क्या होता है कोल्ड अर्टिकेरिया, ठंड लगते ही कुछ लोगों को क्यों लाल चकत्ते, खुजली और सूजन हो जाती है
Cold Urticaria Explained In Hindi: क्या कभी ऐसा हुआ है कि ठंडा पानी छूते ही हाथों में खुजली, जलन या लाल चकत्ते निकल आते हैं? बता दें कि बहुत से लोगों के साथ यह समस्या देखने को मिलती है। कई लोग इसे आम सर्दी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन गर्भावस्था के दौरान यह परेशानी डर और बेचैनी बढ़ा सकती है। इस तरह की स्थिति कोल्ड अर्टिकेरिया नाम की कंडीशन की वजह से होता है, जो सेहत के लिए खतरनाक भी हो सकती है। आज के इस लेख में हम इस बीमारी के बारे में सबकुछ जानेंगे....
- Authored by: Vineet
- Updated Dec 7, 2025, 06:09 PM IST
Cold Urticaria Explained In Hindi: कई बार ऐसा होता है कि सर्दियों में जैसे ही हम ठंडा पानी छूते हैं, हाथों पर खुजली शुरू हो जाती है। चेहरे पर हल्की जलन, लाल-लाल दाने और अजीब-सी बेचैनी होने लगती है। तब ज्यादातर लोगों के मन में यही आता है - शायद बहुत ठंड लग गई होगी या स्किन ड्राई हो गई होगी। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये सिर्फ ठंड लगना नहीं, बल्कि एक तरह की एलर्जी भी हो सकती है?
बहुत से लोगों के साथ ऐसा होता है कि ठंडी हवा, एसी, फ्रिज से निकली चीजें या ठंडा पानी छूते ही त्वचा पर रिएक्शन होने लगता है। कभी हल्का, कभी बहुत तेज। कुछ ही मिनटों में उसके हाथों और गालों पर लाल-लाल चकत्ते निकल आए। खुजली इतनी तेज कि लोग खुद को रोक नहीं पाते। होंठ हल्के-हल्के सूजने लगे और दिल घबराने लगता है। इसी स्थिति को मेडिकल भाषा में कोल्ड अर्टिकेरिया (Cold Urticaria) कहा जाता है।
हैरानी की बात यह है कि बहुत से लोग सालों तक इसे पहचान ही नहीं पाते और इसे आम सर्दी या स्किन प्रॉब्लम समझते रहते हैं। आखिर यह बीमारी क्या है और कैसे आपके स्वास्थ्य को प्रभावित करती है, आज के लेख में इस पर विस्तार से चर्चा करते हैं।
कोल्ड अर्टिकेरिया (Cold Urticaria) क्या है?
शारदा अस्पताल के सीनियर कंलस्टेंट डॉक्टर और इंटरनल मेडिसिन एक्सपर्ट डॉ. श्रेय श्रीवास्तव बताते हैं कि कोल्ड अर्टिकेरिया एक तरह की स्किन एलर्जी है, जिसमें ठंड लगते ही शरीर अचानक रिएक्ट करने लगता है। जैसे ही त्वचा ठंडी हवा, ठंडे पानी, बर्फ या किसी ठंडी चीज के संपर्क में आती है, शरीर से हिस्टामिन नाम का केमिकल रिलीज होता है।
यही केमिकल त्वचा पर लाल चकत्ते, खुजली और सूजन पैदा करता है। आसान शब्दों में कहें तो शरीर ठंड को खतरा समझ बैठता है और खुद को बचाने के लिए ये रिएक्शन देने लगता है।
कोल्ड अर्टिकेरिया के लक्षण
कोल्ड अर्टिकेरिया के आम लक्षण क्या होते हैं?
डॉ. श्रीवास्तव की मानें तो इस बीमारी के लक्षण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। कोल्ड अर्टिकेरिया के लक्षण के तौर पर आमतौर पर ये परेशानियां दिखती हैं -
- त्वचा पर लाल उभरे हुए दाने (छाले या चकत्ते)
- तेज खुजली और जलन
- हाथ, पैर, होंठ या आंखों के आसपास सूजन
- ठंडा पानी छूते ही रिएक्शन
- कभी-कभी चक्कर आना या कमजोरी
- बहुत गंभीर मामलों में बेहोशी भी हो सकती है
खासकर ठंडे पानी से नहाना या स्विमिंग बहुत लोगों के लिए सबसे बड़ा ट्रिगर बन जाता है।
आखिर ये बीमारी क्यों होती है?
