Inflammatory Bowel Disease IBD Symptoms Causes And Treatment: अक्सर हम पेट में दर्द, दस्त या सूजन को हल्के में ले लेते हैं, सोचते हैं कि कुछ उल्टा-पुल्टा खा लिया होगा। लेकिन कई बार ये लक्षण एक गंभीर बीमारी की ओर इशारा करते हैं, जिसका नाम है IBD यानी इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (Inflammatory Bowel Disease)। आज के समय में भारत में करीब 15 लाख से भी ज्यादा लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं। IBD कोई मामूली पेट की बीमारी नहीं, बल्कि ये एक लंबे समय तक चलने वाली आंतों की सूजन है, जो आपकी सेहत और दिनचर्या दोनों पर असर डाल सकती है। हालांकि, इसके लक्षणों को समय रहते पहचानकर जीवनशैली में बदलाव के साथ इसे आसानी से ठीक किया जा सकता है। वर्ल्ड IBD डे के मौके पर आज हम फोर्टिस हॉस्पिटल, ओखला के डॉ. सुरक्षित टीके (सीनियर-गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी) से जानेंगे क्या होते हैं इन्फ्लेमेटरी बाउल डिजीज के लक्षण, कारण और इलाज...
Inflammatory Bowel Disease IBD Symptoms Causes And Treatment
इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (IBD) क्या होता है - What Is Inflammatory Bowel Disease IBD In Hindi
डॉ. सुरक्षित की मानें तो आईबीडी या इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज का मतलब है आंतों में बार-बार या लगातार सूजन रहना। ये एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर की इम्यून सिस्टम गलती से पाचन तंत्र पर हमला करने लगती है। आईबीडी मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है,
क्रोहन डिजीज (Crohn’s Disease): ये पाचन तंत्र के किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकती है, आमतौर पर यह छोटी और बड़ी आंत को प्रभावित करती है।
अल्सरेटिव कोलाइटिस (Ulcerative Colitis): ये सिर्फ बड़ी आंत (कोलन) और मलाशय को प्रभावित करता है।
क्या होते हैं इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (IBD) के लक्षण - Symptoms Of Inflammatory Bowel Disease IBD In Hindi
डॉ. सुरक्षित बताते हैं कि अगर आपको अक्सर पेट में तेज दर्द होता है या बार-बार वॉशरूम जाना पड़ता है, तो यह कुछ मामलों में आईबीडी का संकेत हो सकते हैं। ऐसे में आपको इन लक्षणों पर नजर रखनी चाहिए,
- बार-बार या लगातार दस्त (डायरिया)
- पेट दर्द और ऐंठन
- मल में खून आना
- थकान और कमजोरी
- वजन कम होना, भूख न लगना
- बच्चों में ग्रोथ रुक जाना या धीमी हो जाना
Causes And Symptoms OF IBD
इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (IBD) के कारण क्या हैं - Causes Of Inflammatory Bowel Disease IBD In Hindi
आईबीडी होने की कोई एक वजह नहीं होती, बल्कि कई कारण मिलकर ये बीमारी पैदा कर सकते हैं। सबसे आम कारणों में आता है परिवार में किसी को पहले से यह बीमारी होना, जिससे आनुवंशिक रूप से बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा शरीर की इम्यून सिस्टम की गड़बड़ी भी इसका बड़ा कारण है, जिसमें शरीर अपनी ही आंतों की कोशिकाओं पर हमला करने लगता है। कुछ पर्यावरणीय कारण भी होते हैं जैसे,
- बार-बार एंटीबायोटिक दवाएं लेना
- पेट में बार-बार संक्रमण होना
- ज्यादा प्रोसेस्ड फूड या जंक फूड खाना
- स्मोकिंग या शराब पीने की आदत
- तनाव और नींद की कमी भी आंतों की सेहत को बिगाड़ सकती है।
आईबीडी का पता कैसे लगाया जा सकता है - How To Know If You Have IBD In Hindi
आईबीडी के लक्षण नोटिस होने पर आप डॉक्टर से सलाह ले सकते हैं, जो आपकी कुछ डायग्नोसिस टेस्ट के जरिए बीमारी का पता करने में आपकी मदद कर सकते हैं और सही उपचार दे सकते हैं। कुछ आम डायग्नोसिस टेस्ट में शामिल है,
- कोलोनोस्कोपी (आंतों की जांच)
- ब्लड टेस्ट (सूजन और संक्रमण देखने के लिए)
- स्टूल टेस्ट (मल में खून या इन्फेक्शन जांचने के लिए)
- MRI/CT स्कैन (पाचन तंत्र में सूजन की स्थिति देखने के लिए)
इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (IBD) का इलाज क्या है - Treatment Of Inflammatory Bowel Disease IBD In Hindi
डॉ. सुरक्षित की मानें तो आईबीडी का फिलहाल कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन दवाओं और जीवनशैली में बदलाव से इसके लक्षणों को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। इलाज की शुरुआत आमतौर पर सूजन कम करने वाली दवाओं (Anti-inflammatory drugs) से होती है, ताकि आंतों में हो रही जलन को कम किया जा सके।
इसके बाद, अगर जरूरत हो तो इम्यूनोसप्रेसेंट दवाएं दी जाती हैं जो इम्यून सिस्टम की गड़बड़ी को कंट्रोल करती हैं। कुछ गंभीर मामलों में डॉक्टर बायोलॉजिकल थेरेपी (Biologics) की सलाह देते हैं, जो शरीर में मौजूद सूजन से लड़ने वाले खास प्रोटीन को निशाना बनाती है।
अगर दवाओं से आराम न मिले या आंतों में ज्यादा नुकसान हो जाए, तो सर्जरी भी एक विकल्प होता है। साथ ही, मरीज को हल्का, पचने में आसान खाना, तनाव से दूरी, और नियमित व्यायाम जैसे उपाय भी करने चाहिए ताकि बीमारी से बेहतर तरीके से लड़ा जा सके।
डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।
