Flu से Fight: फ्लू का सीजन शुरू होने से पहले वैक्सीन लगवाना बेहतर माना जाता है। लेकिन अगर आप समय पर टीका नहीं लगवा सके तो क्या अब वैक्सीन लेने का कोई फायदा नहीं होगा? क्या फ्लू का टीका लगते ही शरीर को सुरक्षा मिल जाती है? ऐसे कई सवाल इस समय लोगों के मन में हैं।
तेजी से बढ़ रहे Swine Flu के मामले, क्या अब Vaccine लगवा सकते हैं आप
डॉ. अमित प्रकाश सिंह, कंसल्टेंट–इंटरनल मेडिसिन, सीके बिरला हॉस्पिटल, दिल्ली के अनुसार, फ्लू वैक्सीन लगवाने में देर होने का मतलब यह नहीं है कि अब इसका कोई लाभ नहीं मिलेगा। यदि आपके शहर या आसपास के इलाकों में इन्फ्लुएंजा के मामले सामने आ रहे हैं तो सीजन के बीच में लगवाई गई वैक्सीन भी सुरक्षा दे सकती है।
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि फ्लू वैक्सीन तुरंत असर नहीं करती। शरीर को सुरक्षात्मक एंटीबॉडी बनाने में आमतौर पर करीब दो सप्ताह लगते हैं। CDC के अनुसार, इसी वजह से स्थानीय स्तर पर फ्लू फैलने से पहले वैक्सीन लगवाना अधिक फायदेमंद रहता है।
Flu Vaccine Facts and Myths
मिथक 1: सही महीना निकल गया तो अब फ्लू वैक्सीन लगवाने का फायदा नहीं
सच: अगर फ्लू वायरस अभी भी फैल रहा है तो देर से लगवाई गई वैक्सीन भी उपयोगी हो सकती है। यह संक्रमण का खतरा कम करने के साथ गंभीर बीमारी और उससे जुड़ी जटिलताओं की आशंका घटाने में मदद कर सकती है।
भारत जैसे देश में फ्लू का एक ही तय सीजन मानना मुश्किल है। अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश, नमी, तापमान और स्थानीय संक्रमण के आधार पर इसके मामले अलग समय पर बढ़ सकते हैं। इसलिए केवल कैलेंडर देखकर यह तय न करें कि वैक्सीन का समय निकल चुका है।
मिथक 2: फ्लू वैक्सीन लगते ही इम्युनिटी बन जाती है
सच: वैक्सीन लगवाने के तुरंत बाद शरीर फ्लू से सुरक्षित नहीं हो जाता। सुरक्षात्मक एंटीबॉडी बनने में लगभग दो सप्ताह लग सकते हैं।
इस बीच व्यक्ति फ्लू वायरस के संपर्क में आता है तो वह संक्रमित हो सकता है। इसका अर्थ यह नहीं कि वैक्सीन ने फ्लू कर दिया। संभव है कि संक्रमण वैक्सीन लगने से ठीक पहले या इम्युनिटी बनने के शुरुआती दिनों में हुआ हो।
मिथक 3: फ्लू का टीका लगवाने से ही फ्लू हो सकता है
सच: इंजेक्शन के रूप में दी जाने वाली इनएक्टिवेटेड फ्लू वैक्सीन इन्फ्लुएंजा नहीं कर सकती। इसमें ऐसा सक्रिय वायरस नहीं होता जो शरीर में फ्लू का संक्रमण पैदा कर सके। WHO भी इस धारणा को गलत बताता है।
वैक्सीन के बाद कुछ लोगों को ये हल्के लक्षण हो सकते हैं:
- इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द या सूजन
- हल्का बुखार
- थकान या बदन दर्द
- एक-दो दिन असहज महसूस होना
ये सामान्य इम्यून प्रतिक्रिया हो सकती हैं और आमतौर पर थोड़े समय में ठीक हो जाती हैं।
मिथक 4: जीवन में एक बार फ्लू शॉट लगवाना काफी है
सच: फ्लू की वैक्सीन आमतौर पर हर साल लेने की सलाह दी जाती है। इसका एक कारण यह है कि इन्फ्लुएंजा वायरस समय के साथ बदलते रहते हैं। दूसरा कारण है कि वैक्सीन से मिली सुरक्षा धीरे-धीरे कम हो सकती है।
हर सीजन में फैलने की आशंका वाले वायरस स्ट्रेन को ध्यान में रखकर वैक्सीन का फॉर्मूलेशन अपडेट किया जाता है। इसलिए पिछले साल लगवाई गई वैक्सीन को इस साल की पूरी सुरक्षा मान लेना ठीक नहीं है। WHO के मुताबिक, समय के साथ इम्युनिटी घटने के कारण सालाना वैक्सीनेशन जरूरी है।