डॉ. श्रेय श्रीवास्तव बताते हैं कि इस सवाल का जवाब मेडिकल साइंस के पास भी पूरी तरह साफ नहीं है, लेकिन डॉक्टर कुछ मुख्य कारण बताते हैं -
- कमजोर या ओवर-रिएक्टिव इम्यून सिस्टम
- पहले से कोई एलर्जी या अस्थमा होना
- वायरल या बैक्टीरियल इंफेक्शन के बाद शरीर में बदलाव
- कुछ मामलों में जेनेटिक वजह भी
- ज्यादा स्ट्रेस और हार्मोनल बदलाव भी इसे बढ़ा सकते हैं
यानि शरीर का डिफेंस सिस्टम ठंड को गलत तरीके से पहचान लेता है और वहीं से समस्या शुरू होती है।
आखिर ये बीमारी क्यों होती है
क्या ये खतरनाक हो सकता है?
अक्सर लोग इसे मामूली एलर्जी समझ लेते हैं, लेकिन कुछ मामलों में कोल्ड अर्टिकेरिया खतरनाक भी हो सकता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स बताते हैं कि अगर कोई व्यक्ति अचानक बहुत ठंडे पानी में चला जाए, जैसे स्विमिंग पूल या नदी में, तो पूरे शरीर पर रिएक्शन हो सकता है। इससे,
- बीपी गिर सकता है
- सांस लेने में तकलीफ हो सकती है
- गला अचानक सूज सकता है
- बहुत रेयर केस में एलर्जिक शॉक का खतरा भी होता है
डॉक्टर इसका पता कैसे लगाते हैं?
डॉक्टर आमतौर पर इसे पहचानने के लिए एक सिंपल टेस्ट करते हैं, जिसे आइस क्यूब टेस्ट कहते हैं। इसमें कुछ सेकंड के लिए त्वचा पर बर्फ का टुकड़ा लगाया जाता है और देखा जाता है कि उस जगह पर लाल चकत्ता बनता है या नहीं।
लेकिन डॉक्टर साफ कहते हैं कि ये टेस्ट घर पर खुद से नहीं करना चाहिए, क्योंकि गंभीर रिएक्शन का खतरा रहता है। बेहतर है कि यह काम डॉक्टर की निगरानी में हो।
कोल्ड अर्टिकेरिया का इलाज
कोल्ड अर्टिकेरिया का इलाज क्या है?
कोल्ड अर्टिकेरिया का कोई पक्का एकदम खत्म करने वाला इलाज नहीं है, लेकिन इसे कंट्रोल में जरूर रखा जा सकता है -
- डॉक्टर अक्सर एंटीहिस्टामिन दवाइयां देते हैं
- गंभीर केस में इमरजेंसी इंजेक्शन (एपिनेफ्रिन) की सलाह दी जाती है
- ठंड से खुद को बचाना सबसे जरूरी इलाज है
- सही दवा और थोड़ी सावधानी से बहुत लोग नॉर्मल लाइफ जीते हैं।
रोजमर्रा की जिंदगी में कैसे रखें खुद का ध्यान?
डॉ. श्रीवास्तव की मानें तो छोटी-छोटी आदतें इस परेशानी को काफी हद तक कंट्रोल कर सकती हैं -
- सर्दियों में पूरे कपड़े पहनें, हाथ-पैर ढककर रखें
- बहुत ठंडे पानी से न नहाएं, गुनगुना पानी बेहतर है
- अचानक ठंडी जगह से बहुत गर्म जगह (या उल्टा) न जाएं
- कोल्ड ड्रिंक और बहुत ज्यादा आइसक्रीम से बचें
- स्ट्रेस कम रखने की कोशिश करें, नींद पूरी लें
आखिर में दिल से समझने वाली बात
कोल्ड अर्टिकेरिया बाहर से देखने पर छोटी समस्या लग सकती है, लेकिन इसे झेलने वाला इंसान जानता है कि यह कितना डर पैदा कर सकती है। अगर आपको या आपके किसी अपने को ठंड लगते ही ऐसे लक्षण दिखते हैं, तो शर्माने या डरने की जरूरत नहीं है। सही समय पर डॉक्टर से सलाह लेना सबसे समझदारी भरा कदम है। थोड़ी जानकारी, थोड़ा ध्यान और सही इलाज यही इस बीमारी से सुरक्षित रहने की सबसे बड़ी ताकत है।
