Beyond Calories For Weight Loss: वजन घटाने की कोशिश शुरू होते ही सबसे पहले खाने की मात्रा कम कर दी जाती है। रोटी आधी, चावल बंद और पसंदीदा चीजों से पूरी दूरी। इससे कुछ समय के लिए वजन कम दिख सकता है, लेकिन ये भी देखना जरूरी है कि कम खाने के चक्कर में शरीर को कहीं नुकसान तो नहीं हो रहा। क्या इसे पूरा पोषण भी मिल रहा है। स्थायी और स्वस्थ वेट लॉस के लिए केवल कैलोरी कम करना काफी नहीं है। ये भी जानना जरूरी है कि आप जो कैलोरी ले रहे हैं, उसकी गुणवत्ता भी पूरी हो।
वेट लॉस में कम खाएं मगर पोषण को भी ना करें इग्नोर
वजन घटाने का सबसे जाना-पहचाना नियम है- कैलोरी डेफिसिट। यानी शरीर जितनी कैलोरी खर्च करे, उससे कम कैलोरी खाना। इससे वजन तो घटता है, लेकिन पूरी कहानी यहीं खत्म नहीं होती। कैलोरी शरीर को ऊर्जा देती है, जबकि प्रोटीन, फाइबर, विटामिन, मिनरल्स और हेल्दी फैट शरीर को सही तरीके से काम करने में मदद करते हैं। वेट लॉस में होने वाली इसी गलती के बारे में कैलाश हॉस्पिटल एंड न्यूरो इंस्टीट्यूट की कंसल्टेंट–डायटेटिक्स वंदना राजपूत आगाह करती हैं।
कैलोरी और न्यूट्रिएंट्स में क्या अंतर है
वंदना बातती हैं कि कैलोरी से पता चलता है कि किसी भोजन से शरीर को कितनी ऊर्जा मिलेगी। इससे यह जानकारी नहीं मिलती कि भोजन में प्रोटीन, फाइबर, आयरन, कैल्शियम या जरूरी विटामिन कितनी मात्रा में हैं।
यहीं से न्यूट्रिएंट डेंसिटी यानी पोषक तत्वों की गुणवत्ता का महत्व बढ़ जाता है। ऐसा भोजन, जिसमें कैलोरी के मुकाबले अधिक पोषक तत्व मौजूद हों, शरीर के लिए बेहतर माना जाता है।
| भोजन | शरीर पर संभावित असर |
|---|---|
| ओट्स, फल और नट्स का बाउल | फाइबर, हेल्दी फैट और कई माइक्रोन्यूट्रिएंट्स मिलते हैं |
| पैक्ड पेस्ट्री | रिफाइंड आटा, चीनी और अधिक फैट हो सकता है |
| साबुत अनाज और दाल | धीरे पचते हैं और पेट देर तक भरा रख सकते हैं |
| मीठे पेय और पैक्ड स्नैक्स | जल्दी कैलोरी देते हैं, लेकिन तृप्ति कम हो सकती है |
ओट्स और पेस्ट्री की कैलोरी कभी-कभी लगभग बराबर हो सकती है। इसके बावजूद शरीर की प्रतिक्रिया दोनों के प्रति अलग होगी। ओट्स वाला भोजन लंबे समय तक पेट भरा रख सकता है, जबकि पेस्ट्री खाने के कुछ समय बाद दोबारा भूख लग सकती है।
वजन कम करते समय प्रोटीन क्यों जरूरी है
तेजी से वजन घटाने वाली डाइट में शरीर की चर्बी के साथ मांसपेशियां भी कम हो सकती हैं। वजन मशीन पर संख्या कम दिखना हमेशा केवल फैट लॉस का संकेत नहीं होता।
पर्याप्त प्रोटीन शरीर को जरूरी अमीनो एसिड देता है। ये मांसपेशियों की मरम्मत और उन्हें बनाए रखने में मदद करते हैं। मांसपेशियां केवल शरीर को ताकत नहीं देतीं। वे चलने-फिरने, ग्लूकोज के इस्तेमाल और मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाए रखने में भी भूमिका निभाती हैं।
अपनी पसंद और स्वास्थ्य के अनुसार डाइट में प्रोटीन के ये स्रोत शामिल किए जा सकते हैं:
- दालें और फलियां
- दूध, दही और पनीर
- सोया, टोफू और सोया चंक्स
- अंडे
- मछली और लीन मीट
- नट्स और बीज
हर व्यक्ति की प्रोटीन जरूरत अलग हो सकती है। किडनी, लिवर या किसी दूसरी स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में प्रोटीन की मात्रा डॉक्टर या डाइटिशियन से पूछकर तय करनी चाहिए।
