेम्पसिया
प्रीक्लेम्पसिया गर्भावस्था के दौरान होने वाली एक गंभीर हेल्थ कंडीशन है। इसमें महिला का ब्लड प्रेशर सामान्य से काफी बढ़ जाता है और शरीर के कुछ जरूरी अंग प्रभावित होने लगते हैं। खासतौर पर किडनी और लिवर पर इसका असर देखा जाता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह समस्या ज्यादातर प्रेग्नेंसी के 20वें हफ्ते के बाद सामने आती है। कई बार पेशाब में प्रोटीन बढ़ना भी इसका संकेत हो सकता है। अगर समय रहते इलाज न मिले तो यह मां और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। लगातार सिरदर्द, आंखों के सामने धुंधलापन, चेहरे या हाथ-पैरों में सूजन और पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द इसके आम लक्षण माने जाते हैं।
क्यों मनाया जाता है विश्व प्रीक्लेम्पसिया दिवस
हर साल 22 मई को दुनियाभर में विश्व प्रीक्लेम्पसिया दिवस (World Preeclampsia Day) मनाया जाता है। इसका मकसद लोगों को यह समझाना है कि प्रेग्नेंसी के दौरान हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं को हल्के में नहीं लेना चाहिए। हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि सही समय पर पहचान और इलाज मिलने से कई महिलाओं और नवजात बच्चों की जान बचाई जा सकती है। इस दिन अस्पतालों, हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन और डॉक्टरों की तरफ से जागरूकता अभियान भी चलाए जाते हैं ताकि महिलाएं नियमित जांच कराने के महत्व को समझ सकें।
क्या है विश्व प्रीक्लेम्पसिया दिवस का महत्व
प्रीक्लेम्पसिया को लेकर जागरूकता इसलिए भी जरूरी है क्योंकि इसके लक्षण कई बार सामान्य प्रेग्नेंसी समस्याओं जैसे लगते हैं। यही वजह है कि महिलाएं इसे गंभीरता से नहीं लेतीं। लेकिन अगर समय रहते ब्लड प्रेशर की जांच और डॉक्टर की सलाह ली जाए तो स्थिति को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। यह दिन लोगों को यही संदेश देता है कि प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में होने वाले बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। मां की सेहत सुरक्षित रहेगी तभी बच्चा भी स्वस्थ रहेगा।
विश्व प्रीक्लेम्पसिया दिवस 2026 की थीम
विश्व प्रीक्लेम्पसिया दिवस 2026 की थीम की थीम “Know the Symptoms – Early Action Saves Lives” रखी गई है। आसान भाषा में समझें तो इसका मतलब है कि लक्षणों को समय रहते पहचानना और तुरंत कदम उठाना कई जिंदगियां बचा सकता है। इस साल की थीम का फोकस खासतौर पर महिलाओं और उनके परिवारों को जागरूक करना है ताकि वे प्रेग्नेंसी के दौरान किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करें।
क्यों जरूरी है समय पर जांच
डॉक्टरों के अनुसार, नियमित प्रेग्नेंसी चेकअप प्रीक्लेम्पसिया जैसी समस्याओं को जल्दी पकड़ने में मदद करता है। अगर किसी महिला को पहले से हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या मोटापे की समस्या है तो उसे ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होती है। समय पर इलाज मिलने से गंभीर कॉम्प्लिकेशन का खतरा काफी कम किया जा सकता है। यही वजह है कि एक्सपर्ट्स गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने की सलाह देते हैं।
डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।