मिथक 5: स्वस्थ लोगों को फ्लू वैक्सीन की जरूरत नहीं होती
सच: स्वस्थ व्यक्ति को भी इन्फ्लुएंजा हो सकता है। वह संक्रमण को घर के बुजुर्गों, बच्चों या कमजोर इम्युनिटी वाले सदस्यों तक पहुंचा सकता है। हालांकि, कुछ लोगों के लिए फ्लू वैक्सीनेशन विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।
| किन लोगों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए | कारण |
|---|---|
| छोटे बच्चे | इम्यून सिस्टम अभी विकसित हो रहा होता है |
| वरिष्ठ नागरिक | गंभीर संक्रमण और जटिलताओं का जोखिम अधिक |
| गर्भवती महिलाएं | फ्लू ज्यादा गंभीर रूप ले सकता है |
| अस्थमा या फेफड़ों की बीमारी वाले लोग | सांस की परेशानी बढ़ सकती है |
| डायबिटीज और हृदय रोग के मरीज | संक्रमण से मौजूदा बीमारी बिगड़ सकती है |
| कमजोर इम्युनिटी वाले मरीज | बीमारी लंबे समय तक या गंभीर रह सकती है |
इन लोगों को वैक्सीन के सही प्रकार और समय के लिए अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
मिथक 6: वैक्सीन लगने के बाद फ्लू कभी नहीं होगा
सच: कोई भी वैक्सीन 100 प्रतिशत सुरक्षा की गारंटी नहीं देती। फ्लू वैक्सीन का असर व्यक्ति की उम्र, सेहत, इम्यून प्रतिक्रिया और उस समय फैल रहे वायरस स्ट्रेन से वैक्सीन के मेल पर निर्भर कर सकता है।
वैक्सीन लगवाने के बाद भी फ्लू हो सकता है, लेकिन टीकाकरण बीमारी की गंभीरता, अस्पताल में भर्ती होने और जटिलताएं बढ़ने का जोखिम कम कर सकता है। इसलिए केवल यह सुनकर वैक्सीन को बेअसर न मानें कि टीका लगवाने वाले किसी व्यक्ति को भी फ्लू हो गया।
मिथक 7: फ्लू वैक्सीन सिर्फ सर्दियों में काम आती है
सच: भारत जैसे उष्ण और उपोष्ण क्षेत्रों में इन्फ्लुएंजा साल के अलग-अलग महीनों में फैल सकता है। कुछ स्थानों पर मानसून के दौरान मामले बढ़ते हैं, जबकि दूसरे क्षेत्रों में सर्दियों में ज्यादा संक्रमण देखा जा सकता है।
WHO की गाइडेंस के अनुसार, ऐसे देशों में वैक्सीनेशन का समय स्थानीय फ्लू गतिविधि के मुख्य दौर को ध्यान में रखकर तय होना चाहिए। इसलिए उत्तर भारत, दक्षिण भारत और दूसरे क्षेत्रों में उपयुक्त समय अलग हो सकता है।
क्या फ्लू होने के दौरान वैक्सीन लगवाई जा सकती है
अगर केवल मामूली सर्दी या हल्की तबीयत खराब है, तब भी कई मामलों में वैक्सीनेशन संभव हो सकता है। लेकिन तेज बुखार, गंभीर संक्रमण या स्वास्थ्य की दूसरी समस्या होने पर पहले डॉक्टर से बात करें। वैक्सीन चल रहे फ्लू का इलाज नहीं करती। यह आने वाले संक्रमण से सुरक्षा के लिए दी जाती है।
आखिर अब फ्लू वैक्सीन लगवाएं या नहीं
अगर आपके क्षेत्र में फ्लू के मामले अभी चल रहे हैं तो केवल इस वजह से वैक्सीन छोड़ देना ठीक नहीं कि सही महीना तो अब निकल गया। देर से लगवाई गई वैक्सीन भी आगे के संक्रमण से बचाव में मदद कर सकती है। बस यह याद रखें कि सुरक्षा बनने में करीब दो सप्ताह लगेंगे।
अपनी उम्र, पुरानी बीमारियों, एलर्जी, गर्भावस्था और पहले ली गई फ्लू वैक्सीन की जानकारी डॉक्टर को जरूर दें। बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों और गंभीर बीमारी वाले मरीजों के लिए वैक्सीन का सही प्रकार और समय डॉक्टर की सलाह से ही तय करें।
Disclaimer: यह लेख जागरूकता के लिए है। वैक्सीनेशन से संबंधित व्यक्तिगत सलाह के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