क्या वजन घटाने के लिए कार्बोहाइड्रेट बंद करना चाहिए
कार्बोहाइड्रेट को अक्सर वजन बढ़ने का जिम्मेदार मान लिया जाता है। असल में उसकी मात्रा के साथ उसकी गुणवत्ता भी मायने रखती है। साबुत अनाज, फल, सब्जियां और फलियों में मिलने वाले कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट के साथ फाइबर भी मिलता है। फाइबर भोजन को धीरे पचने में मदद करता है। इससे पेट लंबे समय तक भरा महसूस हो सकता है और भोजन के बाद ब्लड शुगर में अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने में सहायता मिल सकती है।
इसके उलट रिफाइंड आटा, मिठाइयां, मीठे पेय और कई अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड जल्दी पच जाते हैं। इन्हें बार-बार और अधिक मात्रा में खाने से ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है। कम शारीरिक गतिविधि के साथ ऐसी आदत लंबे समय में मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है।
बार-बार भूख लगना केवल इच्छाशक्ति की कमी नहीं
कई लोग डाइट पर टिक नहीं पाने के लिए स्वयं को दोष देने लगते हैं। हालांकि भूख केवल इच्छाशक्ति से नियंत्रित नहीं होती। इसमें घ्रेलिन और GLP-1 जैसे कई हार्मोन भी भूमिका निभाते हैं।
प्रोटीन, फाइबर और कम प्रोसेस्ड भोजन आमतौर पर बेहतर तृप्ति देते हैं। दूसरी ओर, बहुत अधिक प्रोसेस्ड फूड मुलायम, स्वाद में तेज और जल्दी खाने योग्य होते हैं। इस कारण व्यक्ति अपनी जरूरत से अधिक मात्रा खा सकता है।
इसलिए ऐसी डाइट ज्यादा व्यावहारिक होती है, जो भूखा रखने के बजाय स्वाभाविक रूप से पेट भरा महसूस कराए।
हेल्दी वेट लॉस प्लेट कैसी हो सकती है
हर भोजन की कैलोरी गिनना सभी के लिए आसान या जरूरी नहीं है। इसकी जगह प्लेट को संतुलित बनाने पर ध्यान दिया जा सकता है।
- आधी प्लेट मौसमी सब्जियों या सलाद से भरें।
- एक हिस्सा दाल, पनीर, टोफू, अंडा या दूसरे प्रोटीन स्रोत का रखें।
- एक हिस्सा रोटी, ब्राउन राइस या दूसरे साबुत अनाज के लिए रखें।
- सीमित मात्रा में नट्स, बीज या दूसरे हेल्दी फैट लें।
- जूस की जगह साबुत फल चुनें।
- मीठे पेय और पैक्ड स्नैक्स को रोज की आदत न बनाएं।
बहुत कम खाने से वजन तो घटेगा, लेकिन क्या नुकसान होगा
जरूरत से बहुत कम खाना थकान, कमजोरी, चिड़चिड़ापन और पोषक तत्वों की कमी का कारण बन सकता है। लंबे समय तक अत्यधिक कैलोरी प्रतिबंध रखने से मांसपेशियां भी कम हो सकती हैं। नतीजा यह होता है कि वजन तो घटता है, लेकिन शरीर मजबूत और स्वस्थ महसूस नहीं करता।
स्वस्थ वजन घटाने का लक्ष्य केवल शरीर को छोटा करना नहीं, बल्कि फैट कम करते हुए मांसपेशियों और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को सुरक्षित रखना होना चाहिए। इसलिए सवाल सिर्फ यह नहीं होना चाहिए कि मैं कितना कम खाऊं। बेहतर सवाल है- मैं अपनी जरूरत के अनुसार कितना और कैसा खाना खाऊं?
कैलोरी का महत्व है, लेकिन वे तस्वीर का केवल एक हिस्सा हैं। लंबे समय तक टिकने वाला वेट लॉस भूखे रहने से नहीं, संतुलित और पोषक भोजन चुनने से आता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। किसी बीमारी, गर्भावस्था या विशेष डाइट की स्थिति में डॉक्टर अथवा योग्य डाइटिशियन से व्यक्तिगत सलाह लें।
